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नाम याद नहीं मुझे - love story - love stories

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क्या नाम दूँ - एक प्यारी कहानी - Story - Stories

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कुदरत का फैसला - रोमांचक कहानी - Story - Stories

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इश्क समंदर - एक प्यारी कहानी - love stories - love story

19 में पहुंचते ही उर्वशी को चॉकलेट आइसक्रीम, बेक समोसे के साथ, गुलाब के पीले, सफेद और लाल फूल पसंद आने लगे थे । उसे बढ़िया कपड़े पहने वह सजने सवरने का शौक भी लग गया था । वह घंटों आईने के सामने बैठी खुद को निहारती रहने लगी थी। उसकी चाल ढाल, रहन सहन व व्यवहार में एकदम से फर्क आ गया था। क्यों? क्योंकि, इश्क की उम्र ही 19 में शुरू होती है । हालांकि लोग कहते हैं यह 19 से थोड़ा पहले गुदगुदाने लगती है । उर्वशी इश्क समंदर के किनारे खड़ी थी, जहां रह रहकर इश्क की लहरें उससे टकरा रही थी। या कहना चाहिए कि बुला रही थी। उसका सजना सवरना, गुलाब के फूलों को चूमना और प्रेम पत्रों को छाती से चिपका कर झूमना इश्क समंदर में उतरने की तैयारी भर थी या शायद वह एक कदम बढ़ा चुकी थी, कह नहीं सकते । पृथ्वी को सूरज का एक चक्कर लगाने में कितने दिन लगते हैं? जवाब है 365 । ठीक इतने ही चक्कर एक खत उर्वशी तक पहुंचाने के लिए उसके प्रेमी पृथ्वी को एक हफ्ते में काटने पड़ते थे । क्योंकि इश्क समंदर में डूबकी लगा चुके लोगों की नजरें निरंतर उन्हें देख रही थी और उनकी प्रत्येक गतिविधि पर उनकी नजरें थी। इश्क समंदर के लोगों में उर्वशी की मां भी थी, जिसने जल्द भाप लिया था कि उर्वशी की जूतियां छोटी हो गई हैं। इसलिए 1 दिन पास बैठा कर उसने उर्वशी को कहा- "बेटी में देख रही हूं कि तू बड़ी हो रही है। शारीरिक और मानसिक परिवर्तन से गुजर रही है । संभाल कर रहना। यह उम्र ऐसी होती है कि अक्सर लड़कियां फिसल जाती हैं ।" मां आगे कुछ कहती इससे पहले ही उर्वशी तपाक से पूछ बैठी है- "क्या आप फिसली थी माँ"। उर्वशी के मुख से अनायास निकले इस प्रश्न ने मां की आंखों को ठहरा दिया ।उर्वशी ने देखा कि उन आंखों में अचानक समंदर की लहरें उफान मारती हुई आ गई हैं । जैसे कोई पुरानी डूबी स्मृति बाहर आना चाहती हो। मां ने एक क्षण सोचा कि उर्वशी को झापड़ मार कर मर्यादा में रहने का पाठ पढ़ा दे । लेकिन अगले ही क्षण वह रुक गई और उसने उर्वशी को कहा- "नहीं , मैं नहीं थी । पर वह फिसला था"। और फिर मां ने उर्वशी को वह कहानी सुनाई जब वह खुद उर्वशी थी और उसके लिए चक्कर लगाने वाला पृथ्वी था। " वह ठीक सामने वाले घर में रहता था।" मां ने बताना शुरू किया । "हमेशा मुस्कुराता हुआ, हरदम मुझे देखता हुआ। ऐसा लगता था जैसे उसकी दुनिया में सिर्फ मैं ही हूं। मैं उसे पसंद करने लगी थी । एक दिन उसने छोटे बच्चे के हाथ किताब भिजवाई। किताब में एक गुलाब और खत था।मेरे दिल की धड़कन इतनी बढ़ गई थी कि मैं उसे सुन सकती थी। फूल हाथ में लेकर काँपते हाथों से मैंने खत खोला। " उसमें क्या लिखा था?" उर्वशी ने पूछा । "मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुमसे शादी करने का इरादा है। अगर तुम मुझे पसंद करती हो तो इस गुलाब को चूम लेना। मैं तुम्हें देख रहा हूं ।हमेशा तुम्हारे सामने रहने वाला, पृथ्वी।" " मैंने देखा वह छत पर खड़ा मुझे देख रहा था।" मां कहते हुए रुक गई । "तो क्या आपने गुलाब को चुना था ?"उर्वशी ने मां के कंधों को कसकर पकड़ते हुए पूछा। "मैं कैसे चूम सकती थी। उसके बारे में सोचने से पहले मुझे मां पिताजी का ख्याल आया। उनकी इज्जत उनका मान-सम्मान। मैं कैसे मर्यादा की सीमा लांग सकती थी ।