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देर से ही सही प्यार का एहसास तो हुआ - Love Story - Love Stories

संजना बहुत छोटी थी तभी उसकी माँ गुजर गयी, वो बिलकुल अकेली हो गयी थी, रिश्तेदारों ने उसके पापा को दूसरी शादी कर लेने को कहा, चुकी संजना बहुत छोटी थी और उसके पापा वर्मा जी उसे अकेले नहीं संभाल पाते इसलिए उन्होंने दूसरी शादी कर ली, उनकी दूसरी पत्नी बहुत सुन्दर थी, उसकी सुंदरता देख कर वर्मा जी इतने कायल हो गए की वो संजना को भूल से गए थे, अब तो उनकी जिंदगी उनकी पत्नी तक ही सिमट कर रह गयी थी, वो ऑफिस से आते और अपनी पत्नी के पास चले जाते, उनकी पत्नी भी वर्मा जी को खुश करने में लगी रहती थी, वर्मा जी भी अपनी किस्मत पर खुश हो रहे थे, एक बेटी के रहते उन्हें दूसरी पत्नी इतनी सुन्दर मिली ये कभी सोच नहीं सकते थे,हलाकि वर्मा जी खुद देखने में ज्यादा सुन्दर नहीं थे,ना ही उनकी पहली पत्नी ज्यादा सुन्दर थी इसलिए संजना भी सुन्दर नहीं हुई, कुछ सालो के बाद वर्मा जी को दूसरी बेटी हुई जो बिलकुल अपनी माँ पर गयी, वो भी अपनी माँ की तरह बहुत ही खूबसूरत थी, वर्मा जी अब अपनी दूसरी पत्नी और बेटी तक सिमट कर रह गए थे,वो संजना को भूल से गए थे, संजना को उसकी सौतेली माँ नौकरानी बना कर रख दी थी , अपने ही घर में उसे दुसरो की तरह व्यवहार किया जाता था, और उसकी छोटी बहन भी उसे कभी बड़ी बहन नहीं मानी, उसे हमेशा नौकरानी ही समझा.संजना की छोटी बहन जिसका नाम वंदना था, वो बिलकुल अपने माँ की तरह थी, सुन्दर और संजना को नौकरानी समझने वाली, संजना ना कभी अपनी माँ की बात का जवाब देती ना ही अपनी छोटी बहन वंदना का, वो सिर्फ और सिर्फ घर का सारा काम करके पढ़ाई करती, काम और पढ़ाई के अलावे उसेक जीवन में कुछ भी नहीं था, इसलिए वो हर क्लास में टॉप आती थी, उसके उलट वंदना पढ़ाई के बदले मस्ती करती थी, वर्मा जी वंदना और उसकी माँ की हर मनोकामना पूरी करते थे, वंदना जिद करके भी अपनी मांग मनवा लेती थी,जबकि संजना ने कभी जिद किया ही नहीं, उसे डर था की उसकी मांग कभी पूरी नहीं होगी और ज्यादा जिद किया तो उसे घर से निकल दिया जायेगा, क्योंकि उसे घर में कोई भी पसंद नहीं करता था, वो सिर्फ काम वाली बन कर रह गयी थी, धीरे-धीरे वक्त बीतता चला गया और संजना बड़ी हो गयी, श्यामली रंग की संजना भले ही बहुत सुन्दर ना हो लेकिन वो बहुत ही समझदार,मेहनती,काम करने वाली और पढ़ने में बहुत ही तेज थी, अपनी पढ़ाई और अच्छी रिजल्ट की वजह से उसे एक अच्छी जॉब भी मिल गयी, इधर वंदना पढ़ाई छोड़ मस्ती करती थी,रात भर पार्टी करना, शराब पीना,क्लब जाना, और ना जाने क्या क्या शौक थे उसके. वो बहुत ही मुँह फट और बद्तमीज हो गयी थी, उसे अपनी सुंदरता का घमंड भी था, जैसे-तैसे करके उसने अपनी पढ़ाई पूरी की. इधर संजना जिस कम्पनी में काम करती थी, उसका मालिक बहुत अच्छा था, उसकी पत्नी उसके बेटे के 5 साल होते ही चल बसी थी और उसने दूसरी शादी नहीं की , अपना सारा ध्यान अपने कम्पनी की तरफ लगा दिया, जिसकी वजह से आज उसकी कंपनी शहर की सबसे प्रसिद्ध कम्पनी हो गयी थी, उसका बेटा संजीव भी बिना माँ और बिना पापा के प्यार के पला-बढ़ा था जिसकी वजह से वो भी बद्तमीज और घमंडी बन गया था, घमंड था उसे अपने पैसे का और अपनी स्मार्टनेस का, उसके पापा शर्मा जी बहुत परेशान हो गए थे उनकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, क्योंकि ज्यों-ज्यों संजीव बड़ा होता गया वो और बद्तमीज होता गया, पैसे की कमी ना होने की वजह से अक्सर रात को पार्टी में जाता, क्लब में जाता, शराब पीता, और घर लेट से आता. एक दिन वो रात को क्लब में शराब पि रहा था और डांस कर रहा था, तभी वो वंदना से टकरा गया, और दोनों की निगाहें आपस में मिली और फिर क्या था, वो दोनों अक्सर किसी ना किसी पार्टी में मिल जाया करते थे, हमेशा एक दूसरे से टकराने की वजह से दोनों में पहले दोस्ती हुई फिर दोनों में प्यार हो गया, क्योंकि दोनों जिंदगी जीने का नजरिया समान जो था, दोनों मस्ती करते और जिंदगी की टेंशन ना लेते, धीरे-धीरे संजीव और वंदना में प्यार हो गया,और दोनों शादी की सोचने लगे, लेकिन शर्मा जी ने अपने बेटे के लिए कोई और ही पसंद कर लिया था, उसका नाम संजना था, शर्मा जी को संजना बहुत पसंद आयी, उसका काम करने का तरीका और समझदारी देख कर उन्हें लग गया था जिस तरह ये कम्पनी में काम करती है, उसी तरह यह मेरे बेटे की जिंदगी भी सवार देगी, इसलिए उसने संजना से अपने बेटे की शादी की बात उससे कह डाली, संजना सुन कर कुछ देर शांत रही फिर हाँ बोल दी, शाम को शर्मा जी ने अपने बेटे को बुलाया और बोला की उन्होंने उसकी शादी ठीक कर दी है, ये सुन कर संजीव गुस्सा हो गया और उसने बोला की वो किसी और से प्यार करता है और उसी से शादी करेगा, ये सुन कर शर्मा जी सोच में पड़ गए और उन्होंने उस लड़की का पता किया तो उन्हें पता चला की लड़की भी उनके बेटे की तरह है, दोनों देर रात तक पार्टी करते हैं और पैसे खर्च करते हैं, शर्मा जी परेशान हो गए और उनकी परेशानी की सबब जब संजना ने पूछा तो शर्मा जी ने बताया की उनका बेटा बिना माँ के पला बढ़ा है, ना जाने कब उसे अक्ल आएगी. वो बहुत जिद्दी हो गया है, जिसे सुन कर संजना ने कहा वक्त के साथ साथ सब सही हो जायेगा, टेंशन ना ले. शर्मा जी शाम को घर गए और बेटे को कहा की उसे उन्ही के द्वारा तय की हुई लड़की से शादी करनी होगी,वरना उसे जायदाद से कुछ नहीं मिलेगा, ये सुन कर संजीव सोच में डूब गया उसने ये बात जब वंदना से बताई तो वंदना ने कहा पापा के बताई लड़की से शादी कर ले, और उसे इतने परेशान करो की वो खुद तुम्हे छोड़ दे, उसके बाद वो दोनों शादी कर लेंगे. संजीव उसकी बात मान ली,और अपने पापा के बताये लड़की से शादी की बात मान ली, जब शादी हुई तो पता चला की संजीव की शादी संजना से हो रही है, वंदना को भी उसी दिन पता चला और संजीव को भी जिस लड़की से शादी हो रही है वो वंदना की बड़ी बहन है.अब तो वंदना और गुस्सा हो गयी,कल तक तो वो अपनी बहन को पसंद नहीं करती थी आज उससे नफरत करने लगी, क्योंकि उसने उसके बॉय फ्रेंड को उससे जुदा जो कर दिया था. जहां संजीव शादी के बाद संजना को परेशान करता था वहीँ संजना संजीव से बहुत प्यार करती थी, क्योंकि उसे बचपन से कभी प्यार नहीं मिला था,इसलिए वो संजीव से प्यार पाने में लग गयी थी, संजीव का ख्याल रखती थी, लेकिन संजीव संजना को पसंद नहीं करता था, इधर संजीव के पापा बीमार पड़े, संजना ने काफी कोशिश की लेकिन शर्मा जी बच नहीं पाए. और एक दिन वो चल बसे. शर्मा जी के जाने के बाद सारी जयदाद का मालिक संजीव हो गया और उसने संजना को इतना तंग किया की वो घर छोड़ दे, अंत में संजना को संजीव से तलाक लेना पड़े, और संजना उसे छोड़ कर चली गयी, उसके बाद संजीव ने वंदना से शादी कर ली और दोनों ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे. अब तो लेट नाईट तक पार्टी चलती रहती थी, संजीव ऑफिस भी नहीं जाता था, जिसकी वजह से कम्पनी को नुकसान होने लगा, धीरे-धीरे कंपनी बंद होने के कगार पर आ गयी, अब तो पैसे भी आने बंद हो गए थे, संजीव वापस कम्पनी में काम करने के लिए आ गया,लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था,उसने काफी कोशिश की लेकिन वो कम्पनी को चला नहीं पा रहा था, इस टेंशन में वो बीमार पड़ गया और उसने वंदना से कहा की आज रात मेरे साथ रहो,जबकि वंदना पार्टी जाने के लिए तैयार हो रही थी, उसने कहा, तुम बीमार हो मैं क्यों यहाँ रहू, तुम डस्टर को बुला लो मुझे पार्टी जाने में लेट हो रही है मैं जा रही हो, ये सुन कर संजीव को बहुत दुःख हुआ और उसे संजना की याद आने लगी उसे अब अपने गलती का एहसास हो गया था, उसने डॉक्टर को बुलाया और अपना इलाज करवाया, सही होने के बाद वो संजना को ढूढ़ने लगा, संजना का पता चला वो उससे मिलने चला गया,संजीव ने संजना से माफ़ी मांगी और उससे मिन्नतें की वो वापस कम्पनी ज्वॉइन कर ले, संजना आज भी संजीव से प्यार करती थी इसलिए वो टूट गयी और कम्पनी में वापस काम करने लगी, धीरे-धीरे संजना वापस कम्पनी को ऊपर लाने लगी,संजीव बहुत खुश था,अब वो घर से ज्यादा ऑफिस में रहता था, पार्टी जाना भी बंद कर दिया था, वो सारा ध्यान कंपनी में लगा रहा था, लेकिन वंदना को ये बात पता चल गयी की संजना वापस कम्पनी आ गयी है, उसने संजीव से कहा की वो संजना को काम से निकाल दे, लेकिन संजीव नहीं माना, वंदना को लग चूका था की संजीव की जिंदगी में संजना एक बार फिर वापस आ गयी है, अब तो रोज झगड़े होने लगे,लेकिन संजीव था की संजना को काम से नहीं निकाल रहा था, कहीं ना कहीं वंदना की बेरुखी संजीव को संजना के करीब ला रहा था, एक दिन गुस्से में आ कर वंदना ने कहा की वो संजीव को कोर्ट में ले जाएगी, संजीव ने भी कहा , ले जाओ, लेकिन वो संजना को नहीं निकलेगा. ये सुन कर वंदना गुस्से में कार से कोर्ट की तरफ जाने लगी गुस्से की वजह से वो गाड़ी बहुत तेज चला रही थी जिसकी वजह से कार का एक्सीडेंट हो गया और वंदना वहीँ मर गयी, कुछ दिनों के बाद संजीव ने संजना से दोबारा शादी कर ली और दोनों ख़ुशी ख़ुशी एक साथ रहने लगे,आज संजीव को सच्चे और अच्छे प्यार का मतलब समझ में आया, जो भी हो संजीव समझ चूका था की मन की खूबसूरती ज्यादा अच्छी होती है तन की खूबसूरती से, आज संजीव को देर से ही सही सच्चे प्यार का एहसास हुआ. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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एक ऐसी भी कहानी इश्क़ की - Love Story - Love Stories

