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एक ही भूल - एक रोमांचक कहानी - Story - Stories

एक ह
 

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घर छोड़ने से पहले - एक कहानी - Story - Stories

घर छ
 

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मन का डर - रोमांचक कहानी - Stories - Story

मन क
 

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नाम याद नहीं मुझे - love story - love stories

नाम
 

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क्या नाम दूँ - एक प्यारी कहानी - Story - Stories

क्य
 

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कुदरत का फैसला - रोमांचक कहानी - Story - Stories

 कुद
 

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इश्क समंदर - एक प्यारी कहानी - love stories - love story

19 में पहुंचते ही उर्वशी को चॉकलेट आइसक्रीम, बेक समोसे के साथ, गुलाब के पीले, सफेद और लाल फूल पसंद आने लगे थे । उसे बढ़िया कपड़े पहने वह सजने सवरने का शौक भी लग गया था । वह घंटों आईने के सामने बैठी खुद को निहारती रहने लगी थी। उसकी चाल ढाल, रहन सहन व व्यवहार में एकदम से फर्क आ गया था। क्यों? क्योंकि, इश्क की उम्र ही 19 में शुरू होती है । हालांकि लोग कहते हैं यह 19 से थोड़ा पहले गुदगुदाने लगती है । उर्वशी इश्क समंदर के किनारे खड़ी थी, जहां रह रहकर इश्क की लहरें उससे टकरा रही थी। या कहना चाहिए कि बुला रही थी। उसका सजना सवरना, गुलाब के फूलों को चूमना और प्रेम पत्रों को छाती से चिपका कर झूमना इश्क समंदर में उतरने की तैयारी भर थी या शायद वह एक कदम बढ़ा चुकी थी, कह नहीं सकते । पृथ्वी को सूरज का एक चक्कर लगाने में कितने दिन लगते हैं? जवाब है 365 । ठीक इतने ही चक्कर एक खत उर्वशी तक पहुंचाने के लिए उसके प्रेमी पृथ्वी को एक हफ्ते में काटने पड़ते थे । क्योंकि इश्क समंदर में डूबकी लगा चुके लोगों की नजरें निरंतर उन्हें देख रही थी और उनकी प्रत्येक गतिविधि पर उनकी नजरें थी। इश्क समंदर के लोगों में उर्वशी की मां भी थी, जिसने जल्द भाप लिया था कि उर्वशी की जूतियां छोटी हो गई हैं। इसलिए 1 दिन पास बैठा कर उसने उर्वशी को कहा- "बेटी में देख रही हूं कि तू बड़ी हो रही है। शारीरिक और मानसिक परिवर्तन से गुजर रही है । संभाल कर रहना। यह उम्र ऐसी होती है कि अक्सर लड़कियां फिसल जाती हैं ।" मां आगे कुछ कहती इससे पहले ही उर्वशी तपाक से पूछ बैठी है- "क्या आप फिसली थी माँ"। उर्वशी के मुख से अनायास निकले इस प्रश्न ने मां की आंखों को ठहरा दिया ।