मेरे लिए सबसे पहले वे थे जिन्होंने मुझे जन्मा था, पाला पोसा था जान से ज्यादा चाहा था।" " फिर आपने क्या किया ?" उर्वशी ने पूछा। " मैंने गुलाब और खत वापस किताब में रख दिए।" ठंडी सांस लेते हुए मां ने कहा। "नहीं माँ आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था।" उर्वशी ने विरोध जताते हुए कहा। "हां बेटी अगर मैं तेरी जगह होती तो शायद ऐसा ही करती। पर तू खुद को मेरी जगह रख कर देख। क्या तू गुलाब चूम लेती ? मां उर्वशी की आंखों में देखते हुए पूछा । जैसे वह जानना चाहती हो कि क्या वह उर्वशी को सही संस्कार दे पाई है । कुछ सोचते हुए उर्वशी ने कहा- " नहीं मैं गुलाब नहीं चूमती लेकिन तुम्हें जरूर बताती कि मैं किसे पसंद करती हूं ।" "मां ने उर्वशी का माथा चुनते हुए आशीर्वाद दिया और कहा मैं यही चाहती हूं " मां के दोस्ताना व्यवहार ने उर्वशी को इश्क समंदर में उतरने से पहले ही एहसास करा दिया कि भले ही वह स्वतंत्र हैं लेकिन समाज की रीतियों का उसे ध्यान रखना होगा क्योंकि किसी एक के लिए अपनों को छोड़ देने में भलाई नहीं है। समझदारी इसमें है कि सबको साथ लेकर किसी एक का हो जाए आ जाए । और समझदारी से काम लेते हुए कुछ सालों बाद एक दिन उर्वशी पृथ्वी की हो गई और इश्क समंदर में तैरने लगी। मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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प्यार में विश्वास ना हो तो सालों का रिश्ता भी टूटते देर नहीं लगती - Sad Story - Sad Stories

ये Heart Touching Kahani है अरविन्द और श्वेता की जो एक दूसरे से प्यार तो बहुत करते थे लेकिन सिर्फ एक ग़लतफहमी की वजह से सब बर्बाद हो गया. दोस्तों, ये हिंदी कहानी अंत तक ज़रूर पढ़े, हर बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड या पति पत्नी के लिए एक ज़रूरी सीख है. अरविन्द और श्वेता में बहुत गहरा प्यार है, दोनों की शादी को 5 साल हो चुके है लेकिन उनकी ज़िन्दगी अभी भी अधूरी सी है क्यूंकि इनके को बच्चा नहीं है. फिर भी, इन्हे विश्वास है कि इस साल इन्हे बच्चा हो जाएगा. दोनों के बीच इतना प्यार है कि ये एक दूसरे के बिना बिलकुल नहीं रह सकते. बच्चा ना होने की वजह से अरविन्द के माँ बाप श्वेता को कभी-कभी ताने मार देते है और श्वेता भी सुन लेती है क्यूंकि उसे यकीन है कि उसे बच्चा ज़रूर होगा. यूँ ही समय बीतता चला गया और एक दिन जब अरविन्द ऑफिस से घर आ रहा था तो उसने श्वेता को बाजार में किसी दूसरे मर्द के साथ देखा. श्वेता और वो व्यक्ति बहुत खुश लग रहे थे और ऐसा लग रहा था कि वे दोनों एक दूसरे को काफी वक्त से जानते हो. अरविन्द घर आ गया और फिर थोड़ी देर बाद श्वेता भी आ गयी. श्वेता के आते ही अरविन्द ने उससे पुछा “श्वेता…कहा गयी थी?” श्वेता ने हँसते हुए कहा “मैं बाज़ार गयी थी, घर का कुछ सामान लाना था” ये सुन कर अरविन्द को थोड़ा गुस्सा आया लेकिन उसने श्वेता को कुछ नहीं कहा. उसके बाद अरविन्द ने श्वेता को कई बार वही आदमी के साथ अलग अलग जगहों पर देखा और एक दिन अरविन्द ने देखा कि वो आदमी श्वेता को घर तक छोड़ने आया था. श्वेता उसके साथ बहुत खुश लग रही थी, उस व्यक्ति ने को घर के बाहर छोड़ा और फिर चला गया. अरविन्द का दिल बहुत दुःख रहा था लेकिन श्वेता को खो देने के डर से उसने उसे कुछ नहीं बोला. एक दिन अरविन्द घर पर बैठा था कि तभी श्वेता का मोबाइल फ़ोन बजा. श्वेता बाथरूम में थी इसलिए अरविन्द ने फ़ोन उठा लिया. फ़ोन उठाते ही दूसरी तरफ से आवाज़ आई “हेलो अरविन्द, मैं थोड़ी देर में घर आ रहा हूँ, कुछ ज़रूरी बात करनी है” बस इतना कह कर उस आदमी ने फ़ोन काट दिया. अब अरविन्द ये सोचने लगा कि उस आदमी को उसका नाम कैसे पता, अरविन्द के दिमाग में कई तरह के ख़याल आ रहे थे. अरविन्द को लगा कि शायद ये वो आदमी है जिसके साथ श्वेता अक्सर घूमती है. अरविन्द को लगा कि शायद श्वेता उससे डाइवोर्स लेना चाहती है और इस सिलसिले में बात करने वो व्यक्ति घर आ रहा है, अरविन्द बहुत उदास हो गया. वो अपनी शादी को टूटने नहीं देना चाहता था लेकिन चूँकि श्वेता ने धोखा दिया, उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. अरविन्द जैसे अपनी पत्नी को खोने के डर से घबरा गया था और वही ज़मीन पर गिर गया. इतने में श्वेता भी बाहर आ गयी और उसने अरविन्द को उठाया और पुछा “क्या हुआ तुम्हे, तुम ठीक तो हो?” अरविन्द ने गुस्से में श्वेता को धक्का दिया और वो गिर गयी और उसका सिर पास रखे टेबल पर लगा. श्वेता कोई हरकत नहीं कर रही थी. कांपते हुए हाथो से अरविन्द ने श्वेता को अपनी बांहो में उठाया और देखा कि उसके सर पर बहुत गहरी चोट लगी है जिसकी वजह से श्वेता बेहोश हो गयी है. तभी अरविन्द की नज़र श्वेता के हाथो में पकडे हुए एक एनवेलप पर गयी. उसने एनवेलप खोला तो उसमे लिखा था “Dear