संजीव दिल्ली में ही रह कर अपनी पढ़ाई कर रहा था, उसे किसी से कोई मतलब नहीं था, उसने अपना एक अलग ही दुनिया बना कर रखा था, एक कमरे का फ्लैट था, जिसमे किचन और बाथरूम अटैच्ड था, एक छोटी सी बालकनी भी थी,लेकिन वो बालकनी में ना के बराबर जाता था, उसका रूम किताबो से भरा हुआ था ,यूँ कह लीजिये की संजीव पूरा किताबी कीड़ा था,उसे बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं था,जब देखो तब किताबो में घुसा हुआ रहता था, घर से इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट से घर,बस यही दुनिया थी उसकी. एक दिन शाम में अचानक लाइट चली गयी और अँधेरा हो गया, गर्मी भी बहुत थी, इसलिए वो बालकनी में निकल गया,तो देखा सामने के बालकनी में एक लड़की खड़ी है, लाल रंग की हाफ पेंट और ब्लू रंग की हाफ टी-शर्ट पहने वो खड़ी थी, दोनों की आपस में नजर मिली, फिर लड़की उधर देखने लगी और संजीव भी दूसरी तरफ देखने लगा, संजीव ने एक बार फिर तिरछी नजर से उस लड़की की तरफ से देखा, लड़की देखने में चिंकी लगी, दिल्ली में चिंकी उसे कहते हैं, जो लड़की नार्थ-ईस्ट इंडियन होते हैं, और नार्थ ईस्ट के लड़के को चिंका बोला जाता है. तो चिंकी को वो बार-बार देख रहा था,शायद वो चिंकी संजीव को पसंद आ गयी थी, चिंकी की भी नजारे संजीव से टकरा जाया करती थी, अब तो बार-बार नजरे मिलने लगी,नजरे मिलती और दोनों एक दूसरे से नजरे चुरा लेते और फिर तिरछी निगाहों से एक दूसरे को देखने लगते, तभी लाइट आ गयी और चिंकी वापस अपने कमरे में चली गयी, संजीव भी वापस अपने कमरे में चला आया, लेकिन उसका दिल अब पढ़ने में नहीं लग रहा था, उसकी निगाहें चिंकी को ढूंढने में लगी हुई थी, तभी एक बार फिर लाइट चली गयी और संजीव खुश हो गया और बालकनी में जा कर खड़ा हो गया, लड़की भी सामने खड़ी थी,दोनों एक दूसरे को देख रहे थे,फिर से लाइट आ गयी और दोनों अपने कमरे में वापस आ गए. एक समय था,जब लाइट जाती थी तो संजीव चिढ जाया करता था,और आज एक समय है जब लाइट जाने पर वो खुश हो जाया करता था, वो मना ही रहा था की एक बार फिर लाइट चली जाये और उसे चिंकी का दीदार हो जाये,लेकिन लाइट नहीं गयी,ना ही वो पढ़ पाया, अब तो हालात ये थे की संजीव को किताबो में भी चिंकी का ही चेहरा नजर आता था, संजीव ने किताब बंद कर दी और सोने की कोशिश करने लगा, सुबह वो उठ कर बालकनी में आया तो पाया,चिंकी मुँह धो रही थी, काफी सुन्दर लग रही थी वो, उसे देख कर संजीव को लगा की उसका दिन अच्छा गुजरेगा और हुआ भी वही,अब शाम को वो बालकनी में उसका इंतजार करने लगा लेकिन वो नहीं आयी, शायद लाइट थी इसलिए वो नजर नहीं आयी, उसने उस लड़की से बात करना चाही लेकिन कैसे बात करता उसकी समझ में नहीं आ रहा था, वो उसका नाम भी नहीं जानता था,और उससे उसको प्यार हो गया, अब संजीव का दिल पढ़ाई में नहीं लग रहा था, उसका दिल कह रहा था की कैसे भी उसका दीदार हो जाये वो उससे बात कर पाए लेकिन चार दिन बीत गए,और लड़की का दीदार नहीं हो पाया,तभी पांचवे दिन सुबह संजीव अपने घर से निकल कर बाहर जा ही रहा था की अचानक से वो लड़की नजर आयी वो भी घर से बाहर जा रही थी, संजीव उसका पीछा करने लगा, लड़की बस स्टॉप पर गयी,संजीव भी उसके पीछे बस स्टॉप पर चला गया,फिर लड़की ने बस स्टैंड,आई एस बी टी का बस पकड़ा, संजीव को लगा की वो कहीं शहर से बाहर तो नहीं जा रही है,इसलिए उसने सोचा की बस से उतर कर आखिरी बार ही सही उससे बात जरूर कर लूंगा, वो उसके पीछे बस पर चढ़ गया,लड़की बस स्टैंड पर उतर गयी और पैदल आगे बढ़ गयी, संजीव भी उसके पीछे ऐसा ही किया, लड़की सड़क पार करके मार्किट के अंदर चली गयी वो तिब्बती मार्किट था,संजीव आज तक सुना था इस मार्किट के बारे में कभी आया नहीं था, आज उस लड़की की वजह से उसने ये मार्किट देख लिया, कुछ देर के बाद लड़की एक दुकान के अंदर चली गयी, और कपडे सही करने लगी,संजीव को लगा या तो ये दुकान उसका है या वो इस दुकान में काम करती है, जब दिन चढ़ा तब तक संजीव बस स्टैंड पर भी इधर उधर घूमता रहा,फिर दिन चढ़ने के बाद वो उसी दुकान में चला गया और कपडे देखने लगा,लड़की उसे देखि और मुस्कुराने लगी, फिर दोनों के बिच बात भी हुई, संजीव बहुत खुश हुआ उससे बात करके, लड़की का नाम सेरेपा था, संजीव सोच में डूब गया की ये कैसा नाम है? लेकिन नाम तो नाम है,सेरेपा ने संजीव को बहुत सरे कपडे दिखाए और खरीदने को बोली,संजीव भी एक शर्ट खरीद कर चला गया, और शाम को वही शर्ट पहन कर बालकनी में खड़ा हो कर लड़की का इंतजार करने लगा, लड़की बालकनी में आई और शर्ट पहने संजीव को देख कर बोली अच्छे लग रहे हो,संजीव बहुत खुश हुआ,अब तो संजीव कुछ ही दिनों के बाद दुकान पहुंच जाता और शर्ट खरीद कर उसे पहन कर बालकनी में खड़ा हो जाता,और लड़की का इंतजार करता, लड़की भी देख कर खुश होती और संजीव को बोलती अच्छा लग रहे हो, इस तरह संजीव के पास बहुत सारे शर्ट हो गए,कल तक जिस रूम में सिर्फ किताबे होती थी आज उसकी जगह शर्ट ने ले ली थी, सिर्फ शर्ट और टी-शर्ट नजर आ रहे थे, एक दिन संजीव ने सेरेपा को “आई लव यू” बोल दिया,जिसे सुन कर सेरेपा चौंक गयी. उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या बोले? कुछ देर तक सोचने के बाद सेरेपा ने बोला की वो भी उसे पसंद करती है,लेकिन उसने कभी उसे प्यार की नजर से नहीं देखा,सिर्फ दोस्त समझा,अब तो संजीव का दिल टूट गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? प्यार के चक्कर में उसने ना जाने कितने शर्ट और टी-शर्ट खरीद लिए और सिर्फ दोस्त सुनने को मिला, अब तो उसका दिल रोने का कर रहा था, उसके लिए वो कितनी ही बार उसके दुकान के चक्कर काटे,जिसकी वजह से वो इंस्टिट्यूट नहीं जा पाया, साथ ही साथ वो कितना समय पढ़ाई के बदले बालकनी में खड़े हो कर बिता दिए,संजीव कहीं का नहीं रहा, अब तो उसका दिल कर रहा था की वो जोर-जोर से रोये, क्योंकि प्यार की चक्कर में वो बर्बाद हो चूका था,वो किसी से बिना कुछ बोले,वापस घर चला आया और कुछ दिन घर में बिता कर सेरेपा को भूलने की कोशिश करने लगा और वापस दिल्ली जाने के बाद उसने अपना घर बदल लिया और एक बार फिर अपनी पढ़ाई में जुट गया, ये कसम कहते हुए की अब किसी से प्यार नहीं करेगा……….. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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वाह रे गजब का इश्क़ - Love Story - Love Stories

