मन का डर - रोमांचक कहानी - Stories - Story

मन क

महिला का प्रत्येक अंग उसके सौंदर्य का बोध कराता है । यह और बात है हम भले ही कुछ चीज़ों को बाहरी मन से नकार दें । अरे रूप का क्या है ? गुण विचार अच्छे होने चाहिए । यह भी बात सही है, लेकिन रूप की भी अपनी अलग जगह है । वास्तविकता यह है कि, प्रत्येक महिला य पुरूष स्वयं को अच्छा देखना चाहते हैं । हम अपने चेहरे बालों इत्यादि को सुंदर रखना चाहते हैं । पुरूषों के बाल उतरने लगें , तो फिर भी इतना प्रभाव नहीं पड़ता । सोचिए यदि महिला गंजी और सपाट हो जाए तो , क्या उसे इसका आघात नहीं होगा ? .... " क्यों नहीं ज़रूर होगा " और ये उसके जीवन पर प्रभाव अवश्य डालेगा । लेकिन यदि किसी कारणवश कुछ कमी रह जाए तो हमें समझदार होना चाहिए और हीन भावना को तत्काल त्यागना चाहिए । क्योंकि हीन भावना हमारे मस्तिष्क का विकास रोक देती है । आप सोचने लगो कि , मेरा दाँत टेढ़ा है .... नाक पर तिल है... मेरे बाल उसकी तरह घने क्यों नहीं हैं ?..... मैं सांवली हूँ दूसरे गोरे हैं । यदि उपाय संभव नहीं है तो , आप हीन भावना पालकर अपना जीवन नष्ट न करें । जो कुछ है स्वीकार करें , और चरित्र निर्माण एवं विकास करें । नेहा इतनी खूबसूरत कि , देखने वाले की आँखें कभी थके ही नहीं । कंधे पर फैले काले घने बाल , कमर तक पहुंचे रहते । पूरा काॅलेज नेहा के काले घने बालों की तारीफ करते थकता नहीं था । गोरे चेहरे पर काली गोल आँखें बालों के साथ ऐसा सौंदर्य और रूप का निर्माण करती थी , संन्यासी भी अपना तप छोड़ कर उसके सौंदर्य का गान करने लगे । नेहा पर बहुत से लड़के जान छिड़कते थे , मन ही मन पसंद करते थे । कुछ ही दिन पहले उसे विवेक ने प्रपोज किया .... विवेक ने जीवन भर साथ निभाने का वादा भी किया लेकिन नेहा ने साफ मना कर दिया । " आइन्दा से ये सब करने की कोशिश मत करना विवेक । मुझे यह सब पसंद नहीं ... और वैसे भी मैं ब्राह्मण परिवार से हूँ , आपके साथ तो रिश्ता सपने में भी नहीं हो सकता । " विवेक ने ढेर सारी बातें और वादों की पोटली नेहा के सामने खोली ...... पर कुछ भी हल नहीं निकला । विवेक के दोस्तों ने भी कहा " अरे भाइ ! वो एक घमंडी किस्म की लड़की है , तेवर देखे उसके कभी ... मुझे तो लगता जहाँ घर बसेगा सबको बेच खाएगी । " विवेक की दोस्त ज्योती बोली " एटिट्यूड देखा उसमें कितना है ?? छोड़ न ....भाड़ में जाए , ऐसी लड़की " विवेक ज्योती की बात पर बोला " सबसे पहली बात तो यह है कि, एटिट्यूड शब्द का सही जगह पर उपयोग करना सीखो । एटिट्यूड का मतलब घमंड य गुस्सैल नहीं होता । तुम लोगों ने आजकल ""एटिट्यूड"" शब्द के मायने ही बदल दिए.... उसका एटिट्यूड , माइ एटिट्यूड, वगैरह-वगैरह । एटिट्यूड का अर्थ दृष्टिकोण होता है समझे । "___ विवेक बात पलटकर सही बात तो कर रहा था, लेकिन अभी भी नेहा के ख्याल उसका पीछा नहीं छोड़ रहे थे । नेहा काॅलेज से थकी आई , फिर घर के काम में लग गई शाम को कोचिंग गई .... और खाना खाकर रोजमर्रा की तरह अपने बैडरूम में चली गई । नेहा काॅलेज गई तो , देखा सब हंस रहे थे । उसके साथ की मानसी , अवंतिका , मोनिका सबने आश्चर्यचकित होकर पूछा क्या हुआ ये ? ? नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया, बस चुपचाप रही । नेहा ने दुःख भरे स्वर में सिर्फ इतना ही कहा " छोड़ो यार कुछ नहीं " नेहा के सिर पर एक भी बाल नहीं था , अब उसके चेहरे पर काली आँखें भद्दी लग रही थीं । नेहा को देखते ही क्लास के बच्चे हंसी रोक-रोक कर नेहा पर हंसते जा रहे थे । नेहा जब भी अकेले में होती उसके आँसू अपने-आप ही बहने लगते । नए नए डाक्टरों के पास हफ्तेभर चक्कर लगते रहते । उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, उसने बाज़ार से नकली बालों की विग ली लेकिन नकली तो नकली चीज़ होती है । आईने के सामने बैठती और बाल बनाने का मन होता तो चेहरा मुरझा कर सिकुड़ जाता । उसने देखा कि , फेसबुक और ह्वाॅटसएप पर नेहा की फोटो घूम रही है । बिल्कुल बदसूरत और गंजी , बगैर बालों के कितना खराब लग रही है । नेहा स्वयं ही सोचकर कुढ़ने लगी थी । नेहा का स्वभाव ऐसा हो गया था कि , वह छोटी-छोटी बातों में गुस्सा करती और खीझ करती । नेहा नहाते समय शीशे पर नज़र डालती तो.... मन होता कि , शीशा तोड़कर उसके काँच टुकड़े अपने बदन में दाखिल कर दे और छिन्न-भिन्न कर दे इस बदसूरत चेहरे को । नेहा ने एक बार फेसबुक पर एक ख़बर पढ़ी थी " साँवला होने से परेशान होकर एक युवती ने फाँसी के फंदे से मौत को लगाया गले " नेहा ने उस ख़बर को पढ़ने के बाद सहेलियों से चर्चा में कहा था " इन सब छोटी-छोटी चीज़ों से परेशान होकर आत्महत्या करना तो कायरों का काम है । और मरने के बाद कौन सा साँवलापन दूर हो जाएगा ? ? " उसने एक ख़बर ऐसी भी देखी थी जिसमें एक युवक ने अपने हाथ की नस काट ली थी क्योंकि उसके पूरे बाल झड़ने के कारण सिर सपाट हो गया था । इलाज के लिए पैसे नहीं थे और बगैर बालों के कोई भी शादी करने को तैयार न था । नेहा ने इस पर भी कहा था कि, " ऐसा नहीं करना चाहिए । आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता । " लेकिन आज खुद नेहा का मन काबू में नहीं था । उसने गुस्से में अपने शरीर पर नाखून चलाने शुरू कर दिए । उसने देखा कि, नाखून लगने से दोनों ओर छातियों पर लाल निशान पड़ गए हैं । नेहा के लिए आए हुए शादी के कई रिश्तों ने मना कर दिया । जीवन के लिए अब जीवनसाथ की इच्छा बढ़ने लगी थी । एक समय था , जब नेहा सोचती थी उसे शादी की इतनी जल्दी नहीं है । लेकिन अब अकेले समय काटना एक-एक पल भी बहुत भारी लग रहा था । नेहा ने इधर-उधर निकलना