Arvind, मैं तुम्हे कई दिनों से बताना चाहती थी लेकिन सोचा कि तुम्हे सरप्राइज दू. मैं पिछले कुछ दिनों से अपने इलाज के लिए एक डॉक्टर के पास गयी थी और वो डॉक्टर मेरा वही cousin था जो बचपन में फॉरेन चला गया था. उसने मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया था और अब मैं 2 महीने प्रेग्नेंट हूँ. आज मैंने अपने उस cousin को खाने पर बुलाया है, तुम उससे मिल कर बहुत खुश होंगे. तभी दरवाज़े की घंटी बजती है और अरविन्द दौड़ कर दरवाज़ा खोलता है. दरवाज़े पर श्वेता का वही cousin खड़ा था और वो कहता है “अरविन्द…मैं नीरज हूँ, श्वेता का भाई, कैसे हो तुम?” तभी नीरज की नज़र श्वेता पर पड़ती है जो खून से सनी हुई ज़मीन पर पड़ी थी. नीरज फ़ौरन श्वेता को हॉस्पिटल ले जाता है और वहां श्वेता कोमा में चली जाती है. श्वेता अपने बच्चे को भी खो देती है. अरविन्द अपना सिर पकडे श्वेता के पैरो पर बैठा उससे माफ़ी माँगना चाहता था लेकिन श्वेता अभी भी कोमा में ही थी. एक छोटी सी गलत फेहमी ने श्वेता और अरविन्द के रिश्ते में भूचाल ला दिया. दोस्तों, ये कहानी हमें बहुत बड़ी सीख देती है. गहरे रिश्ते में किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले अपने पार्टनर से बात ज़रूर करनी चाहिए. खामियां हम सबमे होती है लेकिन अपने पार्टनर पर इल्जाम लगाने से पहले अच्छे से जांच ले और सबसे ज़रूरी उससे खुल कर बात करे. आप जो देखते है या सुनते है वो ज़रूरी नहीं कि सच हो. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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देर से ही सही प्यार का एहसास तो हुआ - Love Story - Love Stories

संजना बहुत छोटी थी तभी उसकी माँ गुजर गयी, वो बिलकुल अकेली हो गयी थी, रिश्तेदारों ने उसके पापा को दूसरी शादी कर लेने को कहा, चुकी संजना बहुत छोटी थी और उसके पापा वर्मा जी उसे अकेले नहीं संभाल पाते इसलिए उन्होंने दूसरी शादी कर ली, उनकी दूसरी पत्नी बहुत सुन्दर थी, उसकी सुंदरता देख कर वर्मा जी इतने कायल हो गए की वो संजना को भूल से गए थे, अब तो उनकी जिंदगी उनकी पत्नी तक ही सिमट कर रह गयी थी, वो ऑफिस से आते और अपनी पत्नी के पास चले जाते, उनकी पत्नी भी वर्मा जी को खुश करने में लगी रहती थी, वर्मा जी भी अपनी किस्मत पर खुश हो रहे थे, एक बेटी के रहते उन्हें दूसरी पत्नी इतनी सुन्दर मिली ये कभी सोच नहीं सकते थे,हलाकि वर्मा जी खुद देखने में ज्यादा सुन्दर नहीं थे,ना ही उनकी पहली पत्नी ज्यादा सुन्दर थी इसलिए संजना भी सुन्दर नहीं हुई, कुछ सालो के बाद वर्मा जी को दूसरी बेटी हुई जो बिलकुल अपनी माँ पर गयी, वो भी अपनी माँ की तरह बहुत ही खूबसूरत थी, वर्मा जी अब अपनी दूसरी पत्नी और बेटी तक सिमट कर रह गए थे,वो संजना को भूल से गए थे, संजना को उसकी सौतेली माँ नौकरानी बना कर रख दी थी , अपने ही घर में उसे दुसरो की तरह व्यवहार किया जाता था, और उसकी छोटी बहन भी उसे कभी बड़ी बहन नहीं मानी, उसे हमेशा नौकरानी ही समझा.संजना की छोटी बहन जिसका नाम वंदना था, वो बिलकुल अपने माँ की तरह थी, सुन्दर और संजना को नौकरानी समझने वाली, संजना ना कभी अपनी माँ की बात का जवाब देती ना ही अपनी छोटी बहन वंदना का, वो सिर्फ और सिर्फ घर का सारा काम करके पढ़ाई करती, काम और पढ़ाई के अलावे उसेक जीवन में कुछ भी नहीं था, इसलिए वो हर क्लास में टॉप आती थी, उसके उलट वंदना पढ़ाई के बदले मस्ती करती थी, वर्मा जी वंदना और उसकी माँ की हर मनोकामना पूरी करते थे, वंदना जिद करके भी अपनी मांग मनवा लेती थी,जबकि संजना ने कभी जिद किया ही नहीं, उसे डर था की उसकी मांग कभी पूरी नहीं होगी और ज्यादा जिद किया तो उसे घर से निकल दिया जायेगा, क्योंकि उसे घर में कोई भी पसंद नहीं करता था, वो सिर्फ काम वाली बन कर रह गयी थी, धीरे-धीरे वक्त बीतता चला गया और संजना बड़ी हो गयी, श्यामली रंग की संजना भले ही बहुत सुन्दर ना हो लेकिन वो बहुत ही समझदार,मेहनती,काम करने वाली और पढ़ने में बहुत ही तेज थी, अपनी पढ़ाई और अच्छी रिजल्ट की वजह से उसे एक अच्छी जॉब भी मिल गयी, इधर वंदना पढ़ाई छोड़ मस्ती करती थी,रात भर पार्टी करना, शराब पीना,क्लब जाना, और ना जाने क्या क्या शौक थे उसके. वो बहुत ही मुँह फट और बद्तमीज हो गयी थी, उसे अपनी