सपना दिल्ली में अकेली रहती थी,पहले तो वो दिल्ली पढ़ने के लिए गयी थी,फिर पढ़ाई खत्म करने के बाद वो वहीँ जॉब की तलाश भी करने लगी, जॉब की तलाश करते-करते उसे एक दिन एक कंसल्टेंसी से जॉब के लिए कॉल आया,वो बहुत खुश हुई और जॉब की आशा में कंसल्टेंसी पहुंची,वहां उसकी मुलाकात रवि से हुई,रवि ने उससे बात की और जॉब दिलाने के नाम पर उससे 2500 रूपये ले लिए और उसे एक सप्ताह के बाद बुलाया,एक सप्ताह के बाद सपना ख़ुशी ख़ुशी ऑफिस पहुंची जॉब के लिए तो रवि ने उससे बड़े प्यार से बात किया और एक बार फिर 2500 रूपये ले कर उसे एक सप्ताह के बाद आने को बोल दिया,इस तरह सपना 5000 रवि को दे चुकी थी इस आशा में की उसे जॉब मिलेगा,अगली सप्ताह फिर पहुंचने के बाद रवि ने उससे प्यार से बात किया और अपने ही ऑफिस में काम दे दिया, सपना देखने में जितना सुन्दर थी,उतनी ही उसकी सुरीली आवाज थी, रवि ने उसे रिसेप्शन पर बिठा दिया और बोला की उसे आने वाले कैंडिडेट से बात करना है और कैंडिडेट को बुलाने के लिए उसे कॉल भी करना है,इसके लिए उसने उसे मोबाइल भी दे दिया. और उसकी सैलरी 8000 रूपये महीना तय किया और बाद में बढ़ा देने की भी बात कही. सपना ने सोचा की शुरू करने में क्या हर्ज है,और वो जॉब करने लगी. कुछ दिन तक तो सब कुछ अच्छा चलता रहा,फिर रवि सपना के करीब जाने की कोशिश करने लगा, पता नहीं लेकिन उसे सपना अच्छी लगने लगी और वो सपना के पास जाने की कोशिश करने लगा,रवि का अपने करीब आने सपना को भी अच्छा लगने लगा, इसलिए वो रवि को अपने करीब आने दे रही थी,कुछ दिनों के बाद फिर दोनों करीब हो गए. अब दोनों एक दूसरे के पास आ गए, इसी तरह 1 महीना बिता, 2 महीने बीते, तीसरा महीना सपना को याद आया की रवि ने उसे आज तक सैलरी नहीं दिया है, और वो रवि से मांग दी,इस पर रवि ने प्यार का वास्ता दे कर उसे चुप करवा दिया, उन्ही दौरान पंकज भी रवि से मिलने उसके ऑफिस आता था, यूँ तो पंकज रवि का दोस्त नहीं था,लेकिन हाँ जान पहचान जरूर थी इसलिए उसे जब भी समय मिलता वो रवि के ऑफिस आ जाता था, जब पंकज ने सपना को देखा तो उसे भी सपना से प्यार हो गया, लेकिन वो जनता था की रवि जरूर उससे प्यार करता होगा इसलिए उसने सपना के बारे में कभी कुछ नहीं बताया, खैर सपना को रवि एक यहाँ काम करते हुए 6 महीने बीत गए अब तो सपना का मन भारी होने लगा था, वो जब भी रवि से पैसे मांगती रवि कोई ना कोई बहाना मार देता,नहीं तो प्यार का वास्ता दे देता,और सपना मजबूर हो कर पैसा नहीं मांगती,लेकिन करीब 1 साल होने के आये तो सपना ने फिर पैसा माँगा और रवि ने बोला की वो पैसा नहीं दे पायेगा और ऑफिस भी बंद कर रहा है अब तो सपना कहीं की नहीं रही, अगले दिन से सपना ऑफिस जाना बंद कर दी कुछ दिनों तक तो वो चुप चाप बैठा रहा, फिर एक दिन उसे पंकज की याद आयी और उसने पंकज को कॉल करके जॉब दिलाने की बात कही, पंकज ने जब रवि के बार एमए पूछा तो सपना ने बताया की रवि ने ऑफिस बंद कर दिया है और वो जॉब की तलाश कर रही है, इस पर पंकज ने रवि के बारे में बताया रवि रोज ऑफिस खोलता है और उसने उसकी जगह नयी लड़की रख ली है, मतलब साफ़ था की रवि ने सपना का यूज़ किया और उसके बाद सपना को छोड़ दिया, वो रोने लगी लेकिन पंकज ने यूज़ संभाल लिया और इस तरह अब पंकज सपना के करीब हो गया और कुछ दिनों के बाद पंकज ने सपना को प्रोपोज़ कर दिया, सपना बहुत खुश हुई और वो पंकज के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना ली .सपना बहुत खुश थी की उसे पंकज जैसा लड़का मिला जो उसे बहुत प्यार करता था, लेकिन उसके दिमाग में रवि से बदला लेने का भी प्लान बन रहा था, सपना ने पंकज को रवि के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया,पंकज भी रवि को मारने का प्लान बनाता,ये प्लान सुन कर सपना बहुत खुश होती, लेकिन प्लान कभी सक्सेस नहीं होता,क्योंकि पंकज पहले ही रवि को सारा प्लान बता देता था,और ये बात सपना को नहीं मालूम होता, प्लान को सफल बनाने के लिए पंकज हमेशा सपना से पैसा लिया करता,और वो पैसा पंकज और रवि आपस में बाँट लेता, एक दिन सपना ने पंकज से पूछा, इतना पैसा खर्च होने के बाद भी रवि का कुछ नहीं हुआ,अब तो पंकज को लगा की सपना सच्चाई ना जान जाये, इसलिए दो दिनों के बाद ही वो सपना को ले कर हॉस्पिटल गया,जहाँ रवि के हाथ-पैर में पट्टी बंधा हुआ था,और पंकज ने बताया की उसके दोस्तों ने रवि की ये हालत की है, सपना बहुत खुश हुई लेकिन पंकज उदास था, इस पर सपना ने उसकी उदासी की वजह पूछी तो पंकज ने बताया की रवि ने पुलिस कम्प्लेन किया है और उसका दोस्त पुलिस की गिरफ्त में है और उसने उसका नाम लिया तो दोनों फस जायेंगे, इस पर सपना ने पूछा कैसे बचा जाये तो पंकज ने कहा की पुलिस वालो को पैसे देने होंगे,उसके बाद ही वो दोनों बच सकते हैं, फिर क्या था? सपना ने पंकज के बताये अनुसार पैसे दे दिए, सपना के जाने के बाद रवि उठ कर बैठ गया और दोनों दोस्त पार्टी भी किये और इस ख़ुशी में सपना ने पंकज को किश भी दिया और उसके साथ शारीरक संबंध भी बनाया,अब तो पंकज को जब पैसा चाहिए था,वो सपना से ले लेता,और सपना भी पंकज को पा कर खुश थी, एक दिन सपना ने पंकज को मिलने के लिए बुलाया,लेकिन पंकज ने बहाना बना दिया,संयोग से सपना जो पार्क घूमने गयी थी उसी पार्क में उसने पंकज को दूसरी लड़की के साथ देखा,अब तो सपना का दिल एक बार फिर टूट गया, उसे लगा की पंकज भी उसे धोखा दे रहा है, अगले दिन वो पंकज के घर पहुंच गयी और उसे शादी करने को बोला,पंकज मना कर दिया . ये बात पंकज का बड़ा भाई संजीव भी सुन रहा था, उसने पंकज को डाँट लगाई और कहा की शादी नहीं करना था तो इससे प्यार क्यों किया,इस पर पंकज ने बताया की वो इससे नहीं किसी और से प्यार करता है, ये सुन कर सपना के आँख भर आये और उसने पंकज के बड़े भाई को सारी बात बता दी,पंकज के बड़े भाई संजीव ने सपना को अपने रूम में ले गया और उसके आसूं पोछे और उसे प्यार से समझाया की वो टेंशन ना ले वो पंकज से बात करेगा. लेकिन धीरे-धीरे पंकज सपना की जिंदगी से चला गया और उसका स्थान पंकज के बड़े भाई संजीव ने ले लिया, हलाकि संजीव जॉब करता था और उसके पास समय नहीं था, फिर वो सपना से मिलने के लिए समय निकालता था और ये बात सपना को पसंद आ गयी, संजीव की बातें, उसका स्वभाव सपना को बहुत पसंद आया और सपना संजीव के करीब जाने लगी, अब तो सपना और संजीव रविवार को सारा दिन एक साथ बिताते थे, दोनों एक दूसरे के बहुत ही करीब आ गए.इतने करीब की सपना ने संजीव के साथ शारीरक सम्बन्ध भी बना लिया था, अब सपना ने सोचा क्यों ना संजीव से जरिये पंकज से बदला लू, इसलिए वो पंकज के सामने ही संजीव को चूमती थी, उससे प्यार करती थी, ये बात पंकज को मालूम था,क्योंकि रवि को मजा चखाने के लिए सपना ऐसा कर चुकी थी, आज वही दिन है अंतर सिर्फ इतना था की उस दिन रवि से बदला लेने के लिए उसी का दोस्त पंकज था और आज पंकज से बदला लेने के लिए पंकज का बड़ा भाई संजीव था. धीरे-धीरे सपना ने संजीव को अपने प्यार के मोहजाल में फसा लिया ,लेकिन क्या संजीव सपना के कहने पर अपने छोटे भाई को कुछ करेगा, सपना को यकीन था,लेकिन संजीव की सोच भी पंकज और रवि की तरह ही था.सपना से पैसा मिल ही रहा था और ऊपर से शारीरक सुख भी.वक्त के साथ साथ सपना को ये पता चल ही गया की, संजीव अपने छोटे भाई को कुछ नहीं करेगा, उसे संजीव पर गुस्सा आ रहा था, लेकिन वो क्या करती,कहीं ना कहीं वो संजीव से जुड़ा रहना चाहती थी,क्योंकि संजीव से वो प्यार करती थी,लेकिन संजीव , सपना से प्यार नहीं करता था,इसलिए तोजब भी वो शादी की बात संजीव से की तो संजीव टालने लगा,आखिर कार सपना को ये पता चल ही गया की संजीव उससे शादी नहीं करेगा,और उसे बहुत बुरा लगा लेकिन वो न ही अपने भाई को डांटा और न ही उससे शादी करेगा.इस तरह सपना का दिल पहले रवि तोडा फिर पंकज ने अब संजीव भी उसका दिल तोड़ रहा था.जब सपना ने संजीव पर दवाब बनाया की वो शादी कर ले ,तो संजीव शादी करने से मना कर दिया.अब तो सपना बिलकुल अकेली हो गयी थी, उसे यकीं हो गया था की सभी ने मिल कर उससे पैसा और इज्जत दोनों प्यार और शादी के नाम पर सिर्फ और सिर्फ लुटा. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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समझौता या प्यार - Love Story - Love Stories