भी कम कर दिया था । न जाने क्यों उसे अचानक विवेक की याद आई , जिसका प्रेम प्रस्ताव उसने चेतावनी देकर ठुकरा दिया था । नेहा हमेशा सोचती रहती थी .... किसी ऊंची हैसियत और अपने ही जैसे घने काले बाल वाले लड़के से शादी करूंगी भले ही अरेंज मैरिज क्यों न हो । घरवालों ने लड़का ढूंढा तो अच्छा ही ढूंढेंगे न .... । उसने अपनी कुछ सहेलियों के पति को देखा था जो अमीर तो थे ..... लेकिन उनकी खोपड़ी से बाल नदारद थे । इसलिए नेहा बार बार बालों के बारे में सोचती रहती थी । लेकिन अब तो नेहा को वह भी नसीब में नहीं लग रहा था । उसने कहीं से विवेक का नंबर मंगवाकर उसे फोन किया । पहले तो विवेक ने बहाने बनाए लेकिन फिर आ ही गया । नेहा ने विवेक को उसका ठुकराया प्रपोजल याद दिलाया ..... और माफी मांगी । " विवेक माफ कर दो यार , लेकिन मैं सरस्वती माता की कसम खाकर कहती हूँ ... मैं तुमसे तुरंत शादी करने को तैयार हूँ । विवेक प्लीज़ यार..... तुम बहुत अच्छे लड़के हो । मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती । " नेहा ने देखा कि, धीरे-धीरे विवेक के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल रही है .... और यकायक विवेक हाहहह--खीखीखी-हीहहह ..... नेहा का मज़ाक उड़ाते हुए हंसने लगा । नेहा के चेहरे पर आँसू उतर आए , नेहा तेज़ी से पैर पटकर आगे बढ़ी । चलते-चलते घर पहुंच कर गुस्से में सिर से नकली बाल फेंके और आईने के सामने रोने लगी । "लड़के बहुत मतलबी और दुष्ट होते हैं , मक्कार होते हैं " यह सब कहते हुए उसने दुपट्टा निकाला और पंखे पर लटक गई । नेहा इस तरह से लटक गई कि , बचने के लिए छटपटाने लगी । नेहा के हाथ पैर चलने लगे , मुँह से मम्मी - पापा की आवाज़ निकलने लगी । नेहा उठी और देखा कि , आसपास किताबें बिखरी हैं । स्वयं बिस्तर पर अस्तव्यस्त होकर लेटी है.... और घर के सभी सदस्य नेहा को ऊपर से घूर रहे हैं । मम्मी खड़ी है , हाथ में चाय का कप लेकर ..... पापा भी पास में खड़े हैं । सभी ये सोचकर आए कि , ये चिल्ला क्यों रही है ? रोहन बोला " क्या हुआ रे मोटी ??? कौनसा वाला सपना देखा आज ??? हाहहहहाहहह " ये छोकरी रोज सपने में चिल्लाती है "__ मम्मी बोली "क्या हुआ ? बेटा नेहा ..... सब ठीक है ?"__ पापा बोले " मोटी की शादी हो जाएगी तो , वहाँ अपने ससुराल वालों को डराना..... हाहहहहह "___ नेहा का भाइ रोहन बोला । तीनों इधर-उधर चले गए , मम्मी चाय का कप टेबल पर रख चुकी थी । नेहा उठी और उसने आईने के सामने बैठकर अपने मुलायम बाल बांधे ..... फिर चाय पीते हुए सोचने लगी । दिन भर काॅलेज की थकान ..... फिर कोचिंग ..... फिर खाना खाया...... फिर अवंतिका से फोन पर चैटिंग की ..... फिर लेटते हुए एक बजे तक नोवेल पढ़ी और फिर कब नींद आ गई पता ही नहीं चला । लेकिन रात का सपना सचमुच कितना डरावना था । हे ! भगवान् ऐसा कभी न हो । नहाते समय नेहा के बाल गिरते तो , उसे बहुत चिंता होती थी । नेहा को सपने के कारण मन का डर और भी गहरा होता गया । फिर भी सोचती " छोड़ो सपना ही तो था । " उसने काॅलेज अवंतिका से लंबे सपने वाली बात बताई तो , पहले उसकी सहेलियाँ हंसने लगीं । फिर अवंतिका ने गंभीर होकर कहा " देख, , नेहा .... ! सपने ज़्यादा लंबे नहीं आते , लगभग पच्चीस - तीस सेकंड के आते हैं । और हमें लगता है कि, जैसे हम रात भर सपने देख रहे थे । कभी कोई पैर खींच रहा है ..... कभी धड़ड़ड़ड़ाम्म गिर गए....कभी दांत उखड़ गए, कभी कोई पीछे भाग रहा है ..... कभी झूले से घिर गए । मानसी बीच में ही बोली__ " और कभी-कभी नेहा की तरह गंजे हो गए .... हाहहहहह " फिर अवंतिका ने अपनी बात शुरू की " देख नेहा... कोई कितनी देर तक सोता है, इस संबंध में किसी प्रकार का सुनिश्चित और सख्ती से पालन किया जाने वाला नियम तो नहीं है । फिर भी औसतन एक वयस्क व्यक्ति ७ से ९ घंटे सोता है। वहीं नवजात शिशु २० घंटे, ४ वर्ष का बालक १२ घंटे, १० वर्ष का बालक १० घंटे । बुजुर्ग व्यक्ति को ६ से ७ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन बुजुर्गों को नींद कम आती है , इसीलिए वो जल्दी उठ जाते हैं.... सुबह-सुबह । रही बात सपनों की ,, वह थकान य ज़्यादा सोचने के कारण भी आते हैं । क्योंकि अगर तुम बार-बार एक ही जैसी बातें सोचते हो तो , सपने भी वैसे ही आते हैं । ब्वाॅइज को नाइट फाॅल होना इत्यादि उस तरह के सोचने के लक्षण हैं । और यह कोई बीमारी य कोई खास समस्या नहीं है । लेकिन बहुत ज़्यादा एक ही जैसी चीज़ सोचना अवसाद को जन्म दे सकती है । इसलिए बी कूल हैप्पी । सोने से पहले एक गिलास ठंडा पानी ज़रूर पीना चाहिए । मोनिका बीच में ही बोली___ " तेरी शादी की बात चल री बल हैंय ? ? कख रैंदु ली तेरू जवैंइ ??? " यार तू गढ़वाली में मत बोला कर । मुझे ज़्यादा समझ नहीं आती ____ नेहा बोली । सभी सहेलियाँ हंसने लगीं । फिर नेहा ने अपनी बात पूरी की पापा ने बताया कि , मुंबई में मेकअप आर्टिस्ट की कंपनी चलाता है "विल्सन मेकअप कंपनी" महीने के तीस हज़ार रूपए कमाता है । पापा के जानने वाले हैं न.... विनय शर्मा अंकल उन्होंने करवाया ये रिश्ता । अवंतिका :- क्या नाम है लड़के का ? नेहा :- हाहह छोड़ यार नाम-वाम मोनिका :- अरे ! ... शरमा रही है जैसे ... मानसी :- बोल न यार .... नेहा ने मोबाइल फोन निकाला और फोटो दिखाई । विवेक नाम है । अवंतिका बात काटते हुए बोली " लगता है , विवेक नाम के लड़के तुझ पर कुछ ज़्यादा ही लट्टू हो गए हैं । हैंडसम यार .... " मानसी :- बहुत सही यार .... मिली भी अभी तक ? नेहा :- न..... फोन पर हुई बात सिर्फ, पापा सगाई-वगाई के चक्कर में न पड़कर सीधा शादी की बात कर रहे