सुंदरता का घमंड भी था, जैसे-तैसे करके उसने अपनी पढ़ाई पूरी की. इधर संजना जिस कम्पनी में काम करती थी, उसका मालिक बहुत अच्छा था, उसकी पत्नी उसके बेटे के 5 साल होते ही चल बसी थी और उसने दूसरी शादी नहीं की , अपना सारा ध्यान अपने कम्पनी की तरफ लगा दिया, जिसकी वजह से आज उसकी कंपनी शहर की सबसे प्रसिद्ध कम्पनी हो गयी थी, उसका बेटा संजीव भी बिना माँ और बिना पापा के प्यार के पला-बढ़ा था जिसकी वजह से वो भी बद्तमीज और घमंडी बन गया था, घमंड था उसे अपने पैसे का और अपनी स्मार्टनेस का, उसके पापा शर्मा जी बहुत परेशान हो गए थे उनकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे, क्योंकि ज्यों-ज्यों संजीव बड़ा होता गया वो और बद्तमीज होता गया, पैसे की कमी ना होने की वजह से अक्सर रात को पार्टी में जाता, क्लब में जाता, शराब पीता, और घर लेट से आता. एक दिन वो रात को क्लब में शराब पि रहा था और डांस कर रहा था, तभी वो वंदना से टकरा गया, और दोनों की निगाहें आपस में मिली और फिर क्या था, वो दोनों अक्सर किसी ना किसी पार्टी में मिल जाया करते थे, हमेशा एक दूसरे से टकराने की वजह से दोनों में पहले दोस्ती हुई फिर दोनों में प्यार हो गया, क्योंकि दोनों जिंदगी जीने का नजरिया समान जो था, दोनों मस्ती करते और जिंदगी की टेंशन ना लेते, धीरे-धीरे संजीव और वंदना में प्यार हो गया,और दोनों शादी की सोचने लगे, लेकिन शर्मा जी ने अपने बेटे के लिए कोई और ही पसंद कर लिया था, उसका नाम संजना था, शर्मा जी को संजना बहुत पसंद आयी, उसका काम करने का तरीका और समझदारी देख कर उन्हें लग गया था जिस तरह ये कम्पनी में काम करती है, उसी तरह यह मेरे बेटे की जिंदगी भी सवार देगी, इसलिए उसने संजना से अपने बेटे की शादी की बात उससे कह डाली, संजना सुन कर कुछ देर शांत रही फिर हाँ बोल दी, शाम को शर्मा जी ने अपने बेटे को बुलाया और बोला की उन्होंने उसकी शादी ठीक कर दी है, ये सुन कर संजीव गुस्सा हो गया और उसने बोला की वो किसी और से प्यार करता है और उसी से शादी करेगा, ये सुन कर शर्मा जी सोच में पड़ गए और उन्होंने उस लड़की का पता किया तो उन्हें पता चला की लड़की भी उनके बेटे की तरह है, दोनों देर रात तक पार्टी करते हैं और पैसे खर्च करते हैं, शर्मा जी परेशान हो गए और उनकी परेशानी की सबब जब संजना ने पूछा तो शर्मा जी ने बताया की उनका बेटा बिना माँ के पला बढ़ा है, ना जाने कब उसे अक्ल आएगी. वो बहुत जिद्दी हो गया है, जिसे सुन कर संजना ने कहा वक्त के साथ साथ सब सही हो जायेगा, टेंशन ना ले. शर्मा जी शाम को घर गए और बेटे को कहा की उसे उन्ही के द्वारा तय की हुई लड़की से शादी करनी होगी,वरना उसे जायदाद से कुछ नहीं मिलेगा, ये सुन कर संजीव सोच में डूब गया उसने ये बात जब वंदना से बताई तो वंदना ने कहा पापा के बताई लड़की से शादी कर ले, और उसे इतने परेशान करो की वो खुद तुम्हे छोड़ दे, उसके बाद वो दोनों शादी कर लेंगे. संजीव उसकी बात मान ली,और अपने पापा के बताये लड़की से शादी की बात मान ली, जब शादी हुई तो पता चला की संजीव की शादी संजना से हो रही है, वंदना को भी उसी दिन पता चला और संजीव को भी जिस लड़की से शादी हो रही है वो वंदना की बड़ी बहन है.अब तो वंदना और गुस्सा हो गयी,कल तक तो वो अपनी बहन को पसंद नहीं करती थी आज उससे नफरत करने लगी, क्योंकि उसने उसके बॉय फ्रेंड को उससे जुदा जो कर दिया था. जहां संजीव शादी के बाद संजना को परेशान करता था वहीँ संजना संजीव से बहुत प्यार करती थी, क्योंकि उसे बचपन से कभी प्यार नहीं मिला था,इसलिए वो संजीव से प्यार पाने में लग गयी थी, संजीव का ख्याल रखती थी, लेकिन संजीव संजना को पसंद नहीं करता था, इधर संजीव के पापा बीमार पड़े, संजना ने काफी कोशिश की लेकिन शर्मा जी बच नहीं पाए. और एक दिन वो चल बसे. शर्मा जी के जाने के बाद सारी जयदाद का मालिक संजीव हो गया और उसने संजना को इतना तंग किया की वो घर छोड़ दे, अंत में संजना को संजीव से तलाक लेना पड़े, और संजना उसे छोड़ कर चली गयी, उसके बाद संजीव ने वंदना से शादी कर ली और दोनों ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे. अब तो लेट नाईट तक पार्टी चलती रहती थी, संजीव ऑफिस भी नहीं जाता था, जिसकी वजह से कम्पनी को नुकसान होने लगा, धीरे-धीरे कंपनी