उर्वशी ने देखा कि उन आंखों में अचानक समंदर की लहरें उफान मारती हुई आ गई हैं । जैसे कोई पुरानी डूबी स्मृति बाहर आना चाहती हो। मां ने एक क्षण सोचा कि उर्वशी को झापड़ मार कर मर्यादा में रहने का पाठ पढ़ा दे । लेकिन अगले ही क्षण वह रुक गई और उसने उर्वशी को कहा- "नहीं , मैं नहीं थी । पर वह फिसला था"। और फिर मां ने उर्वशी को वह कहानी सुनाई जब वह खुद उर्वशी थी और उसके लिए चक्कर लगाने वाला पृथ्वी था। " वह ठीक सामने वाले घर में रहता था।" मां ने बताना शुरू किया । "हमेशा मुस्कुराता हुआ, हरदम मुझे देखता हुआ। ऐसा लगता था जैसे उसकी दुनिया में सिर्फ मैं ही हूं। मैं उसे पसंद करने लगी थी । एक दिन उसने छोटे बच्चे के हाथ किताब भिजवाई। किताब में एक गुलाब और खत था।मेरे दिल की धड़कन इतनी बढ़ गई थी कि मैं उसे सुन सकती थी। फूल हाथ में लेकर काँपते हाथों से मैंने खत खोला। " उसमें क्या लिखा था?" उर्वशी ने पूछा । "मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुमसे शादी करने का इरादा है। अगर तुम मुझे पसंद करती हो तो इस गुलाब को चूम लेना। मैं तुम्हें देख रहा हूं ।हमेशा तुम्हारे सामने रहने वाला, पृथ्वी।" " मैंने देखा वह छत पर खड़ा मुझे देख रहा था।" मां कहते हुए रुक गई । "तो क्या आपने गुलाब को चुना था ?"उर्वशी ने मां के कंधों को कसकर पकड़ते हुए पूछा। "मैं कैसे चूम सकती थी। उसके बारे में सोचने से पहले मुझे मां पिताजी का ख्याल आया। उनकी इज्जत उनका मान-सम्मान। मैं कैसे मर्यादा की सीमा लांग सकती थी ।मेरे लिए सबसे पहले वे थे जिन्होंने मुझे जन्मा था, पाला पोसा था जान से ज्यादा चाहा था।" " फिर आपने क्या किया ?" उर्वशी ने पूछा। " मैंने गुलाब और खत वापस किताब में रख दिए।" ठंडी सांस लेते हुए मां ने कहा। "नहीं माँ आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था।" उर्वशी ने विरोध जताते हुए कहा। "हां बेटी अगर मैं तेरी जगह होती तो शायद ऐसा ही करती। पर तू खुद को मेरी जगह रख कर देख। क्या तू गुलाब चूम लेती ? मां उर्वशी की आंखों में देखते हुए पूछा । जैसे वह जानना चाहती हो कि क्या वह उर्वशी को सही संस्कार दे पाई है । कुछ सोचते हुए उर्वशी ने कहा- " नहीं मैं गुलाब नहीं चूमती लेकिन तुम्हें जरूर बताती कि मैं किसे पसंद करती हूं ।" "मां ने उर्वशी का माथा चुनते हुए आशीर्वाद दिया और कहा मैं यही चाहती हूं " मां के दोस्ताना व्यवहार ने उर्वशी को इश्क समंदर में उतरने से पहले ही एहसास करा दिया कि भले ही वह स्वतंत्र हैं लेकिन समाज की रीतियों का उसे ध्यान रखना होगा क्योंकि किसी एक के लिए अपनों को छोड़ देने में भलाई नहीं है। समझदारी इसमें है कि सबको साथ लेकर किसी एक का हो जाए आ जाए । और समझदारी से काम लेते हुए कुछ सालों बाद एक दिन उर्वशी पृथ्वी की हो गई और इश्क समंदर में तैरने लगी। मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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प्यार में विश्वास ना हो तो सालों का रिश्ता भी टूटते देर नहीं लगती - Sad Story - Sad Stories