हैं । मोनिका :- और क्य सही है यार । नेहा :- पैसा था , वो घर बनाने में लग गया । कुछ रोहन की पढ़ाई पर । इसलिए शादी का ही सोचा पापा ने । अवंतिका :- और क्य ठीक है यार , और सभी अपनी-अपनी ढंग से चाहते हैं शादी करना । मानसी :- चलो फिर टाइम भी हो गया, त्रिपाठी सर की क्लास है । चारों एमए की क्लास की तरफ चले गए । क्लास में थोड़ी देर की बातचीत के बाद त्रिपाठी सर आए और भूगोल पढ़ाना शुरू किया । महीने बीतते गए नेहा का होने वाला पति विवेक , वीडियो काॅल और फोन से लगातार नेहा से बातचीत करता रहता । विवेक बेहद समझदार और गंभीर स्वभाव का था । उसे भी नेहा की बातें और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने के लिए कहना अच्छा लगता था । दोनों के बीच खुलकर कब रोमांस भरी बातें होने लगी थीं , पता ही नहीं चला । दोनों एक-दूसरे के मिलन को होने के लिए बेहद उत्साहित थे । धूमधाम से नेहा की शादी हुई , नेहा बहुत सुंदर लग रही थी । पार्लर वाली ने उसे इस तरह सजाया कि , बराती देखते रह गए । विवेक के दोस्त भी बार-बार कहते " बहुत भाग्यशाली हो भाइ.... इतनी खूबसूरत बीवी मिली है " विवेक थोड़ा मोटे चेहरे का था , लेकिन नेहा ने कोई खास ध्यान नहीं दिया । नेहा सोचती थी, जहाँ दिल मिल गए वहाँ चेहरे कोई मायने नहीं रखते । विवेक की दाढ़ी का लुक बहुत बढिय़ा लग रहा था । किनारे से मुलायम सिर के बाल झलक रहे थे, जो सेहरे से बाहर आए थे । नेहा की विदाई के समय मम्मी-पापा ने नेहा को गले लगा कर विदा किया । रोहन हमेशा अपनी बहन को मोटी कह कर चिढ़ाता था , उसे घर सुनसान लग रहा था । नेहा ससुराल पहुंची तो , सभी ने मुस्कुराते हुए स्वागत किया । सभी रस्म रिवाज खुशी-खुशी पूरे हुए । और वह रात आई जिसका बेसब्री से दोनों नवदंपति इंतज़ार कर रहे थे । बहुत देर तक दोनों के बीच बातें हुई , कब दोनों एक दूसरे के चेहरे को देखते हुए मदहोश हो गए पता ही नहीं चला । सुबह नेहा ने अपने बिखरे कपड़े पहने , विवेक बाथरूम नहाने जा चुका था । नेहा ने पानी पिया और बाथरूम को ठक-ठक करने लगी । फिर बाहर आने के इंतज़ार में थोड़ा दूर खड़ी हो गई । सभी शादी के काम से थके हारे नीचे कमरों में सो रहे थे । नेहा दरवाज़े के पास खड़ी रही , बाथरूम से एक गंजा आदमी बाहर आया । नेहा की नज़र पड़ी तो , वापस कमरे की तरफ चली आई । उसे लगा कोई शादी का मेहमान है , इसलिए इस तरह उसके सामने जाना ठीक नहीं । वापस बेड पर बैठ कर रात के पल सोचकर मुस्कुराते हुए उसने फोन उठाया और लेटकर फेसबुक चलाने लगी । उसकी नज़र यकायक कमरे के ड्रेसिंग के सामने पड़ी । एक गंजा आदमी आदमी हाथ में विग लिए खड़ा है । नेहा ने .... खंखार कर गला साफ करते हुए कहा " कौन ..... ???? " वो पलटा .... " विवेक तुम ??? "____ नेहा ने कहा " अरे ! उठ गई ?? "___ विवेक बोला " मुझे छोड़ो.. ये हाथ में ???? "___ नेहा ने भृकुटी तानते हुए विवेक से पूछा । विवेक के हाथ में उसकी अपनी विग थी , और उसे ठीक कर रहा था । बगैर बालों के उसका मोटा सा चेहरा, नेहा को बड़ा अजीब लग रहा था । क्योंकि उसने कभी भी विवेक को ऐसे पहले कभी नहीं देखा था । न कभी विवेक ने उसे बताने की जरूरत समझी । फेसबुक प्रोफाइल से लेकर प्रत्येक फोटो उसकी लंबे बालों में थी । जो कितना भी ज़ूम करने पर लगते नहीं थे नकली होंगे । विवेक एक पचास साल से ऊपर का युवक लग रहा था । नेहा ने मुँह फेर लिया और सिसकने लगी । विवेक को कुछ भी समझ नहीं आया कि, नेहा को कैसे समझाए । उसने अमिताभ बच्चन तक का उदाहरण दिया कि , उनकी विग है ..... लेकिन लगती असली है । तो क्या उनकी पत्नी ने मुँह फेर लिया ???? नेहा सुनों... मुझे बचपन से ही प्रोब्लम थी , इसलिए कभी बाल आए नहीं । थोड़ा बहुत आए , वो रहे नहीं ।___ ढांढस बंधाते हुए विवेक बोला । नेहा :- तुमने मुझे धोखा दिया है विवेक । पहले तो बता सकते थे न ? और तुम अमिताभ बच्चन का उदाहरण देकर ........ साबित क्या करना चाहते हो ? तुम अमिताभ बच्चन नहीं हो..... न ही मैं..... नेहा बोलते-बोलते फूट - फूट कर रोने लगी । अभी एक भी दिन नहीं हुआ था और नेहा को इस बात का आघात लगा कि , विवेक ने बहुत कुछ छुपाए रखा । नेहा ने पूरे दिन भर बातचीत नहीं की । चुपचाप छन-छन टन-टन करके रसोई में खाना बनाती रही । जिस कढाई पर करछी चलाने से आवाज़ 2 आती है, उसकी 10 आ रही थी । बर्तन धुलते समय आवाज़ में बर्तन लड़ते हुए नज़र आ रहे थे । कपड़े धुलने जाती तो , कुछ वाशिंग मशीन में धुलती और कुछ फर्श पर छप्पाक.... छप्पाक । विवेक की जींस धुलते समय उसे विवेक का चेहरा याद आता ...... फिर जींस को पछाड़ कर धोती और फच्च --- फच्च--- फच्च्च करके ताकत के साथ धोती । नेहा का भोलाभाला स्वभाव उग्र और तीखा होने लगा । विवेक घर पर बगैर विग के रहता था , उसे लगातार अपने पति से चिढ़न होने लगी । विवेक के दोस्त आते तो मज़ाक में कहते " हाँ भइ गंजे, भाभी से तो मिलवा दे " इतना सुनते ही नेहा के तन बदन में आग की लपटें दौड़ने लगती । कई रातें गुज़र गईं लेकिन दोनों अलग-अलग सोते । विवेक को मीठे मिलन का तीखा दर्द होता लेकिन पत्नी है .... फिर भी जबर्दस्ती नहीं करता । अब मम्मी-पापा के लिए सुबह की चाय भी , विवेक उठकर बनाता था । नेहा दिन भर पड़े - पड़े फेसबुक चलाती और पुरानी सहेलियों से बात करती । अवंतिका , मोनिका, मानसी सभी के पति कितने हैंडसम और फिट थे । यह सब सोचती रहती । एक दिन नेहा को अपना वही सपना याद आया । और साथ ही साथ काॅलेज वाले विवेक के प्रपोजल की याद भी । नेहा ने अपने पति को फेसबुक पर ब्लाॅक कर दिया । उसने विवेक को फेसबुक सर्च किया और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी । दो दिन दिन बाद विवेक ने एक्सेप्ट की । दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई । विवेक ने हालचाल पूछने का सिलसिला शुरू किया । नेहा ने भी अपनी पूरी बात विवेक को दुःखी इमोजी के साथ बताते हुए पूरी की । विवेक ने सिर्फ इतना कहा " क्या कर सकते हैं यार अब " जैसा भी है , तुम्हारा पति है ..... तुम्हें सबकुछ भूल कर एक्सेप्ट कर लेना चाहिए । " " यार इसने इतनी बड़ी बात छुपाई .... मैं न जाने क्या-क्या ख़्वाब लेकर बैठी थी । " दोनों के बीच खूब बातें हुई , एक दिन बात होते-होते ऐसी बातें होने लगीं कि , नेहा को उसकी बातें अच्छी लगने लगीं । लेकिन नेहा को इस बात का आभास नहीं था कि, अपने अच्छे चरित्र के पति को भुलाकर , वह एक काल्पनिक और कहानियों जैसी दुनिया में जी रही है । उसने अपने पति से मुँह पहले ही मोड़ लिया था । नेहा ने एक दिन मिलने का प्लान बनाया और अपने काॅलेज वाले प्रेमी विवेक से मिलने चली गई । दोनों ने काफी देर तक बातचीत की और फिर होटल के कमरे में रहे । दोनों के बीच संबंध बन गए । कुछ दिन तक फोन पर बातचीत करते-करते एक दिन अचानक नेहा को मैसेज आया " नेहा मेरी फेसबुक आईडी मेरी होने वाली वाइफ के पास भी है.... सो-प्लीज़ कोई भी मैसेज मत करना " नेहा को यह बात बहुत बुरी लगी और फिर उसी तरह अपने ख्यालों में पिसने लगी । सास ससुर के साथ भी बात-बात पर झगड़ा करती । विवेक के माता-पिता को नेहा के स्वभाव की वजह पता लग गई थी । विवेक की मां ने एक दिन रोते हुए कहा " बेटी तू मेरे बच्चे की ज़िदगी बर्बाद कर रही है ...... अब तू खुद सोच कहाँ से लाएँ उसके सिर पर बाल ?? ... भला ये कोई तुक बनता है ??? इस तरह पति के साथ व्यवहार करने का ??? " विवेक के पिता ने पहले ही समझाने से मना कर दिया था कि " मैं बहू को कुछ नहीं समझाऊंगा , ये समाज का जुमला है ( बहू बेटी एक समान ... बहू बेटी में कोई भेद नहीं । ) लेकिन विवेक की " माँ " ..... बहुत फर्क है ..... बेटी को हम बचपन से नहलाते - धुलाते हैं, उसके कपड़े बदलते हैं । क्योंकि वो हमसे उपजी है । लेकिन कुछ भी कहो बहू पराई घर की बेटी है , उसे हमने बचपन से देखा नहीं । इसलिए हमें स्वभाव का पता नहीं । इस तरह समझाने की जिम्मेदारी बहू के माता-पिता की है , इसलिए मैं कुछ नी बोल सकता । विवेक दिल का साफ और स्वभाव का गंभीर पर समझदार व्यक्ति था । उसने नेहा के इतने ताने सुनें , फिर भी कभी हाथ तक नहीं उठाया । आस पड़ोस के लोग लगातार नेहा और विवेक की तुलना करते और विवेक को कम आंकते । नेहा तो बहुत सुंदर है , बाल देखो कितने खूबसूरत हैं । बस इसी वजह से नेहा का पारा चढने लगा । कुछ समय बाद नेहा प्रेगनेंट हुई तो , विवेक को हैरानी हुई । फिर भी उसने बच्चे को एक्सेप्ट किया , बगैर नेहा को कुछ कहे । उसने यह बात माता-पिता को नहीं बताई कि , बच्चा किसी और का है । घर में बच्चे का आना और नेहा के सास-ससुर का खुश होना । विवेक के लिए थोड़ा बहुत सुकून मिलने जैसा था । लेकिन नेहा अब भी विवेक से हट कर रहा करती । नेहा तमाम इच्छाएँ बाहर पूरी कर लेती थी , उसके हैंडसम से हैंडसम लड़कों से फेसबुक पर दोस्ती थी । विवेक के माता-पिता अपने नन्हे पोते के साथ व्यस्त हो गए थे । नेहा सबके पीठ पीछे सज धज कर जाती है , उसके बहुत से जवान लड़कों से संबन्ध हैं । मौहल्ले के लड़कों ने उसका नाम माल भाभी रखा है । ग्यारहवीं और दसवीं के बच्चे तक उसका मौहल्ले में निकलने का इंतज़ार करते रहते हैं । विवेक कई बार छुप कर रोता है , और फिर अपने काम में बिज़ी हो जाता है । उसने मुंबई का काम किसी और को सौंप दिया था । स्वयं दिल्ली में अपने बच्चे अर्णव और मम्मी-पापा के साथ रहता है । विवेक की माँ को नेहा की सब खबरें पता हैं । विवेक सोचता है माँ को नेहा के बारे में कुछ पता नहीं , और माँ सोचती है विवेक को पता नहीं । और न कभी अपने बेटे को पता लगने दूंगी । एक दिन विवेक के पापा ने रात को सोने से पहले टीवी बंद करते हुए । अपनी पत्नी से कहा । "बहू का चाल चलितर ठीक नहीं लगता मुझे । " माँ ने तुरंत कहा ____तुम्हें कभी कुछ ठीक लगा है, जो अब लगेगा ?? आँख की दवाई तुमने..... न आज डाली और न कल डाली .... ये लो ____ बेड के सिरहाने से शीशी पकड़ाते हुए विवेक की माँ बोली । फिर एक दूसरे की आँख में नज़र की दवाई डालकर दोनों लेट गए । दवाई के साथ पता ही नहीं चल रहा था, दोनों बुजुर्ग रो रहे हैं य दवाई बह रही है । पिता फफकते हुए बोला_____ साला ये लहसून जैसी दवाई इतनी तीखी है कि, आँसू छूटने लगते हैं । बहू के बारे में आस पड़ोस की औरतों से सुनती है तो , किसी से कुछ नहीं कहती और सीधा गुस्से में आकर विवेक के पिताजी से कहती है " हे ईश्वर हैंय...... बाप रे ! तुमने चौबीस घंटे कान खा लिए , ये टीवी पर न्यूज़ चला- चलाकर । एक घड़ी चुप नी बैठा जाता तुमसे ??? तब कहते हो , आँखे खराब हो गईं । " विवेक के पिता जी भी चिल्लाकर कहते :- " मैं तबसे एक कप चाय के लिए चिल्ला रहा हूँ ..... तुझे सुनाई नहीं देता । और न्यूज़ लगाता हूँ , तो तेरे कान के पर्दे फटते हैं । बनाई तूने चाय ???? " वास्तव में बिचारे दोनों बुजुर्ग एक दूसरे की जान थे । कभी जिंदगी में लड़े नहीं , लेकिन अब आए दिन झगड़ते । क्योंकि उनका बस एक दूसरे पर ही चलता । विवेक को को भी कुछ नहीं कह सकते थे । बहू को कहेंगे तो , आसपास में जाने क्या झूठ बोल दे कि " दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है । " अब आए दिन दोनों बुजुर्ग बहुत ज़ोर ज़ोर की आवाज़ के साथ लड़ते थे । लेकिन दोनों के मन में डर था कि, हमारे कहने से बहू गलत कदम न उठा ले । क्योंकि समझाने की इतनी कोशिश के बाद भी नेहा ज्यों की त्यों थी । पारिवारिक अपराध न पनपे इसलिए किसी एक पक्ष को चुप रहना ही पड़ता है .....