प्रिया दिल्ली के कॉलेज में पढ़ती थी, वो कॉलेज पढ़ने जाती थी या घूमने,ये बात खुद प्रिया को नहीं मालूम था. क्योंकि क्लास से ज्यादा तो वो कॉलेज के कैंपस में इधर-उधर घूमने में बिताती थी.सिर्फ परीक्षा के समय पढ़ती थी,बाकि साल बस घूमना और मस्ती करना,उसका मानना था की जब तक अकेले हो,कॉलेज का समय है मस्ती कर लो,फिर तो शादी के बाद बंध ही जाना है, ना ही कोई मस्ती ना ही कोई आजादी,सिर्फ घर,पति फिर बच्चे. प्रिया देखने में भी बहुत सुन्दर थी, जो उसे देखता,देखता ही रह जाता, खुली विचारधारा की और बिलकुल स्वछन्द, आजादी पसंद लड़की, लड़को के साथ घूमना, और उसका ड्रेस भी लड़को ही जैसा था, या यूँ कह ले की प्रिया अपने आपको लड़की नहीं मानती थी,भले उसके दिलो-दिमाग ये था की कल जब उसकी शादी हो जाएगी तो उसका घूमना,स्वछंद रहना सब बंद हो जायेगा,लेकिन वो सोचती थी की कल की कल देखी जाएगी,आज क्यों बर्बाद करना,इसलिए वो आज में जीती थी.लड़के ही उसके दोस्त थे और लड़को के साथ ही वो घुमा करती थी. शायद इसलिए भी वो क्लास से जयादा कैंपस में नजर आती थी, वैसे तो उसके बहुत सारे दोस्त थे,लेकिन उन दोस्तों में उसे अनिल बहुत पसंद था,क्योंकि अनिल देखने में स्मार्ट था और काफी पैसे वाला था. उसके पापा व्यवसायी थे, वो हमेशा कार से कॉलेज आता था,और प्रिया को अक्सर घुमाने भी ले जाया करता था, वहीँ प्रिया के ही साथ पढ़ने वाला अजय भी प्रिया को बहुत चाहता था, एवरेज दिखने वाला अजय बाइक से कॉलेज आता था, क्योंकि उसके पापा अमीर नहीं थे, इसलिए वो अमीर नहीं था, भले दौलत से अजय अमीर नहीं था,लेकिन पढ़ाई में हमेशा अव्वल आता था, और उसे यकीं था की एक दिन वो अपने दम पर एक बड़ा और पैसे वाला आदमी बन जायेगा.अजय प्रिया को दिलो जान से प्यार करता था,ये बात प्रिया को भी मालूम थी, अजय हमेशा पढ़ाई में उसकी मदद करता था,यहाँ तक की अजय के दम पर ही वो परीक्षा भी पास करती थी, इसलिए प्रिया की जिंदगी में फ़िलहाल दो लड़के बहुत ही करीब थे,एक अनिल और दूसरा अजय. प्रिया को खुद समझ में नहीं आ रहा था की वो अजय से प्यार करे या फिर अनिल से.इसलिए वो दोनों से प्यार करती थी,जब मौका मिले अजय के साथ रहती या फिर अनिल के साथ. हलाकि अजय चाहता था की प्रिया उसकी बन कर रहे लेकिन वो जानता था की प्रिया अनिल को नहीं छोड़ सकती, क्योंकि प्रिया का खर्चा अनिल ही चला रहा था,और अजय के पास इतना पैसा नहीं था की वो प्रिया का खर्चा उठा सके, इसलिए उसे अपना मन मारना पड़ रहा था, वैसे अजय के जिंदगी में और कई लड़किया आना चाहती थी,लेकिन अजय को अपने प्यार पर पूरा विश्वास था की एक दिन प्रिया उससे प्यार करेगी, और इधर अनिल प्रिया के अलावे भी लड़कियों के साथ व्यस्त रहता था. एक दिन हिम्मत करके अजय ने प्रिया के सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया,ये सुन कर प्रिया कुछ देर खामोश रही फिर उसने बोला की, उसे सोचने का वक्त दे,तब तक वो उसकी दोस्त तो है ही और दोस्त बन कर रहेगी. अजय मान गया,ये बात जब अनिल को पता चली तो दूसरे ही दिन अनिल ने भी अपने प्यार का इजहार प्रिया से कर दिया, अब तो प्रिया की समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? क्योंकि जब तक दोनों दोस्त थे,प्रिया को कोई समस्या नहीं थी,लेकिन जब प्यार की बात आयी तो उसे दोनों में से एक को चुनना होगा, जो उसके लिए काफी समस्या कर रहा था, वो किसे चुने और किसे मना करे उसकी समझ में नहीं आ रहा था, क्योंकि दोनों ने अपने प्यार का इजहार किया था, एक तरफ अजय जिसके पास ना पैसा ना ही खूबसूरती और ना ही जीवन में कोई और लड़की. दूसरी तरफ अनिल जिसके पास पैसा, खूबसूरती भी और जीवन में लड़किया भी. प्रिया ने दोनों से सोचने का समय मांग लिया और सोचने लगी, वो किस्से प्यार करे और किसे मना कर दे? जिसे भी मना करती उसके साथ उसका रिश्ता खराब होता और वो कभी ऐस नहीं चाहती थी, शायद इसलिए वो दोनों के साथ रहती थी, एक दिन तो प्रिया के दोस्तों को ये देख कर ताजुब हुआ की अनिल ने कार से प्रिया को कॉलेज में ड्राप किया और कार में ही प्रिया ने अनिल को किश किया ,और दूसरी तरफ जब कार वापस चली गयी और अजय उसके करीब आया तो प्रिया उसे भी किश किया,मतलब साफ़ था की प्रिया दोनों को नहीं छोड़ना चाहती थी, वो दोनों के साथ रिश्ता निभा रही थी,लेकिन आखिर कब तक प्यार समझोता बन कर रहता, वो कहते हैं ना प्यार दिल से होता है ना की समझोता से , एक दिन अनिल ने प्रिया को अजय को किश करते देख लिया,अनिल बहुत गुस्सा हुआ और वो प्रिया को भला बुरा कहने लगा, जिसके बाद प्रिया ने अनिल को मानने के लिए सारी हद तोड़ दी, और अनिल को विश्वास दिलाया की वो अनिल के ही साथ है, परीक्षा के दौरान अनिल,अजय,प्रिया और कुछ साथी मिल कर पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय अजय ने कुछ हिसाब करने के लिए कैलकुलेटर माँगा, और अनिल ने अपना मोबाइल कैलकुलेट करने के लिए अजय को दे दिया, जिसमे अजय ने अनिल और प्रिया की नंगी तस्वीरें देख ली,अजय चुप चाप कैलकुलेटर से हिसाब करके अनिल को वापस मोबाइल दे दिया,लेकिन आज उसका भ्र्म टूट चूका था,उसे विश्वास नहीं हो रहा था की प्रिया इस हद तक जा सकती है, उसका मन कर रहा था की वो आत्महत्या कर ले तभी उसके दिल ने उसे रोक दिया और उसे एहसास दिलाया की पढ़-लिख कर उसे बड़ा आदमी बनाना है, इसलिए वो चुप चाप फिर पढ़ने लगा और धीरे-धीरे प्रिया से दूर जाने लगा, लेकिन प्रिया को एहसास ना हो इसलिए वो पढ़ाई का मुद्दा बना कर रखता था, पढ़ाई की आड़ ले कर वो प्रिया से दूर जाने लगा,ये बात प्रिया को पता भी नहीं चला की कब अजय उसकी जिंदगी से दूर जा चूका था.कॉलेज खत्म होते ही अजय प्रिया की जिंदगी से निकल चूका था और अनिल की जिंदगी में भी दूसरी लड़की आ चुकी थी.और प्रिया अकेली हो गयी थी,क्योंकि ना उसकी जिंदगी में अजय था ना ही अनिल, आज जब उसे सच्चे प्यार की कमी खल रही थी ,तो उसके पास कोई नहीं था, उसकी समझ में प्यार का मतलब तब समझ में आया जब उसके पास कोई नहीं था, लेकिन आज तक उसे पता नहीं चल पाया की अजय उसकी जिंदगी से इतनी दूर क्यों चला गया,क्योंकि अजय कभी भी प्रिया से ना मिला ना ही बात की ना ही अपने बारे में कुछ ऐसा बताया,जिससे वो उसे ढूंढ पाती, सही कहा है किसी ने ये इश्क़ नहीं आसान, ये आग का दरिया है और इसमें डूब कर जाना है.प्रिया ने प्यार को प्यार नहीं समझा, एक समझौता माना,इसलिए तो उसे प्यार नसीब नहीं हुआ… मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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जबरदस्ती का प्यार - Love Story - Love Stories

यूँ तो प्यार दिलो के मेल से होता है,जब दो लोगो का दिल मिलता है,तो दोनों में प्यार होता है, फिर भी कभी ऐसा भी होता है की एक इंसान दूसरे इंसान से बेइंतहा प्यार करता है,लेकिन दूसरा इंसान उससे प्यार नहीं करता तो उसे एकतरफा प्यार कहते हैं, लेकिन आपको जान कर ताजुब होगा की पंकज इन दोनों श्रेणी में नहीं आता है, वो तो अपना एक नया ही श्रेणी बना लिया जिसे जबरदस्ती का प्यार कहते हैं, क्योंकि पंकज लड़की से प्यार तो करता ही था,लड़की से भी प्यार करवाना चाहता था, बात दरसल यूँ थी की पढ़ाई खत्म होने के बाद पंकज ने पटना में एक प्राइवेट कम्पनी ज्वाइन की, ये एक सी ए फॉर्म था,क्योंकि पंकज ने एम कॉम किया था और वो अकाउंट लाइन में भी जाना चाहता था,उसने सी ए की तैयारी भी की लेकिन बार बार फ़ैल होने के बाद उसका दिल टूट गया,या यूँ कह लीजिये की उसने हिम्मत हार दी, इसलिए उसने एक सी ए फॉर्म ज्वाइन कर ली, जहां पहले से 3 -4 स्टाफ और काम करते थे, जॉब का पहला दिन और वो सभी से दोस्ती करना चाहा,लेकिन सभी उससे दोस्ती नहीं करना चाहते थे,पंकज के अलावे वहां 1 लड़का,जिसका नाम विनीत था और 2 लड़की जिसका नाम निधि और माही था , पहले से काम करते थे,पहले वो विनीत से दोस्ती करना चाहा लेकिन विनीत अपने काम में व्यस्त था, कुछ ऐसे ही हालात निधि और माही के भी थे. ऐसा नहीं था की पंकज के दोस्त नहीं थे, वो जब पढ़ता था तो उसके बहुत सरे दोस्त थे,लेकिन पढ़ाई पूरी हुई और सरे दोस्त बिछुड़ते चले गए, जो बचे थे वो भी पंकज से बात नहीं करना चाह रहे थे,क्योंकि पंकज ने हिम्मत हार दी थी. क्लास के दौरान ही पंकज की जिंदगी में उसके साथ ही पढ़ने वाली लड़की जिसका नाम पूजा था, वो आयी, पूजा उससे बहुत प्यार करती थी,लेकिन पंकज के दिलऔर दिमाग में तो सिर्फ सी ए बनाना था इसलिए उसने कभी पूजा की तरफ ध्यान नहीं दिया जबकि पूजा ने कई बार पंकज से अपने प्यार का इजहार किया था, लेकिन पंकज कभी उससे प्यार नहीं किया था, वो कहते हैं जब कोई चीज आसानी से मिलती है तो उसका महत्व नहीं होता है,कुछ ऐसा ही पंकज के साथ था, पढ़ाई के दौरान उसकी जिंदगी में कई लड़किया आयी लेकिन उसने कभी भी किसी लड़की को अपने करीब नहीं आने दिया,अब जब वो पढ़ाई छोड़ चूका था और लड़की की तलाश कर रहा था तो कोई लड़की उसके करीब नहीं आ रही थी, एक तो सी ए ना बन पाना,दूसरा कोई लड़की का करीब ना आना,पंकज परेशान और निराश हो गया था. इसलिए शायद उसने जब सी ए फॉर्म ज्वॉइन किया,उसी दिन निधि और माही से बात करने में लग गया,लेकिन दोनों अपने काम से मतलब रख रही थी, पंकज भी कहाँ हार मानने वाला था, दूसरे दिन भी उसने प्रयास किया की वो उन दोनों से बात कर सके,लेकिन वो दोनों पंकज से बात नहीं करना चाहती थी, ये बात विनीत को समझ में आ गयी थी इसलिए उसने पंकज को डायरेक्ट बोला की जब वो दोनों तुमसे बात नहीं करना चाहती तो क्यों उनके पीछे पड़े हुए हो? पंकज ने भी कह डाला, वो दोनों कैसे मुझसे बात नहीं करेंगी,जरूर करेंगी आज नहीं तो कल,कल नहीं तो परसो,एक ना एक दिन तो करेंगी,मैं प्रयास नहीं छोडूंगा, जिसे सुन कर विनीत को हसी आ गया और उसने “आल द बेस्ट” बोल,अपने काम में लग गया.