बंद होने के कगार पर आ गयी, अब तो पैसे भी आने बंद हो गए थे, संजीव वापस कम्पनी में काम करने के लिए आ गया,लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था,उसने काफी कोशिश की लेकिन वो कम्पनी को चला नहीं पा रहा था, इस टेंशन में वो बीमार पड़ गया और उसने वंदना से कहा की आज रात मेरे साथ रहो,जबकि वंदना पार्टी जाने के लिए तैयार हो रही थी, उसने कहा, तुम बीमार हो मैं क्यों यहाँ रहू, तुम डस्टर को बुला लो मुझे पार्टी जाने में लेट हो रही है मैं जा रही हो, ये सुन कर संजीव को बहुत दुःख हुआ और उसे संजना की याद आने लगी उसे अब अपने गलती का एहसास हो गया था, उसने डॉक्टर को बुलाया और अपना इलाज करवाया, सही होने के बाद वो संजना को ढूढ़ने लगा, संजना का पता चला वो उससे मिलने चला गया,संजीव ने संजना से माफ़ी मांगी और उससे मिन्नतें की वो वापस कम्पनी ज्वॉइन कर ले, संजना आज भी संजीव से प्यार करती थी इसलिए वो टूट गयी और कम्पनी में वापस काम करने लगी, धीरे-धीरे संजना वापस कम्पनी को ऊपर लाने लगी,संजीव बहुत खुश था,अब वो घर से ज्यादा ऑफिस में रहता था, पार्टी जाना भी बंद कर दिया था, वो सारा ध्यान कंपनी में लगा रहा था, लेकिन वंदना को ये बात पता चल गयी की संजना वापस कम्पनी आ गयी है, उसने संजीव से कहा की वो संजना को काम से निकाल दे, लेकिन संजीव नहीं माना, वंदना को लग चूका था की संजीव की जिंदगी में संजना एक बार फिर वापस आ गयी है, अब तो रोज झगड़े होने लगे,लेकिन संजीव था की संजना को काम से नहीं निकाल रहा था, कहीं ना कहीं वंदना की बेरुखी संजीव को संजना के करीब ला रहा था, एक दिन गुस्से में आ कर वंदना ने कहा की वो संजीव को कोर्ट में ले जाएगी, संजीव ने भी कहा , ले जाओ, लेकिन वो संजना को नहीं निकलेगा. ये सुन कर वंदना गुस्से में कार से कोर्ट की तरफ जाने लगी गुस्से की वजह से वो गाड़ी बहुत तेज चला रही थी जिसकी वजह से कार का एक्सीडेंट हो गया और वंदना वहीँ मर गयी, कुछ दिनों के बाद संजीव ने संजना से दोबारा शादी कर ली और दोनों ख़ुशी ख़ुशी एक साथ रहने लगे,आज संजीव को सच्चे और अच्छे प्यार का मतलब समझ में आया, जो भी हो संजीव समझ चूका था की मन की खूबसूरती ज्यादा अच्छी होती है तन की खूबसूरती से, आज संजीव को देर से ही सही सच्चे प्यार का एहसास हुआ. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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एक ऐसी भी कहानी इश्क़ की - Love Story - Love Stories

संजीव दिल्ली में ही रह कर अपनी पढ़ाई कर रहा था, उसे किसी से कोई मतलब नहीं था, उसने अपना एक अलग ही दुनिया बना कर रखा था, एक कमरे का फ्लैट था, जिसमे किचन और बाथरूम अटैच्ड था, एक छोटी सी बालकनी भी थी,लेकिन वो बालकनी में ना के बराबर जाता था, उसका रूम किताबो से भरा हुआ था ,यूँ कह लीजिये की संजीव पूरा किताबी कीड़ा था,उसे बाहरी दुनिया से कोई मतलब नहीं था,जब देखो तब किताबो में घुसा हुआ रहता था, घर से इंस्टिट्यूट और इंस्टिट्यूट से घर,बस यही दुनिया थी उसकी. एक दिन शाम में अचानक लाइट चली गयी और अँधेरा हो गया, गर्मी भी बहुत थी, इसलिए वो बालकनी में निकल गया,तो देखा सामने के बालकनी में एक लड़की खड़ी है, लाल रंग की हाफ पेंट और ब्लू रंग की हाफ टी-शर्ट पहने वो खड़ी थी, दोनों की आपस में नजर मिली, फिर लड़की उधर देखने लगी और संजीव भी दूसरी तरफ देखने लगा, संजीव ने एक बार फिर तिरछी नजर से उस लड़की की तरफ से देखा, लड़की देखने में चिंकी लगी, दिल्ली में चिंकी उसे कहते हैं, जो लड़की नार्थ-ईस्ट इंडियन होते हैं, और नार्थ ईस्ट के लड़के को चिंका बोला जाता है. तो चिंकी को वो बार-बार देख रहा था,शायद वो चिंकी संजीव को पसंद आ गयी थी, चिंकी की भी नजारे संजीव से टकरा जाया करती थी, अब तो बार-बार नजरे मिलने लगी,नजरे मिलती और दोनों एक दूसरे से नजरे चुरा लेते और फिर तिरछी निगाहों से एक दूसरे को देखने लगते, तभी लाइट आ गयी और चिंकी वापस अपने कमरे में चली गयी, संजीव भी वापस अपने कमरे में चला आया, लेकिन उसका दिल अब पढ़ने में नहीं लग रहा था, उसकी निगाहें चिंकी को ढूंढने में लगी हुई थी, तभी एक बार फिर लाइट चली गयी और संजीव खुश हो गया और बालकनी में जा कर खड़ा हो गया, लड़की भी सामने खड़ी थी,दोनों एक दूसरे को देख रहे थे,फिर