ऐसा विवेक सोचता था । साथ ही बुजुर्ग भी अपने मन के डर की वजह से यही सोचते थे, समझदारी इसी में है कि , चुप रहा जाए । कोर्ट-कचहरी तो एक ऐसे साधन और छुटकारे हैं जो सिर्फ नाम के हैं । असली सुधार तो तब है , जब कोई स्वयं को समझाए अपनी गलती को मन में मानकर सही रास्ते पर चले , और सुखद जीवन जिए । अब कोई घर में पूजा नहीं करता , कोई पत्नी य पति की बात नहीं मानता तो क्या कानून के पास उसका वास्तविक समाधान है ???? समाधान तो हमारे पास ही है , लेकिन स्वीकार करेगा कौन ??? उस पर चलेगा कौन ?? यही सोचते हुए , इसी उधेड़बुन में बुजुर्ग फंसे रहते थे । मैं आशा करता हूँ की आपको ये ” Hp Video Status Ki Story” कहानी अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।

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Hindi Info भारत के 5 सबसे अनूठे गांव ये है

ये है भारत के 5 सबसे अनूठे गांव, नंबर 1 में तो है अपना संविधान. नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, आज हम आपको भारत के 5 सबसे अनोखे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपने आप में अलग ही देश-विदेश में पहचान रखते हैं, तो चलिए आज की चर्चा शुरू करते हैं। 5. पिपलांत्री यह भारत का सबसे विकसित गांव के तौर पर जाना जाता है। इस गांव के विकास को डेनमार्क देश की किताबों में भी पढ़ाया जाता है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर लोग इस गांव के बारे में नहीं जानते हैं। यह गांव राजस्थान के उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर है और इस गांव की जनसंख्या करीब 1500 लोगों की है। इस गांव में पानी, पेड़ और बेटी बचाने के लिए देशभर में सबसे शानदार उदाहरण पेश किया है। इस गांव में इजरायल तकनीक पर आधारित कई प्रकार हाईटेक खेती की जाती है। लड़कियों के जन्म पर इस गांव में 111 पेड़ लगाने होते हैं और इनकी शादी का सारा खर्च पूरा गांव मिलकर उठाता है। 4. मावल्यान्नॉंग इस गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव की उपाधि मिली हुई है। यह गांव स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से कई सालों पहले स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है। यह गांव भगवान का बगीचे के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह गांव भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर पर मेघालय राज्य में स्थित है। आपको अपनी जिंदगी में एक बार इस गांव में जरूर जाकर आना चाहिए। 3. कोडिन्ही केरल में स्थित यह गांव जुड़वाँ बच्चों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। आपको यहां पर हर घर में एक जुड़वाँ बच्चा जरूर मिल जाएगा। यहां जुड़वाँ बच्चा पैदा होने की क्या वजह है, अभी तक कोई भी असली कारण नहीं खोज पाया है। आपको यहां पर नवजात शिशु लेकर 60 साल के बुड्ढे तक का डबल रोल मिल जाएगा। यह गांव वाले इन जुड़वाँ बच्चों की वजह से कितने कंफ्यूज होते होंगे यह तो अब बस ऊपरवाला ही जाने। 2. करचोंड आज भी भारत में अंतरजातीय विवाह या फिर शादी से पहले लड़की से मिलने की वजह कितनी ही समस्या और लड़ाई दंगे हो जाते हैं। भारतीय न्यायालय ने हाल ही में लोगों को लव इन रिलेशनशिप में रहने के अधिकार प्रदान किए हैं लेकिन यह गांव इस मामले में हजारों साल पहले से ही आगे हैं। गुजरात के सेलवास से 30 किलोमीटर दूर स्थित 3 हजार आदिवासी लोगों के इस गांव में आप बेरोकटोक किसी भी लड़की के साथ लव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। अक्सर लोगों की गांव के प्रति गलत धारणाएं ही रहती है लेकिन यह गांव शहर से भी आगे है। 1. मलाणा हिमाचल प्रदेश के मनाली शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव अपने आप में कई खूबियों से भरा हुआ है। अगर आपको इस गांव की पहली खूबी बताई जाए तो इस गांव में कनाशी भाषा बोली जाती है जो केवल विश्व में केवल इसी गांव के लोग जानते हैं और यह इसे ना ही किसी बाहरी लोगों को सिखाते हैं। दूसरी बात इस गांव में मलाणा क्रीम मिलती है जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भांग के तौर पर जानी जाती है। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं और यह दुनिया का सबसे पुरानी लोकशाही गांव है। इस गांव में खुद का संविधान और संसद है जिसमें ये निचले सदन को कनिष्थाँग और उच्च सदन को जयेशथाँग कहते है। गांव में साल भर भीड़ रहती है लेकिन यहां के लोग अपने ही मस्ती में रहते हैं। खैर, यह थे भारत के कुछ अनूठे गांव, अगर आपके गांव या आसपास गांव में भी कुछ अनूठी बात है उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Story क्या आपने देखी है रानी की बावड़ी