ये Heart Touching Kahani है अरविन्द और श्वेता की जो एक दूसरे से प्यार तो बहुत करते थे लेकिन सिर्फ एक ग़लतफहमी की वजह से सब बर्बाद हो गया. दोस्तों, ये हिंदी कहानी अंत तक ज़रूर पढ़े, हर बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड या पति पत्नी के लिए एक ज़रूरी सीख है. अरविन्द और श्वेता में बहुत गहरा प्यार है, दोनों की शादी को 5 साल हो चुके है लेकिन उनकी ज़िन्दगी अभी भी अधूरी सी है क्यूंकि इनके को बच्चा नहीं है. फिर भी, इन्हे विश्वास है कि इस साल इन्हे बच्चा हो जाएगा. दोनों के बीच इतना प्यार है कि ये एक दूसरे के बिना बिलकुल नहीं रह सकते. बच्चा ना होने की वजह से अरविन्द के माँ बाप श्वेता को कभी-कभी ताने मार देते है और श्वेता भी सुन लेती है क्यूंकि उसे यकीन है कि उसे बच्चा ज़रूर होगा. यूँ ही समय बीतता चला गया और एक दिन जब अरविन्द ऑफिस से घर आ रहा था तो उसने श्वेता को बाजार में किसी दूसरे मर्द के साथ देखा. श्वेता और वो व्यक्ति बहुत खुश लग रहे थे और ऐसा लग रहा था कि वे दोनों एक दूसरे को काफी वक्त से जानते हो. अरविन्द घर आ गया और फिर थोड़ी देर बाद श्वेता भी आ गयी. श्वेता के आते ही अरविन्द ने उससे पुछा “श्वेता…कहा गयी थी?” श्वेता ने हँसते हुए कहा “मैं बाज़ार गयी थी, घर का कुछ सामान लाना था” ये सुन कर अरविन्द को थोड़ा गुस्सा आया लेकिन उसने श्वेता को कुछ नहीं कहा. उसके बाद अरविन्द ने श्वेता को कई बार वही आदमी के साथ अलग अलग जगहों पर देखा और एक दिन अरविन्द ने देखा कि वो आदमी श्वेता को घर तक छोड़ने आया था. श्वेता उसके साथ बहुत खुश लग रही थी, उस व्यक्ति ने को घर के बाहर छोड़ा और फिर चला गया. अरविन्द का दिल बहुत दुःख रहा था लेकिन श्वेता को खो देने के डर से उसने उसे कुछ नहीं बोला. एक दिन अरविन्द घर पर बैठा था कि तभी श्वेता का मोबाइल फ़ोन बजा. श्वेता बाथरूम में थी इसलिए अरविन्द ने फ़ोन उठा लिया. फ़ोन उठाते ही दूसरी तरफ से आवाज़ आई “हेलो अरविन्द, मैं थोड़ी देर में घर आ रहा हूँ, कुछ ज़रूरी बात करनी है” बस इतना कह कर उस आदमी ने फ़ोन काट दिया. अब अरविन्द ये सोचने लगा कि उस आदमी को उसका नाम कैसे पता, अरविन्द के दिमाग में कई तरह के ख़याल आ रहे थे. अरविन्द को लगा कि शायद ये वो आदमी है जिसके साथ श्वेता अक्सर घूमती है. अरविन्द को लगा कि शायद श्वेता उससे डाइवोर्स लेना चाहती है और इस सिलसिले में बात करने वो व्यक्ति घर आ रहा है, अरविन्द बहुत उदास हो गया. वो अपनी शादी को टूटने नहीं देना चाहता था लेकिन चूँकि श्वेता ने धोखा दिया, उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. अरविन्द जैसे अपनी पत्नी को खोने के डर से घबरा गया था और वही ज़मीन पर गिर गया. इतने में श्वेता भी बाहर आ गयी और उसने अरविन्द को उठाया और पुछा “क्या हुआ तुम्हे, तुम ठीक तो हो?” अरविन्द ने गुस्से में श्वेता को धक्का दिया और वो गिर गयी और उसका सिर पास रखे टेबल पर लगा. श्वेता कोई हरकत नहीं कर रही थी. कांपते हुए हाथो से अरविन्द ने श्वेता को अपनी बांहो में उठाया और देखा कि उसके सर पर बहुत गहरी चोट लगी है जिसकी वजह से श्वेता बेहोश हो गयी है. तभी अरविन्द की नज़र श्वेता के हाथो में पकडे हुए एक एनवेलप पर गयी. उसने एनवेलप खोला तो उसमे लिखा था “Dear Arvind, मैं तुम्हे कई दिनों से बताना चाहती थी लेकिन सोचा कि तुम्हे सरप्राइज दू. मैं पिछले कुछ दिनों से अपने इलाज के लिए एक डॉक्टर के पास गयी थी और वो डॉक्टर मेरा वही cousin था जो बचपन में फॉरेन चला गया था. उसने मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया था और अब मैं 2 महीने प्रेग्नेंट हूँ. आज मैंने अपने उस cousin को खाने पर बुलाया है, तुम उससे मिल कर बहुत खुश होंगे. तभी दरवाज़े की घंटी बजती है और अरविन्द दौड़ कर दरवाज़ा खोलता है. दरवाज़े पर श्वेता का वही cousin खड़ा था और वो कहता है “अरविन्द…मैं नीरज हूँ, श्वेता का भाई, कैसे हो तुम?” तभी नीरज की नज़र श्वेता पर पड़ती है जो खून से सनी हुई ज़मीन पर पड़ी थी. नीरज फ़ौरन श्वेता को हॉस्पिटल ले जाता है और वहां श्वेता कोमा में चली जाती है. श्वेता अपने बच्चे को भी खो देती है. अरविन्द अपना सिर पकडे श्वेता के पैरो पर बैठा उससे माफ़ी माँगना चाहता था लेकिन श्वेता अभी भी कोमा में ही थी. एक छोटी सी गलत फेहमी ने श्वेता और अरविन्द के रिश्ते में भूचाल ला दिया. दोस्तों, ये कहानी हमें बहुत बड़ी सीख देती है. गहरे रिश्ते में किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले अपने पार्टनर से बात ज़रूर करनी चाहिए. खामियां हम सबमे होती है लेकिन अपने पार्टनर पर इल्जाम लगाने से पहले अच्छे से जांच ले और सबसे ज़रूरी उससे खुल कर बात करे. आप जो देखते है या सुनते है वो ज़रूरी नहीं कि सच हो. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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