से लाइट आ गयी और दोनों अपने कमरे में वापस आ गए. एक समय था,जब लाइट जाती थी तो संजीव चिढ जाया करता था,और आज एक समय है जब लाइट जाने पर वो खुश हो जाया करता था, वो मना ही रहा था की एक बार फिर लाइट चली जाये और उसे चिंकी का दीदार हो जाये,लेकिन लाइट नहीं गयी,ना ही वो पढ़ पाया, अब तो हालात ये थे की संजीव को किताबो में भी चिंकी का ही चेहरा नजर आता था, संजीव ने किताब बंद कर दी और सोने की कोशिश करने लगा, सुबह वो उठ कर बालकनी में आया तो पाया,चिंकी मुँह धो रही थी, काफी सुन्दर लग रही थी वो, उसे देख कर संजीव को लगा की उसका दिन अच्छा गुजरेगा और हुआ भी वही,अब शाम को वो बालकनी में उसका इंतजार करने लगा लेकिन वो नहीं आयी, शायद लाइट थी इसलिए वो नजर नहीं आयी, उसने उस लड़की से बात करना चाही लेकिन कैसे बात करता उसकी समझ में नहीं आ रहा था, वो उसका नाम भी नहीं जानता था,और उससे उसको प्यार हो गया, अब संजीव का दिल पढ़ाई में नहीं लग रहा था, उसका दिल कह रहा था की कैसे भी उसका दीदार हो जाये वो उससे बात कर पाए लेकिन चार दिन बीत गए,और लड़की का दीदार नहीं हो पाया,तभी पांचवे दिन सुबह संजीव अपने घर से निकल कर बाहर जा ही रहा था की अचानक से वो लड़की नजर आयी वो भी घर से बाहर जा रही थी, संजीव उसका पीछा करने लगा, लड़की बस स्टॉप पर गयी,संजीव भी उसके पीछे बस स्टॉप पर चला गया,फिर लड़की ने बस स्टैंड,आई एस बी टी का बस पकड़ा, संजीव को लगा की वो कहीं शहर से बाहर तो नहीं जा रही है,इसलिए उसने सोचा की बस से उतर कर आखिरी बार ही सही उससे बात जरूर कर लूंगा, वो उसके पीछे बस पर चढ़ गया,लड़की बस स्टैंड पर उतर गयी और पैदल आगे बढ़ गयी, संजीव भी उसके पीछे ऐसा ही किया, लड़की सड़क पार करके मार्किट के अंदर चली गयी वो तिब्बती मार्किट था,संजीव आज तक सुना था इस मार्किट के बारे में कभी आया नहीं था, आज उस लड़की की वजह से उसने ये मार्किट देख लिया, कुछ देर के बाद लड़की एक दुकान के अंदर चली गयी, और कपडे सही करने लगी,संजीव को लगा या तो ये दुकान उसका है या वो इस दुकान में काम करती है, जब दिन चढ़ा तब तक संजीव बस स्टैंड पर भी इधर उधर घूमता रहा,फिर दिन चढ़ने के बाद वो उसी दुकान में चला गया और कपडे देखने लगा,लड़की उसे देखि और मुस्कुराने लगी, फिर दोनों के बिच बात भी हुई, संजीव बहुत खुश हुआ उससे बात करके, लड़की का नाम सेरेपा था, संजीव सोच में डूब गया की ये कैसा नाम है? लेकिन नाम तो नाम है,सेरेपा ने संजीव को बहुत सरे कपडे दिखाए और खरीदने को बोली,संजीव भी एक शर्ट खरीद कर चला गया, और शाम को वही शर्ट पहन कर बालकनी में खड़ा हो कर लड़की का इंतजार करने लगा, लड़की बालकनी में आई और शर्ट पहने संजीव को देख कर बोली अच्छे लग रहे हो,संजीव बहुत खुश हुआ,अब तो संजीव कुछ ही दिनों के बाद दुकान पहुंच जाता और शर्ट खरीद कर उसे पहन कर बालकनी में खड़ा हो जाता,और लड़की का इंतजार करता, लड़की भी देख कर खुश होती और संजीव को बोलती अच्छा लग रहे हो, इस तरह संजीव के पास बहुत सारे शर्ट हो गए,कल तक जिस रूम में सिर्फ किताबे होती थी आज उसकी जगह शर्ट ने ले ली थी, सिर्फ शर्ट और टी-शर्ट नजर आ रहे थे, एक दिन संजीव ने सेरेपा को “आई लव यू” बोल दिया,जिसे सुन कर सेरेपा चौंक गयी. उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या बोले? कुछ देर तक सोचने के बाद सेरेपा ने बोला की वो भी उसे पसंद करती है,लेकिन उसने कभी उसे प्यार की नजर से नहीं देखा,सिर्फ दोस्त समझा,अब तो संजीव का दिल टूट गया, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? प्यार के चक्कर में उसने ना जाने कितने शर्ट और टी-शर्ट खरीद लिए और सिर्फ दोस्त सुनने को मिला, अब तो उसका दिल रोने का कर रहा था, उसके लिए वो कितनी ही बार उसके दुकान के चक्कर काटे,जिसकी वजह से वो इंस्टिट्यूट नहीं जा पाया, साथ ही साथ वो कितना समय पढ़ाई के बदले बालकनी में खड़े हो कर बिता दिए,संजीव कहीं का नहीं रहा, अब तो उसका दिल कर रहा था की वो जोर-जोर से रोये, क्योंकि प्यार की चक्कर में वो बर्बाद हो चूका था,वो किसी से बिना कुछ बोले,वापस घर चला आया और कुछ दिन घर में बिता कर सेरेपा को भूलने की कोशिश करने लगा और वापस दिल्ली जाने के बाद उसने अपना घर बदल लिया और एक बार फिर अपनी पढ़ाई में जुट गया, ये कसम कहते हुए की अब किसी से प्यार नहीं करेगा……….. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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वाह रे गजब का इश्क़ - Love Story - Love Stories