दो-तीन दिन बीत गए लेकिन पंकज से किसी ने बात नहीं की,अब तो पंकज को गुस्सा आने लगा,उसकी समझ में नहीं आ रहा था की दोनों लड़कियां उससे दूर दूर क्यों रहती हैं, शायद पहला ही दिन उसने करीब जाने की कोशिश कर दी इसलिए. लेकिन एक दिन अचानक काम करते करते निधि को समस्या आ गयी, बस क्या था पंकज ने उसे बताना शुरू कर दिया, ये देख अब निधि या माही को कोई समस्या होती पंकज उसका हल कर देता, जिससे उन दोनों लड़कियों को समझ में आ गया गया की पंकज को एकाउंट्स की जानकारी है, एक दिन माही ऑफिस में अपने फोन से बात कर रही थी, बात खत्म होने के बाद पंकज ने माही से पूछा बड़ी देर तक बात हुई किसका फोन था? माही ने सीधे सीधे बोल दिया की उसके बॉय फ्रेंड का, पंकज समझ गया की माही से दूर ही रहने में भलाई है,इसलिए वो अब निधि पर ध्यान देने लगा, और निधि कभी फोन से बात बही नहीं करती थी, इसलिए पंकज को लगा की लड़की अच्छी है,इसका बॉय फ्रेंड नहीं है,इसलिए इसी से प्यार किया जाये, लेकिन निधि को भी तो प्यार करना चाहिए, वो निधि के आगे पीछे घूमते रहता था, निधि को किसी तरह की समस्या होती तो उसकी मदद किया करता था, एक दिन निधि ने खुद पंकज से बात करना शुरू किया, जिसे देख पंकज बहुत खुश हुआ,और विनीत की तरफ इशारा करके ये बताया की आखिर निधि ने उससे बात की ही, उस दिन निधि ने पंकज से पूछा की उसने क्या किया है? पंकज ने बता दिया की वो एम कॉम किया है,साथ ही सी ए की तैयारी की है, सी ए फॉर्म में काम भी किया है अब लॉ की पढ़ाई करना चाहता है, वो एकाउंट्स लाइन नहीं छोड़ सकता,ये सुन कर निधि खुश हुई और पंकज से मोबाइल नंबर मांगी, ये सुन कर तो पंकज को लगा की वो जैसे आसमान में उड़ रहा हो, उसने तुरंत अपना मोबाइल नंबर दे दिया साथ ही ये भी बता दिया की व्हाट्स एप्प इसी नंबर से चलाता है फिर पंकज ने निधि से उसका मोबाइल नंबर माँगा, पहले तो निधि ने बात को टालना चाहा लेकिन पंकज नहीं माना, निधि ने नंबर दिया और पंकज ने तुरंत नंबर सेव कर लिया, उसके बाद व्हाट्स एप्प खोला तो पाया की निधि का व्हाट्स एप्प शो हो रहा है वो बहुत खुश हुआ क्योंकि निधि ने व्हाट्स एप्प नंबर दिया था. अब जब भी निधि को जरुरत होती वो पंकज से मदद ले लेती बदले में पंकज घुमा- फिरा कर उससे प्यार करने को बोलता,लेकिन निधि बात को टाल जाती,एक दिन पंकज ने निधि से पूछ लिया की उसे आगे क्या करना है? निधि ने बताया की उसे एम बी ए करना है, वो मैनेजमेंट की तैयारी कर रही है, ये सुन कर पंकज ने उसे समझना शुरू कर दिया की अगर उसे एम बी ए करना है तो क्यों यहाँ समय बर्बाद कर रही है, इससे अच्छा है वो सी ए की तैयारी करे, निधि ने कहा की वो इस बात पर सोचेगी,और पंकज का बार बार धन्यवाद करने लगी,पंकज को लगा की अब निधि उसकी हो गयी है,वो बहुत खुश हो रहा था,जबकि विनीत को हसी आ रही थी, पंकज को लगा की विनीत है कर उसका मजाक उड़ा रहा है,लेकिन वो बहुत खुश था क्योंकि निधि उसके करीब जो आ गयी थी, अगले दिन निधि ऑफिस नहीं आयी, पंकज परेशान हो गया, बार बार फोन करने लगा लेकिन नंबर नहीं लग रहा था, उसने व्हाट्स एप्प पर मैसेज किया लेकिन उसका उत्तर नहीं मिला, वो बहुत परेशान हो गया, उसने बार बार कॉल किया और व्हाट्स एप्प पर मैसेज किये,वो बार बार निधि को बोल रहा था की वो ऑफिस आये,उसके बिना ऑफिस सुना सुना लगता है,उसने यहाँ तक लिख दिया की वो उससे बहुत प्यार करता है, उसके बिना नहीं रह सकता ,वो उसे देखने के लिए ही ऑफिस आता है,अब उसके बिना उसका मन नहीं लगता है, वो बार बार उसे एक बार सिर्फ एक बार उससे प्यार करने को बोल रहा था, ऐसा लग रहा था की वो निधि को जबरदस्ती प्यार करने को बोल रहा हो, ये सब पढ़ कर एक दिन निधि ने मैसेज से उत्तर दिया की वो जॉब छोड़ दी है उसे मैनेजमेंट ही करना है इसलिए उसे परेशान ना करे वो उससे बात नहीं करना चाहती है,अब तो पंकज को ऐसा लगा की उसके निचे जमीन नहीं है, विनीत ने बताया की उसने निधि को ये बोल कर रखवाया था की यहाँ काम करने से उसे मैनेजमेंट करने में आसानी होगी और तुमने उसे सही बात बता दी,इसलिए वो छोड़ कर चली गयी और मैं हस रहा था, तू पागल है, वो तेरे से प्यार नहीं करती,अब तो पंकज को लगा की उसने गलती की निधि को बता कर शायद वो कुछ दिन और ऑफिस आती तो प्यार से उसे समझा देता ,लेकिन अब तो वो ऑफिस आएगी नहीं और नंबर भी ऐसा था की कभी बात ही नहीं होती थी, किसी ने सही कहा प्यार दिलो के मिलने से होता है ना की जबदरस्ती करने से जैसा पंकज ने निधि के साथ किया इसलिए निधि उसे छोड़ कर चली गयी . मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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ये कौन है,जो करीब हो कर भी दूर है - Love Story - Love Stories

स्वेता एक छोटे से शहर में पली-बढ़ी थी,वहीँ के स्कूल में पढ़ी हुई स्वेता, पढ़ने में बहुत अच्छी थी.स्कूलिंग पूरी करने के बाद वो कॉलेज में एडमिशन ली और वहां भी वो पढ़ने में अच्छी होने की वजह से हमेशा फर्स्ट आती थी.स्कूल और कॉलेज के दौरान काफी लड़के उससे दोस्ती करना चाहते थे, लेकिन वो कभी किसी लड़के को अपने करीब नहीं आने दी, स्वेता देखने में बहुत सुन्दर और स्मार्ट थी,सभी उससे दोस्ती करना चाहते थे, लेकिन स्वेता थी की किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी और सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रहती थी, उसका मन था की वो अच्छे से पढ़ कर अच्छा जॉब पाए, इसलिए वो किसी लड़के की तरफ नहीं देखती थी, जाहिर सी बात थी उसका गोरा रंग बड़ी बड़ी आँखें और ऊँचा कद देख कर किसी का दिल उस पर आ जाता, लेकिन स्वेता का दिल किसी पर आये वैसा लड़का उसे नहीं मिला था, इस तरह स्वेता बिना किसी से बात किये कॉलेज भी पास कर गयी,कॉलेज अच्छे नंबर से पूरा होने के बाद के बाद उसने अपने पापा को बहार जाने देने के लिए कहा, उसका मन था की वो कोई जॉब करे और अपने पैरो पर खड़ा हो सके. लेकिन उसके पापा उसे बाहर नहीं जाने दे रहे थे, उनका खान था अगर जॉब करना ही है तो यहीं करो, दूर नहीं जाना है, मुसीबत ये थी की इस छोटे से शहर में कोई बड़ी कम्पनी थी नहीं, फिर वो कहाँ जॉब करती, लेकिन स्वेता को जॉब करना ही था,इसलिए उसने पहले एक स्कूल में पढ़ने का जॉब शुरू किया, कुछ महीने तक छोटे बच्चो को पढ़ने के बाद वो बोर होने लगी, और सैलरी भी बहुत काम मिलता था इसलिए वो जॉब छोड़ दी और दूसरा जॉब ढूंढने लगी, इसी दौरान उसे बड़े बच्चो को पढ़ाने का मौका एक दूसरे स्कूल में मिला और वो वहां चली गयी, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद वहां के बच्चे स्वेता को परेशान करने लगे,स्वेता का चेहरा बहुत ही मासूम था, उसे जो भी देखता उसे नहीं लगता था की वो इतनी बड़ी थी और उसने मास्टर डिग्री लिया था,सभी को यही लगता था की वो बहुत छोटी है, कुछ ऐसा ही एहसास इस स्कूल में हुआ, वहाँ एक बच्चे को लगा की स्वेता उससे 2 साल बड़ी है, इसलिए वो स्वेता को परपोज़ कर बैठा, स्वेता को आस्चर्य हुआ और उसने पहले तो बच्चे को समझाया की वो बहुत छोटा है और पहले पढ़ने पर ध्यान दो , फिर स्वेता को लगा की बच्चे को प्यार से समझाया जाय और उसने बताया की वो उससे बहुत बड़ी है, ये बात बच्चे को सुन कर अस्चर्य हुआ की क्या सच्ची में स्वेता इतनी बड़ी है,लेकिन वो क्या कर सकता था, अब तो स्वेता को वो भी स्कूल छोड़ना पड़ा, कुछ दिनों तक जॉब की तलाश में इधर उधर भटकने के बाद अचानक से उसे एक दिन नोकिया सेंटर में जॉब मिल गया, पहले तो वहां के मालिक को विश्वास नहीं हुआ की स्वेता यहाँ जॉब के लिए आयी है,लेकिन जब स्वेता की डिग्री देखि तो पाया की स्वेता यहाँ जॉब कर सकती है,वैसे उसके सेंटर में स्वेता इतनी सुन्दर लड़की कोई नहीं थी, ना ही कोई लड़का ना ही कोई लड़की स्वेता इतनी खूबसूरत थी इसलिए मालिक ने तुरनत उसे काम पर रख लिया . स्वेता बहुत खुश हुई,सभी उससे अच्छे से बात करते थे,और उसे वहां कॉर्पोरेट कल्चर भी मिल रहा था, इसलिए वो बहुत खुश थी, करीब एक साल काम करने के बाद स्वेता ने जब सैलरी बढ़ाने की मांग की तो मालिक ने मना कर दिया और स्वेता को गुस्सा आया और वो काम छोड़ दी, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद मालिक को एहसास हुआ की स्वेता के जाने के बाद उसका सेंटर सुना सुना हो गया है, इसलिए एक बार फिर स्वेता को बुलाया और इस बार स्वेता के कहे अनुसार सैलरी दी जाने लगी,लेकिन स्वेता के छोड़ जाने के बाद मालिक ने