सपना दिल्ली में अकेली रहती थी,पहले तो वो दिल्ली पढ़ने के लिए गयी थी,फिर पढ़ाई खत्म करने के बाद वो वहीँ जॉब की तलाश भी करने लगी, जॉब की तलाश करते-करते उसे एक दिन एक कंसल्टेंसी से जॉब के लिए कॉल आया,वो बहुत खुश हुई और जॉब की आशा में कंसल्टेंसी पहुंची,वहां उसकी मुलाकात रवि से हुई,रवि ने उससे बात की और जॉब दिलाने के नाम पर उससे 2500 रूपये ले लिए और उसे एक सप्ताह के बाद बुलाया,एक सप्ताह के बाद सपना ख़ुशी ख़ुशी ऑफिस पहुंची जॉब के लिए तो रवि ने उससे बड़े प्यार से बात किया और एक बार फिर 2500 रूपये ले कर उसे एक सप्ताह के बाद आने को बोल दिया,इस तरह सपना 5000 रवि को दे चुकी थी इस आशा में की उसे जॉब मिलेगा,अगली सप्ताह फिर पहुंचने के बाद रवि ने उससे प्यार से बात किया और अपने ही ऑफिस में काम दे दिया, सपना देखने में जितना सुन्दर थी,उतनी ही उसकी सुरीली आवाज थी, रवि ने उसे रिसेप्शन पर बिठा दिया और बोला की उसे आने वाले कैंडिडेट से बात करना है और कैंडिडेट को बुलाने के लिए उसे कॉल भी करना है,इसके लिए उसने उसे मोबाइल भी दे दिया. और उसकी सैलरी 8000 रूपये महीना तय किया और बाद में बढ़ा देने की भी बात कही. सपना ने सोचा की शुरू करने में क्या हर्ज है,और वो जॉब करने लगी. कुछ दिन तक तो सब कुछ अच्छा चलता रहा,फिर रवि सपना के करीब जाने की कोशिश करने लगा, पता नहीं लेकिन उसे सपना अच्छी लगने लगी और वो सपना के पास जाने की कोशिश करने लगा,रवि का अपने करीब आने सपना को भी अच्छा लगने लगा, इसलिए वो रवि को अपने करीब आने दे रही थी,कुछ दिनों के बाद फिर दोनों करीब हो गए. अब दोनों एक दूसरे के पास आ गए, इसी तरह 1 महीना बिता, 2 महीने बीते, तीसरा महीना सपना को याद आया की रवि ने उसे आज तक सैलरी नहीं दिया है, और वो रवि से मांग दी,इस पर रवि ने प्यार का वास्ता दे कर उसे चुप करवा दिया, उन्ही दौरान पंकज भी रवि से मिलने उसके ऑफिस आता था, यूँ तो पंकज रवि का दोस्त नहीं था,लेकिन हाँ जान पहचान जरूर थी इसलिए उसे जब भी समय मिलता वो रवि के ऑफिस आ जाता था, जब पंकज ने सपना को देखा तो उसे भी सपना से प्यार हो गया, लेकिन वो जनता था की रवि जरूर उससे प्यार करता होगा इसलिए उसने सपना के बारे में कभी कुछ नहीं बताया, खैर सपना को रवि एक यहाँ काम करते हुए 6 महीने बीत गए अब तो सपना का मन भारी होने लगा था, वो जब भी रवि से पैसे मांगती रवि कोई ना कोई बहाना मार देता,नहीं तो प्यार का वास्ता दे देता,और सपना मजबूर हो कर पैसा नहीं मांगती,लेकिन करीब 1 साल होने के आये तो सपना ने फिर पैसा माँगा और रवि ने बोला की वो पैसा नहीं दे पायेगा और ऑफिस भी बंद कर रहा है अब तो सपना कहीं की नहीं रही, अगले दिन से सपना ऑफिस जाना बंद कर दी कुछ दिनों तक तो वो चुप चाप बैठा रहा, फिर एक दिन उसे पंकज की याद आयी और उसने पंकज को कॉल करके जॉब दिलाने की बात कही, पंकज ने जब रवि के बार एमए पूछा तो सपना ने बताया की रवि ने ऑफिस बंद कर दिया है और वो जॉब की तलाश कर रही है, इस पर पंकज ने रवि के बारे में बताया रवि रोज ऑफिस खोलता है और उसने उसकी जगह नयी लड़की रख ली है, मतलब साफ़ था की रवि ने सपना का यूज़ किया और उसके बाद सपना को छोड़ दिया, वो रोने लगी लेकिन पंकज ने यूज़ संभाल लिया और इस तरह अब पंकज सपना के करीब हो गया और कुछ दिनों के बाद पंकज ने सपना को प्रोपोज़ कर दिया, सपना बहुत खुश हुई और वो पंकज के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना ली .