तुरंत में अपने भतीजे को काम पर रख लिया था, अब मालिक बहुत ही कम आता था,उसका भतीजा ही सारा कम देखता था,इस बार भतीजे को स्वेता से प्यार हो गया था लेकिन दूसरे स्टाफ ने ये बता दिया था की स्वेता जल्दी हाथ नहीं आने वाली है, अगर उसके करीब गए तो वो गुस्सा हो जाती है, इसलिए उससे दूर ही रहे, ये बात मालिक के भतीजे को पता थी इसलिए वो स्वेता को दूर से ही देखा करता था,स्वेता के बात करने का अंदाज, उसका मुस्कुराना,सभी उसे भ गया था,अब तो किसी दिन स्वेता नहीं आती थी तो वो बेचैन हो जाता था, हमेशा स्वेता के ही ख्यालो में खोया रहता था लेकिन कभी हिम्मत नहीं होती थी की वो स्वेता से बात कर सके, और स्वेता भी कम से कम मतलब रखती थी,शायद उसे ये एहसास हो गया था की मालिक का भेतजा उसे देखा करता है, इसलिए वो उससे दूर ही रहती थी, कुछ महीने बीतने के बाद एक दिन अचानक से स्वेता ने ऑफिस से छुट्टी माँगा और कहा की उसकी तबियत खराब है इसलिए उसे घर दिया जाए , भतीजे ने बहुत पूछा लेकिन स्वेता ने सिर्फ मन ठीक ना होने का वजह बताया, भतीजे ने उसे जाने दिया और कहा कल जरूर आये,लेकिन स्वेता दो दिनों तक नहीं आयी अब तो बहैठे की हालत खराब हो गयी, बिना उसे देखे उसका मन नहीं लगता था वो दो दिनों से उसे देख नहीं पाया था,इसलिए उसने स्वेता को कल कर दिया स्वेता ने बताया की वो कल से आएगी, भतीजे के दिल में जान आयी कल स्वेता के आने के बाद भतीजे ने मौका देख कर अपने प्यार का इजहार कर दिया लेकिन स्वेता नहीं मानी और वो एक बार फिर जॉब छोड़ दी, इस बार वो दूसरी कम्पनी में काम करने लगी, जब ये बात मालिक को पता चली तो एक बार फिर स्वेता को बुलाया गया और एक बार फिर स्वेता को अच्छी सैलरी दे कर रखा गया, स्वेता देखने में जितनी सुन्दर थी उतना ही वो अपना काम मन लगा किया करती थी जिससे कंपनी को फायदा भी होता था, इसलिए मालिक स्वेता को दूसरी जगह जाने नहीं देना चाहता था, लेकिन मालिक के भतीजे को गुस्सा था की वो स्वेता से इतना प्यार करता है लेकिन स्वेता उसकी और देखती भी नहीं है इसलिए वो गुस्से में आ कर स्वेता को परेशान करने लगा, उसे ज्यादा से ज्यादा काम देता था, और स्वेता मुस्कुराते हुए अपना काम करती रहती थी, धीरे-धीरे मालिक के भतीजे ने स्वेता को ज्यादा से ज्यादा परेशान करने लगा और साथ ही साथ ये बोलता था की अगर वो उसके प्यार को स्वीकार कर ले तो उसे काम करने की जरुरत भी नहीं पड़ेगी, स्वेता ने इस महीने बहुत काम किया था, भले भतीजे ने करवाया हो लेकिन काम तो स्वेता ने ही किया था और जब प्रुस्कार देने की बात आयी तो मालिक के भतीजे ने स्वेता को निचा दिखाने या यूँ कह ले की उससे बदला लेने के लिए प्रुस्कार अपने दोस्त को दे दिया, अब तो स्वेता को बहुत गुस्सा आया और एक बार फिर उसने काम पर आना छोड़ दिया,साथ ही साथ मालिक को भी कल करने से मना कर दिया, मालिक के भतीजे ने बहुत कोशिश की स्वेता उससे प्यार करने लगे स्वेता कभी उसके करीब नहीं आयी ना ही उसका प्यार स्वीकार किया,और इस तरह स्वेता के पापा ने उसकी शादी एक ऐसे लड़के से कर दी जो मुंबई में जॉब करता था और स्वेता का सपना बड़े शहर जाने का पूरा हो गया और वो छोटे से शहर से सीधे मुंबई जैसे बड़े शहर चली गयी वो भी अपने पति और अपने पहले प्यार के साथ क्योंकि स्वेता ने पहले ही सोच लिया था उसका पति ही उसका पहला प्यार होगा . मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani”कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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जब प्यार में हुआ लोचा - Hindi Love Story - Hindi Love Stories

संजीव एक कट्टर हिन्दू परिवार में पैदा लिया था,जहाँ उसे बचपन से हिन्दतुव के बारे बताया गया,और साथ ही मुसलमान को खुद से दूर रहने को बताया गया था, बचपन से ही उसे मुसलमान से नफरत हो गयी थी. जिसकी वजह थी उसके दादा और छोटे चाचा एक आतंकवादी हमले में मारे गए थे ,जिसकी वजह से संजीव को मुसलमानो से नफरत हो गयी थी, वो अब सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था, पढ़ाई पूरी करने के बाद वो दिल्ली चला गया जहाँ उसे एक अच्छे कम्पनी में जॉब मिल गया,वो बहुत खुश था,और उसकी जिंदगी भी अच्छी कट रही थी, सैलरी भी अच्छी मिल रही थी, वो बहुत मेंहनत कर रहा था.जिससे उसके बॉस बहुत खुश थे. एक दिन कंपनी में और स्टाफ की जरुरत महसूस हुई,इसलिए उसने विज्ञापन दे दिया, बहुत सारे कैंडिडेट आये , जिसमे से सेलेक्ट करने के जिम्मेदारी संजीव को दी गयी,संजीव ने कुछ कैंडिडेट का इंटरव्यू लिया, जिसमे उसे स्वेता पसंद आयी, उसने स्वेता को सेलेक्ट कर लिया और उसे अगले दिन काम पर बुला लिया, या यूँ कहे की उसे स्वेता के बात करने का स्टाइल,उसका लुक संजीव को पसंद आ गया था, कहीं ना कहीं उसे स्वेता से प्यार सा हो गया था, वो कल का बेसब्री से इंतजार करता रहा, लेकिन स्वेता नहीं आयी. उसे समझ में नहीं आ रहा था की स्वेता क्यों नहीं आयी,लेकिन वो क्या कर सकता था? उसे लगता था की स्वेता कल आएगी, लेकिन स्वेता कल भी नहीं आयी, कुछ दिनों तक वो स्वेता का इंतजार करता रहा,लेकिन स्वेता नहीं आयी, कुछ दिनों के बाद कम्पनी ने फिर से इंटरव्यू रखा,लेकिन संजीव को कोई पसंद नहीं आयी,अचानक एक दिन संजीव को कम्पनी में स्वेता नजर आयी जिसे देख कर वो चौंक गया और वो स्वेता के पास गया और बोला तुम इंटरव्यू में सेलेक्ट हो गयी फिर क्यों नहीं काम पर आयी, लड़की को बहुत आस्चर्य हुआ, उसने संजीव से पूछा क्या मैं इंटरव्यू देने के लिए आयी थी, संजीव ने कहा,हाँ तुम ही इंटरव्यू देने आयी थी, भूल गयी क्या? उसने स्वेता का रिज्यूमे दिखाया, लड़की ने रिज्यूमे देखा उसके बाद वो अचानक से बोली हाँ मैं आयी थी मुझे याद आ गया, लेकिन मम्मी का तबियत खराब होने की वजह से ज्वाइन नहीं कर पायी, क्या अब कर सकती हूँ,संजीव ने हाँ में उतार दिया, लड़की ने काम करना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे स्वेता और संजीव करीब आने लगे, वो दिन भी आ गया जब संजीव ने अपने प्यार का इजहार स्वेता से कर दिया और उससे शादी करने की बात कह डाली,साथ ही ये भी कह दिया की वो अपना पता दे वो उसके मम्मी-पापा से मिलेगा,ये सब सुन कर स्वेता थोड़ी देर के लिए चुप हो गयी,उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? वो अगले दिन उसे ले जाएगी ऐसा बोल कर वो चली गयी,संजीव भी मान गया लेकिन स्वेता फिर नहीं आयी, काफी दिन बीत गए लेकिन स्वेता नहीं आयी,एक बार फिर संजीव का दिल टूट गया,उसे समझ नहीं आ रहा था की आखिर स्वेता उसके साथ ऐसा क्यों कर रही है? काफी दिन गुजर जाने के बाद एक दिन अचानक संजीव को स्वेता बाजार में नजर आयी संजीव ने स्वेता को देखा तो वो बहुत खुश हुआ,लेकिन उसके साथ एक और लड़का था और पास जाने पर उसे पता चला की स्वेता ने शादी कर लिया है, अब तो उसे बहुत गुस्सा आया,वो स्वेता को बुरा भला कहने लगा, उसने कहा की प्यार मुझसे और शादी किसी और से ऐसा उसने क्यों किया? स्वेता सुन कर चौंक गयी उसने कहा की वो उसे जानती भी नहीं, उसने बोला वो उसके साथ कम्पनी में काम करती थी उसने उसके साथ प्यार भी किया था, वो सब भूल गयी,लेकिन स्वेता ने बताया की वो किसी कम्पनी में काम ही नहीं की, संजीव ने जब कंपनी का नाम बताया तो स्वेता ने कहा की वो उस कम्पनी में इंटरव्यू दी थी लेकिन उसकी शादी ठीक हो गयी इसलिए वो काम नहीं की, उसके पति ने भी कहा, ये बात तो सच है उसकी शादी हो गयी थी और स्वेता उसके साथ रहती थी फिर वो कम्पनी में कब काम की? ये सुन कर तो संजीव चकित हो गया की अगर वो स्वेता नहीं थी तो वो लड़की कौन थी, संजीव को कुछ समझ नहीं आ रहा था, तभी एक दिन मॉल में उसे फिर से स्वेता नजर आयी पहले तो उसे लगा की कहीं वो ही ना हो? ; लेकिन स्वेता ने जब नजरे चुराई तो वो उसके पास पहुंच गया और पास जाने के बाद पाया की वो शादी शुदा नहीं है, उसने जब पूछा तो लड़की ने बताया की वो स्वेता नहीं है वो जॉब की तलाश में आयी थी, लेकिन जब उसे पता चला की स्वेत जो बिलकुल मेरी तरह दिखती है और उसे जॉब मिल चूका है इसलिए उसने बिना कुछ बोले जॉब करने लगी, लेकिन जब तुम मेरे करीब आये तो वो दूर हो गयी क्योंकि तुम जिससे सबसे ज्यादा नफरत करते हो मैं वहीँ हूँ? संजीव नहीं समझ पाया, उसने कहा ऐसा क्या है, जिसकी वजह से मैं तुमसे नफरत करूँगा,इस पर लड़की ने बताया की उसका नाम स्वेता नहीं हिना है,और वो हिन्दू नहीं मुस्लिम है जिसे सुन कर संजीव के पैरो तले जमीन खिसक गयी, वो अब क्या बोलता? बात तो सही थी, एक तरफ उसका प्यार था जिसे वो जानो से ज्यादा चाहता था,दूसरी तरफ वो मुस्लिम थी जिससे वो सबसे ज्यादा नफरत करता था, वो कुछ देर यूँ ही खड़ा रहा, लेकिन उसका प्यार उसके नफरत को हरा दिया और उसने हिना को गले लगा कर बोला वो उससे ही शादी करेगा, ये सुन कर हिना को हैरानी हुई, लेकिन संजीव ने कहा की कल वो तैयार रहे अब वो उसी से शादी करेगा और संजीव ने ऐसा ही किया वो हिना से शादी कर लिया इस तरह नफरत पर प्यार की जीत हुई. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” प्रेरक कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
 