सपना बहुत खुश थी की उसे पंकज जैसा लड़का मिला जो उसे बहुत प्यार करता था, लेकिन उसके दिमाग में रवि से बदला लेने का भी प्लान बन रहा था, सपना ने पंकज को रवि के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया,पंकज भी रवि को मारने का प्लान बनाता,ये प्लान सुन कर सपना बहुत खुश होती, लेकिन प्लान कभी सक्सेस नहीं होता,क्योंकि पंकज पहले ही रवि को सारा प्लान बता देता था,और ये बात सपना को नहीं मालूम होता, प्लान को सफल बनाने के लिए पंकज हमेशा सपना से पैसा लिया करता,और वो पैसा पंकज और रवि आपस में बाँट लेता, एक दिन सपना ने पंकज से पूछा, इतना पैसा खर्च होने के बाद भी रवि का कुछ नहीं हुआ,अब तो पंकज को लगा की सपना सच्चाई ना जान जाये, इसलिए दो दिनों के बाद ही वो सपना को ले कर हॉस्पिटल गया,जहाँ रवि के हाथ-पैर में पट्टी बंधा हुआ था,और पंकज ने बताया की उसके दोस्तों ने रवि की ये हालत की है, सपना बहुत खुश हुई लेकिन पंकज उदास था, इस पर सपना ने उसकी उदासी की वजह पूछी तो पंकज ने बताया की रवि ने पुलिस कम्प्लेन किया है और उसका दोस्त पुलिस की गिरफ्त में है और उसने उसका नाम लिया तो दोनों फस जायेंगे, इस पर सपना ने पूछा कैसे बचा जाये तो पंकज ने कहा की पुलिस वालो को पैसे देने होंगे,उसके बाद ही वो दोनों बच सकते हैं, फिर क्या था? सपना ने पंकज के बताये अनुसार पैसे दे दिए, सपना के जाने के बाद रवि उठ कर बैठ गया और दोनों दोस्त पार्टी भी किये और इस ख़ुशी में सपना ने पंकज को किश भी दिया और उसके साथ शारीरक संबंध भी बनाया,अब तो पंकज को जब पैसा चाहिए था,वो सपना से ले लेता,और सपना भी पंकज को पा कर खुश थी, एक दिन सपना ने पंकज को मिलने के लिए बुलाया,लेकिन पंकज ने बहाना बना दिया,संयोग से सपना जो पार्क घूमने गयी थी उसी पार्क में उसने पंकज को दूसरी लड़की के साथ देखा,अब तो सपना का दिल एक बार फिर टूट गया, उसे लगा की पंकज भी उसे धोखा दे रहा है, अगले दिन वो पंकज के घर पहुंच गयी और उसे शादी करने को बोला,पंकज मना कर दिया . ये बात पंकज का बड़ा भाई संजीव भी सुन रहा था, उसने पंकज को डाँट लगाई और कहा की शादी नहीं करना था तो इससे प्यार क्यों किया,इस पर पंकज ने बताया की वो इससे नहीं किसी और से प्यार करता है, ये सुन कर सपना के आँख भर आये और उसने पंकज के बड़े भाई को सारी बात बता दी,पंकज के बड़े भाई संजीव ने सपना को अपने रूम में ले गया और उसके आसूं पोछे और उसे प्यार से समझाया की वो टेंशन ना ले वो पंकज से बात करेगा. लेकिन धीरे-धीरे पंकज सपना की जिंदगी से चला गया और उसका स्थान पंकज के बड़े भाई संजीव ने ले लिया, हलाकि संजीव जॉब करता था और उसके पास समय नहीं था, फिर वो सपना से मिलने के लिए समय निकालता था और ये बात सपना को पसंद आ गयी, संजीव की बातें, उसका स्वभाव सपना को बहुत पसंद आया और सपना संजीव के करीब जाने लगी, अब तो सपना और संजीव रविवार को सारा दिन एक साथ बिताते थे, दोनों एक दूसरे के बहुत ही करीब आ गए.इतने करीब की सपना ने संजीव के साथ शारीरक सम्बन्ध भी बना लिया था, अब सपना ने सोचा क्यों ना संजीव से जरिये पंकज से बदला लू, इसलिए वो पंकज के सामने ही संजीव को चूमती थी, उससे प्यार करती थी, ये बात पंकज को मालूम था,क्योंकि रवि को मजा चखाने के लिए सपना ऐसा कर चुकी थी, आज वही दिन है अंतर सिर्फ इतना था की उस दिन रवि से बदला लेने के लिए उसी का दोस्त पंकज था और आज पंकज से बदला लेने के लिए पंकज का बड़ा भाई संजीव था. धीरे-धीरे सपना ने संजीव को अपने प्यार के मोहजाल में फसा लिया ,लेकिन क्या संजीव सपना के कहने पर अपने छोटे भाई को कुछ करेगा, सपना को यकीन था,लेकिन संजीव की सोच भी पंकज और रवि की तरह ही था.सपना से पैसा मिल ही रहा था और ऊपर से शारीरक सुख भी.वक्त के साथ साथ सपना को ये पता चल ही गया की, संजीव अपने छोटे भाई को कुछ नहीं करेगा, उसे संजीव पर गुस्सा आ रहा था, लेकिन वो क्या करती,कहीं ना कहीं वो संजीव से जुड़ा रहना चाहती थी,क्योंकि संजीव से वो प्यार करती थी,लेकिन संजीव , सपना से प्यार नहीं करता था,इसलिए तोजब भी वो शादी की बात संजीव से की तो संजीव टालने लगा,आखिर कार सपना को ये पता चल ही गया की संजीव उससे शादी नहीं करेगा,और उसे बहुत बुरा लगा लेकिन वो न ही अपने भाई को डांटा और न ही उससे शादी करेगा.इस तरह सपना का दिल पहले रवि तोडा फिर पंकज ने अब संजीव भी उसका दिल तोड़ रहा था.जब सपना ने संजीव पर दवाब बनाया की वो शादी कर ले ,तो संजीव शादी करने से मना कर दिया.अब तो सपना बिलकुल अकेली हो गयी थी, उसे यकीं हो गया था की सभी ने मिल कर उससे पैसा और इज्जत दोनों प्यार और शादी के नाम पर सिर्फ और सिर्फ लुटा. मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Hp Video Status Ki Kahani” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।
 

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