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रुहानी प्रेम - एक शानदार कहानी - Hindi Love Story - Hindi Love Stories

मंयक, तुम सुन रहे हो ना। आज फिर से शुचि ने मेरे जख्मों को अपनी जुबां के तीर से कुरेद दिया है। इन बीस सालों में गमों की तपिश से मैं कैसे झुलसती रही हूँ वह तुम भी जानते हो। क्या मैंने अकेले ही तुम से प्यार किया था? तुम्हारा प्यार क्या महज़ छलावा था? तुमने जो सुनहरे रंग मेरे जीवन में भरे थे, क्या वे सब मन बहलाने का साधन मात्र थे। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। ऐसा कहकर मैं, हमारे अद्भुत प्रेम को मलिन नहीं कर सकती। तुम्हारे भीतर उमड़ते इश्क़ के अथाह सागर की हमेशा साक्षी रही हूँ मैं। तुम्हें याद तो जरूर होगा जब यौवन की दहलीज़ पर तुम्हारे अव्यक्त प्रेम को तुम्हारी आंखो से सैलाब बनकर बहते देखा था। मेरी धड़कनों ने तुम्हारी रुह की जमीन पर कदम रख कर हसीं धुनों को सुन लिया था। याद तो होगा जब तुम अपनी भावनाओं को काबू नहीं कर पाए थे और प्रेम-इत्र से सुंगधित खत तुमने चुपके से मेरी किताब में रख दिया था। इस खत ने मेरे अनुशासित दिल में प्रेम धुन छेड़ दी थी जिसे तुम हर क्षण गुनगुनाते थे। मैंने तुमसे कभी नहीं जानना चाहा कि तुम समाज के किस वर्ग से संबंध रखते हो। हां इतना अवश्य जानती थी कि तुम भी मेरी तरह क्षत्रिय समुदाय से हो। मेरा तुम्हारा इतना ही परिचय था कि हम दोनों आवासीय विद्यालय की शान थे। सबके चहेते। सबके प्रिय। सभी की आंख के तारे। 1970 के दशक में प्रेम करना ऐसे था जैसे आग के दरिया को पार करना। इसलिए हम दोनों केवल आंखों की भाषा में ही संवाद करते थे और तुम्हारा प्यार हमेशा प्रतीकों में व्यक्त होता रहा था। आवासीय परिसर में हमारे इश्क़ की खुशबूएं खामोशी की चादर ओढ़े फैलती रही थीं। तुम्हें याद तो होगा जब स्कूल में होली के रंगों से पूरा परिसर रंगा था। सभी तरफ उल्लास ही उल्लास। याद है तुम्हारे हाथ में लाल गुलाल था जो तुमने रंग लगाने के बहाने से मेरी मांग में भर दिया था और मेरा रोम रोम सिहर उठा था। लेकिन ये बात तो तुम्हारे हमारे तक ही सीमित थी। पता है उस रात बिस्तर पर लेटे हुए कितने हसीं ख्वाब मेरे मानस पटल पर तैर गए थे और उस दिन से मैंने जीवनसाथी के रूप में तुम्हें मन ही मन में वर लिया था। मंयक, तुम सुन रहे हो ना। बारहवीं की परीक्षा के बाद कैसे हम दोनों कक्षा के बाहर बरामदे में बैठ जाया करते थे और मृदुला मैम हमें इकट्ठा देखकर मुस्कुरा कर आशिर्वाद देती प्रतीत होती थी। हम दोनों यूं ही घंटों बैठे रहते थे। मैं खामोशी से कहती थी और तुम चुपके से सुनते थे। इस खामोशी में हमारे दिलों में उमड़ता सागर एक दूसरे की प्रेम में आकंठ लहरों से आलिंगनबद्व होकर इश्क़ की पराकाष्ठा तक हिलौरे लेता था। तुम्हें याद है ना मयंक, जब तुम अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाये थे तो लड़कियों के छात्रावास तक तुम्हारे कदम तुम्हें खींच लाए थे और होस्टल वार्डन से इज्जात लेकर तुमने मुझे छात्रावास के मेहमान कक्ष में बुलाया था। उस वक्त मैं ख्यालों के इत्र से भीगी हुई बैठी थी तुम्हारे सामने, नज़रें झुकाए और तुमने एक चुम्बन मेरी होठों पर रख दिया था। ये चुंबन तुम्हारा पहला स्पर्श था जो मुझे दिल की गहराई तक झंकृत कर गया था। फिर हम दोनों बस एक दूसरे की आंखों की भाषा पढ़ते रहे थे क्योंकि प्रेम की गहराई को व्यक्त करने के लिए सही शब्दकोश था ही नहीं हमारे पास। धीरे धीरे हमारे प्रेम की सुगबुगाहट छात्र छात्राओं में हो रही थी। याद है तुम्हें जब मैं छात्राओं की उपस्थिति रिपोर्ट दर्ज़ करने तुम्हारे पास विद्यालय की सभा में आती थी, तब कुछ शरारती छात्र मुझे देखते ही, मयंक, मयंक कहकर पुकारते थे"। मुझे तब बहुत गुस्सा आता था और फिर अगले दिन से मैंने उप कप्तान दीपिका को भेजा था रिपोर्ट देने। शायद मैंने पहले कभी नहीं बताया तुम्हें। पता है जब भी मैं दोपहर की प्रेप के लिए लड़कों के छात्रावास के सामने से गुजरती थी ना, तब कुछ शरारती छात्र फिर से " मयंक, मयंक" की आवाज़ लगाते थे और मेरे मुख की मुद्रा और गंभीर हो जाती थी। तुम्हें याद तो होगा, जब हम कक्षा के बाद सबसे आखिर में उठते थे और मैस तक साथ साथ जाते थे बगैर कोई बात किए। हमें बातें करनी ही नहीं होती थी। बस चार कदम का साथ ही प्रेम को पुष्पित पल्लवित करने के लिए काफी था। फिर तुम इशारा कर देते थे कि मुझे मुख्य कक्ष से जाना है और तुम मैस की किचन से होकर जाते थे ताकी सब की निगाहों से बच सकें क्योंकि तुम समझते थे मुझे लाइमलाइट में आना पंसद नहीं था। मयंक, तुम मुझे कितना समझते थे ना। तुम्हें याद है बारहवीं कक्षा की परीक्षा के बाद छात्रावास छोड़ने में अभी एक महीना था और हर पल को साथ जीने को हम बेकरार थे लेकिन मर्यादा में तो हम रहे थे। सभी छात्र छात्राओं का अब एक दूसरे से विदा लेने का समय आ गया था और हम सभी एक दूसरे के ऑटोग्राफ ले रहे थे। मेरी ऑटोग्राफ बुक में कितनी शालीनता से तुमने अच्छे जीवन की कामना की थी। तुमने वह बुक भी मेरे मेज़ की दराज़ में रख दी थी। पता है उसे खोलते हुए मेरे दिल में खुशबुओं की घटाएं उमड़ घुमड़ रही थीं। तुमने कभी भी मुझे किसी भी निर्णय के लिए मजबूर नहीं किया था। तुम्हारी इसी खूबी ने मेरे दिल में तुम्हारे लिए एक विशेष स्थान बना लिया था। कितनी नसीहतें दी थी तुमने। कभी प्रेम पर हक नहीं जताया था। बस पूर्ण निश्छल प्रेम। पूर्ण समर्पण। कोई बंधन नहीं। एक दिन फिर तुम्हारी यादों को समेटे मैं लौट गई थी अपने घर नयी राह पर।अपनी मंजिल को प्राप्त करने। तुम भी तो लौट गए थे अपने सपने पूरे करने। तुम्हें याद तो होगा दूर जाने के बाद पहला खत मैंने ही लिखा था तुम्हें। तुम्हारा जवाबी खत पाकर मेरे रोम रोम में इश्क का सागर हिलोरे ले रहा था। शाम को फिर मेरे पिताजी ने मुझे बैठाकर समझाया था। जमाना ही ऐसा था जब मोहब्बत भरे दिलों के बीच एक लक्ष्मण रेखा खींच दी जाती थी जिसे पार करना, धड़कते दिलों के लिए मुश्किल ही नहीं असम्भव होता था। हर पिता को एक डर होता था कहीं बेटी के कदम ना लड़खड़ाएं। हमने एक पिता का सम्मान करते हुए अपने प्रेम को उनके चरणों में अर्पित कर दिया था। तुम्हें याद है ना वह खत जब मैंने तुम से हमारे प्रेम का वास्ता देकर कहा था कि तुम अब मुझे कभी खत नहीं लिखोगे। प्रेम की परीक्षा में तुम सफल हुए थे और मुझे हिदायत दी थी कि मुझे अपने पिता की आज्ञा शिरोधार्य करनी है। तुमने भी तो हमारे प्रेम की कसम दी थी मुझे। पता है उस दिन मेरा दिल के आंसू सावन की बदली बन बरस रहे थे। फर्ज़ और प्रेम के बीच पैंडुलम की तरह झूल रही थी मैं और फर्ज़ आखिर जीत ही गया था। मेरे पास कितने जूनियर, सीनियर, संगी साथी सब के खत आते थे लेकिन तुम्हें खोने के बाद, किसी के भी पत्र का जवाब नहीं दिया था। मेरी दुनिया में तुम नहीं थे तो और कोई भी नहीं रह सकता था। मैंनें अपने दायरे को समेट लिया था। लेकिन तुम्हारी याद मेरे दिल में उसी तरहं रच बस गई थी जैसे दुल्हन के हाथों में मेंहदी। मेरा मानना है कि, कुछ फसाने अधूरे होते हुए भी ताउम्र साथ रहते हैं और हमारा प्रेम भी कुछ इसी तरह हमारी अलग अलग जिंदगी में भी साथ कदम मिलाकर इश्क के सागर की थाती नापता रहा था।दो साल बाद मेरी शादी तय हो गई थी। मेरे जीवनसाथी बहुत खुशमिजाज़ व्यक्ति थे। मेरा गांम्भरीय उनकी समझ से परे था। मैंनें अपने दिल की गिरह को कभी खोला ही नहीं उनके सामने। सतर के दशक में यह जोखिम नहीं उठा सकती थी। धीरे धीरे मैं परिवार के प्रति समर्पित होती चली गई लेकिन तुम्हें भूल ही नहीं पाई कभी। मेरे पति ने भी कभी भूलने ही नहीं दिया। पता है वो मुझे मयंती कहकर बुलाते थे। इस तरह अनजाने में ही सही उन्होंने तुम्हारी याद को हर क्षण जिंदा ही नहीं रखा बल्कि सिंचित भी किया। पता है ये सब मेरे लिए कितना कठिन था लेकिन तुम तो जानते ही हो भावनाओं पर मैंने हमेशा काबू ही रखा है चाहे अंदर प्रेम सागर की लहरें तट से मिलने को कितनी ही आतुर क्यों ना हों। जीवनसाथी के साथ धीरे धीरे मेरी अच्छी समझ बन गई थी। झगड़े भी खूब हुए लेकिन डोर मजबूत होती चली गई और शादी के सोलह साल बाद हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। सब कुछ था लेकिन पता नहीं हमेशा एक कशिश बनी रहती थी तुमसे मिलने की। जब भी मुझे एंकात मिलता मैं खामोशी से तुमसे बातें करती रहती। तुम्हें याद है ना मेरी छोटी बहन, शुभा, जो हमारे से जूनियर थी। भी तुम उससे मिलते थे मेरे बारे में पूछते थे। तुम्हें याद तो होगा, जब मैं एम। फिल। कर रही थी तुम्हें कविता ने बताया था कि मैं यूनिवर्सिटी के छात्रावास में रह रही हूं। पता है मुझे तुम्हारा वह खाली खत मिला था जो तुमने कविता को दिया था। संबोधन के बाद, पूरा पत्र खाली था। नहीं, खाली नहीं था। तुम्हारी आत्मा उसमें रची बसी थी। तुम आर्मी में लेफ्टिनेंट भर्ती हो गए थे और तुमने अपना पता लिखा था। जानते हो मेरे लिए कितनी कठिन परीक्षा की घड़ी थी वह, जहां तराजू के एक पलड़े में पति के लिए समर्पण था तो दूसरी तरफ तुम्हारे प्रेम की महक। उस वक्त मेरी शादी को तीन साल भी नहीं हुए थे। मुझे समझ थी कि यदि मेरे कदम अब इस दोराहे पर लड़खड़ाए तो इसका परिणाम खतरनाक हो सकता है। मेरे पति का स्वभाव भी कठोर था उनको अभी ठीक से समझा भी नहीं था। मुझे मालूम है तुम्हें बहुत बुरा लगा होगा लेकिन जवाबी खत लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी। हम फिर एक दूसरे के लिए खो गए थे। शादी के बीस साल बाद शुभा से तुम्हारा पता मिला था। मैंने अपने पति से परमिशन लेकर तुम्हें खत लिखा था क्योंकि वे इश्क की गहराई को समझते थे। उन्होंने मुझसे वायदा किया था कि तुम से जरुर मिलवायेगें। क्योंकि तब तक हम हमसफर ही नहीं बल्कि अच्छे दोस्त बन गए थे। पत्र का जवाब मुझे जल्द ही मिल गया था। तुम्हें याद है तुम्हारी पहली पंक्ति क्या थी? मुझे आज इतने साल बाद भी एक एक पंक्ति याद है। तुमने लिखा था, " It was pain and pleasure at the same time..."। तुमने भी अपनी पत्नी को पत्र दिया था पढ़ने के लिए और धीरे धीरे हमारे इश्क़ की कहानी पारिवारिक दोस्ती के रंग में रंगने लगी थी। तुम तो समझते ही हो कि, प्रेम और दोस्ती में महीन सी रेखा होती है। अपने परिवारों से बंधे हम दोस्ती और प्रेम के बीच उलझ कर रह गए थे। कभी प्रेम हावी हो जाता तो कभी अपनी सीमा जानकर हम फिर दोस्ती तक सिमट जाते। लेकिन हम दोनों ही जानते थे प्रेम की ज्वाला दोनों ओर धधक रही है। तुम्हें याद है ना जब सप्ताह में एक बार तो तुम अवश्य दूरभाष से संपर्क करते थे और मुझ पर वह सारा प्रेम न्यौछावर कर देते थे जो सीने में कहीं वक्त की तिजोरी में महफूज़ रखा था। मुझे याद है एक बार फोन पर कैसे तुम्हारी भावनाओं ने तुम्हारे दिमाग की नहीं सुनी थी। तुम्हारे सब्र का बांध टूटा था और तुमने अपने दिल की गिरह को खोलकर रख दिया था और तुम्हारी आंखो से सावन की झड़ी लग गई थी। उस वक्त दोनों तरफ से हृदय में दफन घुटन आंसुओं के साथ बह गई थी। हम दोनों ये समझ रखते थे कि कुछ राहें मंजिल तक नहीं पहुंचती पर कदमों के निसां समेटे रहती हैं। तब हम फिर हकीकत की दुनिया में लौट आते थे। मयंक, तुम्हें याद है ना जब तुमने मुझे अपनी पोस्टिंग के स्थान पर आमंत्रित किया था और मैं सपरिवार तुमसे मिलने दो दिन का सफ़र तय कर के आयी थी। तुम हमें लिवाने गाड़ी लेकर पहुंचे थे। मेरे पति ने तुम्हें अपने आंलिगन में ले लिया था। तुम उनके व्यक्तित्व और उनकी विशालहृदयता के मुरीद़ हो गए थे। हम दोनों तो फिर खामोश थे। इतने भाव उमड़ घुमड़ रहे थे कि शब्द मिल ही नहीं रहे थे व्यक्त करने के लिए। प्रेम के पुष्प की पंखुड़ियां खिलने को आतुर थी। जब प्रेम शब्द धारण कर लेता है ना तो उसकी सुवास मंद होने लगती है और हम अपने प्रेम की सुंगध बरकरार रखना चाहते थे। बच्चों को प्यार करने के बाद तुम मेरी तरफ़ बढ़े थे। हैंडशेक करते हुए अंतर्मन की अनगिनत खुशियां घटाएं बनकर हाथों के स्पर्श मात्र से एक दूसरे के दिल की धड़कनों तक जा पहुंची थी। समय पंख लगा कर उड़ने लगा और हम दोनों पारिवारिक दोस्ती को मजबूत करने की दिशा में बढ़ चले। दो साल तो सब कुछ सही दिशा में आगे बढ़ रहा था लेकिन कहते हैं ना कि जब मनुष्य अत्यधिक खुश होता है तो दुख अपने अस्त्र शस्त्र के साथ पीछा करने लगता है। हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही तो हुआ था। आज से तेइस साल पहले जब मेरी एक अंतरंग सहेली के कटाक्ष ने मुझे अवसाद की गहरी खाई में धेकल दिया था। तुम्हें तो सब पता है क्या क्या घटित हुआ था। अवसादग्रस्त अवस्था में एक पत्र तुम्हें लिख गई थी जिसमें जिंदगी की उठा पटक लिख दी थी। तुम पढ़कर इतना परेशान हो गए थे कि वह पत्र तुमने अपनी पत्नी को दिखा दिया, जबकि पत्र में मैंने स्पष्ट रूप से मना किया था कि ये पत्र तुम पढ़कर फाड़ देना। उसमें मेरे जीवन के वो दुख के कंकर थे जिसे मैं तुम्हारे अलावा किसी से साझां नहीं करना चाहती थी। लेकिन तुमने मेरी बात को पहली बार नहीं माना था। तुम्हें अपनी पत्नी पर कुछ ज्यादा ही भरोसा था। तुम्हें तो याद होगा कि एक पंक्ति में मैंने लिख दिया था हमारे बचपन के इश्क़ को लेकर। तुम्हारी पत्नी ने इस एक पंक्ति को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया था। तुमने मुझे ये सब फोन पर बताया था। हमारे रास्ते फिर अलग हो गए। अवसादग्रस्त अवस्था में यह मेरे लिए दूसरा झटका था जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया। तुम मुझ से एक बार मिलने जरूर आए लेकिन तुम अंदर से भयभीत थे। तुम्हें अपनी दुनिया को संजोकर रखना था। कहीं कोई मजबूरी थी। कुछ सालों की मुलाक़ातों में मेरे पति भी तुमसे बहुत अधिक लगाव रखने लग गए थे। तुम्हें उन्होंने अपना छोटा भाई माना था। तुम्हें तो याद होगा उन्होंने कहा था कि, " एक घंटा मयंती के साथ बिता लो। शायद इसके टूटे दिल पर मरहम लग जाए"। लेकिन तुम संकोच कर रहे थे या तुम बहुत खौफज़दा थे। तुम तो चले गए लेकिन मेरी बीमारी बढ़ती चली गई। जिस समय मुझे तुम्हारे संबल की सबसे ज्यादा जरुरत थी तुम मेरे साथ नहीं थे। एक आलिंगन, एक प्रेमपूर्ण आगोश की उस वक्त की दरकार थी। मेरे पति जानते थे मेरे मर्ज़ का क्या इलाज है लेकिन तुम दुनिया से खौफज़दा या पत्नी की धमकी से परेशान थे। आगे की कहानी तो तुम्हें सब याद होनी ही चाहिए क्योंकि कविता से तुम्हें पता चलता रहता था। तेइस साल से अपनी गृहस्थी का भार अकेले अपने कंधों पर ढ़ोती हुई मैं नयी राह चल पड़ी थी जहां फर्ज़ के सिवाय कुछ नहीं था। शुचि से तुम्हारी मुलाकात दो साल पहले ही तो हुई है जब वह विदेश से लौटी है। पता है तुम तो उसे याद ही नहीं थे, मेरे से बातचीत करते हुए उसने कहा था, " कौन मयंक,?"। लेकिन चालीस साल विदेश में रह रही थी और अब फेसबुक से सबको खोज़कर, सबसे संपर्क कर रही है। कल जब वटसप समूह पर तुम्हारे लिए मुझ से झगड़ रही थी तो दिल बहुत आहत हो रहा था। इसलिए मैं समहू से बाहर हो गई। तुमने एक बार भी उसे रोकने की कोशिश नहीं की। तुम्हारी पत्नी से भी काफी हिल मिल गई है। ये सब तो मैं भी वटसप समूह पर फोटोज देखकर समझ जाती हूं। कभी कभी सोचती हूं अब तुम्हारी बीबी को लड़कियों से दोस्ती पर कोई परेशानी नहीं होती? कक्षा की सारी लड़कियां ही तो दोस्त हैं तुम्हारी। तुम्हें याद है एक सवाल के जवाब में तुमने एक बार मुझे आश्वस्त करते हुए कहा था कि, " इश्क़ एक बार ही होता है। बार बार नहीं"। हमारे इश्क़ के फ़साने पर मुहर फिर लग गई थी। खैर , कल वटसप समूह में जो भी हुआ उसको मैंने चुनौती के रुप में स्वीकारा है। एक बात का श्रेय तो अभी भी तुम्हें दूंगी की तुम्हारे से इश्क़ करने और बार बार हमारी राह अलग होने से मेरे अंदर के लेखक ने जन्म लिया है। इसलिए जब भी शब्दों की कलमकारी से कहानी की माला पिरोती हूं तो अनायास तुम्हारी याद आ जाती है। पत्र यहां समाप्त करती हूं, शायद तुम्हें वे बातें भी याद हो आई होंगी जिनका जिक्र मैंने यहां नहीं किया। शुचि से बात हो तो सच बताने का साहस जुटा लेना। तुम ऐसा नहीं करोगे तो दुनिया का प्रेम से विश्वास उठ जाएगा और प्रेमी युगलों के अफ़सानों पर गीत लिखने बंद हो जाएंगे। तुम्हारीमानसीइसी नाम से ही तो तुम प्यार से बुलाते थे। याद है ना।
 

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