क्या आपने देखी है रानी की बावड़ी? नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, गुजरात में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटक स्थल हैं, जिसे देखने का मोह लोग छोड़ नहीं पाते। इन्हीं पर्यटक स्थलों में एक बेहद दिलचस्प जगह है, रानी की बावड़ी, जिसे रानी की वाव का नाम भी दिया गया है। इतिहास में पानी के कुंड को बावली कहा जाता था, इसीलिए इसका नाम रानी की बावड़ी रखा गया। सरस्वती नदी के मुहाने पर बसे पाटन में यह खूबसूरत कला का नमूना कई सदियों से खड़ा हुआ है। गुजरात के पाटन को इतिहास में अन्हिलपुर के नाम से जाना जाता था जो गुजरात की राजधानी हुआ करती थी। यही मौजूद है वास्तुकला और ऐतिहासिक सुंदरता का खूबसूरत नमूना। आइये जानते हैं इस बावड़ी के बारे में दिलचस्प बातें। क्यों कहा जाता है इसे रानी की बावड़ी? यह बावड़ी बेहद अलग और अद्वितीय है जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत में कई ऐतिहासिक स्थल पुराने राजाओं द्वारा बनवाए गए हैं। असल में रानी की बावड़ी सोलंकी राज के राजा भीमदेव की पहली पत्नी रानी उदयामति ने सन 1063 में बनवाई थी। यह बावड़ी बेहद अलग और अद्वितीय है। क्योंकि इसका निर्माण रानी ने करवाया था, इसीलिए इसे रानी की बावड़ी का नाम दिया गया है। आम तौर पर बावड़ियां एक ही तरह से बनाई जाती है, लेकिन इस कुंड को मंदिर का रूप दिया गया, जिसमें सात अलग-अलग मंज़िलें बनी हुई है। इसके चारों ओर खूबसूरत नक्काशी और पौराणिक और धार्मिक चित्रों को उकेरा गया है। इन शैलियों में सोलंकी वंश की कला को दर्शाया गया है, जो दिखने में बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। लंबी लंबी सीढ़ियां और बीच में पानी का कुंड बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। चमत्कारी पानी की बावड़ी सुरंग के साथ बावड़ी आपको जानकर हैरानी होगी कि हर ऐतिहासिक स्मारक का एक रहस्य भी होता है। ऐसा ही रानी की वाव के साथ भी है। इसकी अंतिम सीढ़ी पर बना हुआ है एक ख़ास दरवाज़ा, जहां से 30 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है, जो यहां से सीधी सिद्धपुर गांव में जाकर खुलती है। यह गांव पाटन के पास ही बसा हुआ है। इस पानी को पीने से मौसमी बुखार और कई बीमारियां ठीक हो जाया करती थी उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Info अकबर की मृत्यु के बाद अकबर के शव के साथ ऐसा किया

अकबर की मृत्यु के बाद अकबर के शव के साथ ऐसा किया गया जिसे आप नही जानते, जानकर होगी हैरानी नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, दोस्तों राजा अकबर को भारतीय इतिहास का एक महान राजा माना जाता है राजा अकबर ने अपने शासनकाल में काफी ज्यादा सामाजिक कार्य किया था जिसके कारण राजा अकबर को एक अच्छा शासक माना जाता है राजा अकबर के शासन काल में प्रजा काफी ज्यादा सुखी हुआ करती थी। अकबर ने अपने शासनकाल में सभी धर्मों का सम्मान किया था इसके अलावा अकबर के शासनकाल में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता था। अकबर ने अपने शासनकाल में कई बड़े-बड़े कार्य करवाए थे। अकबर के शासनकाल में भारत ने काफी ज्यादा तरक्की की थी लेकिन दोस्तों क्या आप लोगों को मालूम है कि जब राजा अकबर इतना बड़ा महान व्यक्ति था तो उसकी जब मृत्यु हुई तब उसके सब को राजकीय सम्मान के साथ क्यों नहीं जलाया गया। आज हम आप लोगों को बताने वाले हैं कि आखिर राजा अकबर की मृत्यु के बाद उसके शव के साथ क्या किया गया था। दोस्तों जब राजा अकबर की मृत्यु हुई थी उनके शव को बिना किसी राजकीय सम्मान और बिना अंतिम संस्कार के दुर्ग के पीछे दीवार तोड़कर सिकंदरा में दफना दिया। इसका कारण यह था कि उस समय अफगान के लोग मुगल साम्राज्य पर हावी हो रहे थे जिसके कारण मुगल साम्राज्य के लोग चाहते थे कि राजा अकबर की मृत्यु के बारे में अफगान लोगों को मालूम ना हो। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Real Hindi Stories प्यार या संस्कार

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, अदिति ने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु महानगर के एक नामीगिरमी कालेज में मैनेजमैंट कोर्स में ऐडमिशन लिया तो मानो उस के सपनों को पंख लग गए. उस के जीवन की सोच से ले कर संस्कार तथा सपनो से ले कर लाइफस्टाइल सभी तेजी से बदल गए. अदिति के जीवन में कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीकठाक चलता रहा, लेकिन अचानक उस के जीवन में उस के ही कालेज के एक छात्र प्रतीक की दस्तक के कारण जो मोड़ आया वह उस पहले प्यार के बवंडर से खुद को सुरक्षित नहीं रख पाई. अदिति बहुत जल्दी प्रतीक के प्यार के मोहपाश में इस तरह जकड़ गई मानो वह पहले कभी उस से अलग और अनजान नहीं थी. जवानी की दहलीज पर पहले प्यार की अनूठी कशिश में अदिति अपने जीवन के बीते दिनों तथा परिवार की चाहतों को पूरी तरह से विस्मृत कर चुकी थी. प्रतीक के प्यार में सुधबुध खो बैठी अदिति अपने सब से खूबसूरत ख्वाब के जिस रास्ते पर चल पड़ी वहां से पीछे मुड़ने का कोईर् रास्ता न तो उसे सूझा और न ही वह उस के लिए तैयार थी. गरमी की छुट्टी में जब अदिति अपने घर वापस आई तो उस के बदले हावभाव देख कर उस की अनुभवी मां को बेटी के बहके पांवों की चाल समझते देर नहीं लगी. जल्दी ही छिपे प्यार की कहानी किसी आईने की तरह बिलकुल साफ हो गई और मां को पहली बार अपनी गुडि़या सरीखी मासूम बेटी अचानक ही बहुत बड़ी लगने लगी. अदिति ने अपनी मां से प्रतीक से शादी के लिए शुरू में तो काफी विनती की, लेकिन मां के इनकार को देखते हुए वह जिद पर अड़ गई. अदिति के पिता तो उसी वक्त गुजर गए थे जब अदिति ठीक से चलना भी नहीं सीख पाई थी. मां और बेटी के अलावा उस छोटे से संसार में प्रतीक के प्रवेश की तैयारी के लिए एक बड़ा द्वंद्व और दुविधा का जो माहौल तैयार हो गया था वह सब के लिए दुखदायी था, जिस की मद्घिम लौ में मां को अपनी बेटी के चिरपोषित सपनों की दुनिया जल जाने का मंजर साफ नजर आ रहा था. ‘‘मां, तुम समझती क्यों नहीं हो? मैं प्रतीक से सच्चा प्यार करती हूं. वह ऐसावैसा लड़का नहीं है. वह अच्छे घर से है और निहायत शरीफ है. क्या बुरा है, यदि मैं उस से शादी करना चाहती हूं,’’ अदिति ने बड़े साफ लहजे में अपनी मां को अपने विचारों से अवगत कराया. मां अपनी बेटी के इस कठोर निर्णय से काफी आहत हुईं लेकिन खुद को संयमित करते हुए अदिति को अपने सांस्कारिक मूल्यों तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों का एहसास कराने की काफी कोशिश करती हुई बोलीं, ‘‘बेटी, मैं सबकुछ समझती हूं, लेकिन अपने भी कुछ संस्कार होते हैं. तुम्हारे पापा ने तुम्हारे लिए क्या सपने संजो रखे थे लेकिन तुम उन सपनों का इतनी जल्दी गला घोंट दोगी, इस बारे में तो मैं ने सपने में भी नहीं सोचा था. अपनी जिद छोड़ो और अभी अपने भविष्य को संवारो. प्यार मुहब्बत और शादी के लिए अभी बहुत वक्त पड़ा है.’’ ‘‘मां, आप समझती नहीं हैं, प्यार संस्कार नहीं देखता, यह तो जीवन में देखे गए सपनों का प्रश्न होता है. मैं ने प्रतीक के साथ जीवन के न जाने कितने खूबसूरत सपने देखे हैं, लेकिन मैं यह भूल गई थी कि मेरे इंद्रधनुषी सपनों के पंख इतनी बेरहमी से कुतर दिए जाएंगे. आखिर, तुम्हें मेरे सपनों के टूटने से क्या?’’ ‘‘बेटी, सच पूछो तो प्रतीक के साथ तुम्हारा प्यार केवल तुम्हारे जीवन के लिए नहीं है. जीवन के रंगीन सपनों के दिलकश पंख पर बेतहाशा उड़ने की जिद में अपनों को लगे जख्म और दर्द के बारे में क्या तुम ने कभी सोचा है? प्यार का नाम केवल अपने सपनों को साकार होते देखनाभर नहीं है. वह सपना सपना ही क्या जो अपनों के दर्द की दास्तान की सीढ़ी पर चढ़ कर साकार किया गया हो. ‘‘आज तुम्हें मेरी बातें बचकानी लगती होंगी, लेकिन मेरी मानो जब कल तुम भी मेरी जगह पर आओगी और तुम्हारे अपने ही इस तरह की नासमझी की बातों को मनवाने के लिए तुम से जिद करेंगे तो तुम्हें पता चलेगा कि दिल में कितनी पीड़ा होती है. मन में अपनों द्वारा दिए गए क्लेश का शूल कितना चुभता है.’’ अदिति अपनी मां के मुंह से इस कड़वी सचाई को सुन कर थोड़ी देर के लिए सन्न रह गई. उसे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे किसी ने उस की दुखती रग पर अनजाने ही हाथ रख दिया हो. उस के जेहन में अनायास ही बचपन से ले कर अब तक अपनी मां द्वारा उस के लालनपालन के साथसाथ पढ़ाई के खर्चे के लिए संघर्ष करने की कहानी का हर दृश्य किसी सिनेमा की रील की भांति दौड़ता चला गया. अनायास ही उस की आंखें भर आईं. मन पर भ्रम और दुविधा की लंबे अरसे से पड़ी धूल की परत साफ हो चुकी थी और सबकुछ किसी शीशे की तरह साफसाफ प्रतीत होने लगा था. लेकिन बीते हुए कल के उस दर्र्द के आंसू को अपनी मां से छिपाते हुए वह भाग कर अपने कमरे में चली गई. अपनी मां की दिल को छू लेने वाली बातों ने अदिति को मानो एक गहरी नींद से जगा दिया हो. छुट्टियों के बाद अदिति अपने कालेज वापस आ गई और जीवन फिर परिवर्तन के एक नए दौर से गुजरने लगा. कालेज वापस लौटने के बाद अदिति गुमसुम रहने लगी. प्रतीक से भी वह कम ही बातें करती थी, बल्कि उस ने उसे शादी के बारे में अपनी मां की मरजी से भी अवगत करा दिया और इस तरह मंजिल तक पहुंचने से पहले ही दोनों की राहें अलग अलग हो गईं. कालेज के अंतिम वर्ष में कैंपस सिलैक्शन में प्रतीक को किसी मल्टीनैशनल कंपनी में ट्रेनी मैनेजर के रूप में यूरोप का असाइनमैंट मिला और अदिति ने किसी दूसरी मल्टीनैशनल कंपनी में क्वालिटी कंट्रोल ऐग्जीक्यूटिव के रूप में अपनी प्लेसमैंट की जगह बेंगलुरु को ही चुन लिया. अदिति अपनी मां के साथ इस मैट्रोपोलिटन सिटी में रह कर जीवन गुजारने लगी. सबकुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी बीच कंपनी ने अदिति को 1 वर्ष के फौरेन असाइनमैंट पर आस्ट्रेलिया भेजने का निर्णय लिया. अदिति अपनी मां के साथ जब आस्टे्रलिया के सिडनी शहर आई तो संयोग से वहीं पर एक दिन किसी शौपिंग मौल में उस की प्रतीक से मुलाकात हो गई. अदिति के लिए यह एक सुखद लमहा था, जिस की नरम कशिश में वर्षों पूर्व के संबंधों की यादें बड़ी तेजी से ताजी हो गईं. लेकिन भविष्य में इस संबंध के मुकम्मल न होने के भय ने उस के पैर वापस खींच लिए. प्रतीक अपने क्वार्टर में अकेला रहता था और अकसर हर रोज शाम के वक्त वह अदिति के घर पर आ जाया करता था. मां को भी अपने घर में अपने देश के एक परिचित के रूप में प्रतीक का आना जाना अच्छा लगता था, क्योंकि परदेश में उस के अलावा सुख दुख बांटने वाला और कोई भी तो नहीं था. अचानक एक दिन औफिस से घर लौटते वक्त अदिति की औफिस कार की किसी प्राइवेट कार के साथ टक्कर हो गई और अदिति को सिर में काफी चोट आई. महीनेभर तक अदिति हौस्पिटल में ऐडमिट रही और इस दौरान उस का और उस की मां का ध्यान रखने वाला प्रतीक के अलावा और कोई नहीं था. प्रतीक ने मुसीबत की इस घड़ी में अदिति और उस की मां का भरपूर ध्यान रखा और इसी बीच अदिति और प्रतीक फिर से कब एकदूसरे के इतने करीब आ गए कि उन्हें इस का पता ही नहीं चला. अदिति का यूरोप असाइनमैंट खत्म होने वाला था और उसे अब अपने देश वापस आना था. अदिति और उस की मां को छोड़ने के लिए प्रतीक भी बेंगलुरु आया था. प्रतीक के सेवाभाव से अदिति की मां अभिभूत हो गई थीं. प्रतीक सिडनी वापस जाने की पूर्व संध्या पर अपने मम्मीडैडी के साथ अदिति से मुलाकात करने आया था. अदिति का व्यवहार तथा शालीनता देख कर प्रतीक के पेरैंट्स काफी खुश हुए. प्रतीक की अगले दिन फ्लाइट थी. एयरपोर्ट पर बोर्डिंग के समय जब अदिति का फोन आया तो उस के दिलोदिमाग में एक अजीब हलचल मच गई. पुराने प्यार की सुखद और नरम बयार में प्रतीक के मन का कोनाकोना सिहर उठा. प्रतीक ने अपनी फ्लाइट कैंसिल करवा ली. उस ने अपनी कंपनी को बेंगलुरु में ही उसे शिफ्ट करने के लिए रिक्वैस्ट भेज दी जो कुछ दिनों में अपू्रव भी हो गई. अदिति की मां प्रतीक के इस फैसले से काफी प्रभावित हुईं. अदिति हमेशा के लिए अब प्रतीक की हो गई थी और वह मां के साथ ही बेंगलुरु में रहने लगी थी. प्रतीक अपनी खुली आंखों से अपने सपने को अपनी बांहों में पा कर खुशी से फूले नहीं समा रहा था. अदिति के पांव भी जमीं पर नहीं पड़ रहे थे. उसे आज जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि धरती की तरह सपनों की दुनिया भी गोल होती है और सितारे भले ही टूटते हों, लेकिन यदि विश्वास मजबूत हो तो सपने कभी नहीं टूटते. उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Real Stories भोले भक्त की भक्ति

एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था। एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम में आया और बोला कि बाबा आप सब का ध्यान रखते है, मेरा इस दुनिया मेँ कोई नही है तो क्या मैँ यहाँ आपके आश्रम में रह सकता हूँ ? बालक की बात सुनकर संत बोले बेटा तेरा नाम क्या है ? उस बालक ने कहा मेरा कोई नाम नहीँ हैँ। तब संत ने उस बालक का नाम रामदास रखा और बोले की अब तुम यहीँ आश्रम मेँ रहना। रामदास वही रहने लगा और आश्रम के सारे काम भी करने लगा। उन संत की आयु 80 वर्ष की हो चुकी थी। एक दिन वो अपने शिष्यो से बोले की मुझे तीर्थ यात्रा पर जाना हैँ तुम मेँ से कौन कौन मेरे मेरे साथ चलेगा और कौन कौन आश्रम मेँ रुकेगा ? संत की बात सुनकर सारे शिष्य बोले की हम आपके साथ चलेंगे.! क्योँकि उनको पता था की यहाँ आश्रम मेँ रुकेंगे तो सारा काम करना पड़ेगा इसलिये सभी बोले की हम तो आपके साथ तीर्थ यात्रा पर चलेंगे। अब संत सोच मेँ पड़ गये की किसे साथ ले जाये और किसे नहीँ क्योँकि आश्रम पर किसी का रुकना भी जरुरी था। बालक रामदास संत के पास आया और बोला बाबा अगर आपको ठीक लगे तो मैँ यहीँ आश्रम पर रुक जाता हूँ। संत ने कहा ठीक हैँ पर तुझे काम करना पड़ेगा आश्रम की साफ सफाई मे भले ही कमी रह जाये पर ठाकुर जी की सेवा मे कोई कमी मत रखना। रामदास ने संत से कहा की बाबा मुझे तो ठाकुर जी की सेवा करनी नहीँ आती आप बता दिजिये के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है ? फिर मैँ कर दूंगा। संत रामदास को अपने साथ मंदिर ले गये वहाँ उस मंदिर मे राम दरबार की झाँकी थी। श्रीराम जी, सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी थे. संत ने बालक रामदास को ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है सब सिखा दिया। रामदास ने गुरु जी से कहा की बाबा मेरा इनसे रिश्ता क्या होगा ये भी बता दो क्योँकि अगर रिश्ता पता चल जाये तो सेवा करने मेँ आनंद आयेगा। उन संत ने बालक रामदास कहा की तू कहता था ना की मेरा कोई नहीँ हैँ तो आज से ये राम जी और सीता जी तेरे माता-पिता हैँ। रामदास ने साथ मेँ खड़े लक्ष्मण जी को देखकर कहा अच्छा बाबा और ये जो पास मेँ खड़े है वो कौन है ? संत ने कहा ये तेरे चाचा जी है और हनुमान जी के लिये कहा की ये तेरे बड़े भैय्या है। रामदास सब समझ गया और फिर उनकी सेवा करने लगा। संत शिष्योँ के साथ यात्रा पर चले गये। आज सेवा का पहला दिन था, रामदास ने सुबह उठकर स्नान किया ,आश्रम की साफ़ सफाई की,और भिक्षा माँगकर लाया और फिर भोजन तैयार किया फिर भगवान को भोग लगाने के लिये मंदिर आया। रामदास ने श्री राम सीता लक्ष्मण और हनुमान जी आगे एक-एक थाली रख दी और बोला अब पहले आप खाओ फिर मैँ भी खाऊँगा। रामदास को लगा की सच मेँ भगवान बैठकर खायेंगे. पर बहुत देर हो गई रोटी तो वैसी की वैसी थी। तब बालक रामदास ने सोचा नया नया रिश्ता बना हैँ तो शरमा रहेँ होँगे। रामदास ने पर्दा लगा दिया बाद मेँ खोलकर देखा तब भी खाना वैसे का वैसा पडा था। अब तो रामदास रोने लगा की मुझसे सेवा मे कोई गलती हो गई इसलिये खाना नहीँ खा रहेँ हैँ ! और ये नहीँ खायेंगे तो मैँ भी नहीँ खाऊँगा और मैँ भूख से मर जाऊँगा..! इसलिये मैँ तो अब पहाड़ से कूदकर ही मर जाऊँगा। रामदास मरने के लिये निकल जाता है तब भगवान राम जी हनुमान जी को कहते हैँ हनुमान जाओ उस बालक को लेकर आओ और बालक से कहो की हम खाना खाने के लिये तैयार हैँ। हनुमान जी जाते हैँ और रामदास कूदने ही वाला होता हैँ की हनुमान जी पीछे से पकड़ लेते हैँ और बोलते हैँ क्याँ कर रहे हो? रामदास कहता हैँ आप कौन ? हनुमान जी कहते है मैँ तेरा भैय्या हूँ इतनी जल्दी भूल गये ? रामदास कहता है अब आये हो इतनी देर से वहा बोल रहा था की खाना खा लो तब आये नहीँ अब क्योँ आ गये ? तब हनुमान जी बोले पिता श्री का आदेश हैँ अब हम सब साथ बैठकर खाना खायेँगे। फिर राम जी, सीता जी, लक्ष्मण जी , हनुमान जी साक्षात बैठकर भोजन करते हैँ। इसी तरह रामदास रोज उनकी सेवा करता और भोजन करता। सेवा करते 15 दिन हो गये एक दिन रामदास ने सोचा घर मैँ ५ लोग हैं,सारा काम में ही अकेला करता हुँ ,बाकी लोग तो दिन भर घर में आराम करते है.मेरे माँ, बाप ,चाचा ,भाई तो कोई काम नहीँ करते सारे दिन खाते रहते हैँ. मैँ ऐसा नहीँ चलने दूँगा। रामदास मंदिर जाता हैँ ओर कहता हैँ पिता जी कुछ बात करनी हैँ आपसे।राम जी कहते हैँ बोल बेटा क्या बात हैँ ? रामदास कहता हैँ की घर में मैं सबसे छोटा हुँ ,और मैं ही सब काम करता हुँ।अब से मैँ अकेले काम नहीँ करुंगा आप सबको भी काम करना पड़ेगा,आप तो बस सारा दिन खाते रहते हो और मैँ काम करता रहता हूँ अब से ऐसा नहीँ होगा। राम जी कहते हैँ तो फिर बताओ बेटा हमेँ क्या काम करना है?रामदास ने कहा माता जी (सीताजी) अब से रसोई आपके हवाले. और चाचा जी (लक्ष्मणजी) आप घर की साफ़ सफाई करियेगा. भैय्या जी (हनुमान जी)शरीर से मज़बूत हैं ,जाकर जंगल से लकड़ियाँ लाइयेंगे. पिता जी (रामजी) आप बाज़ार से राशन लाइए और घर पर बैठकर पत्तल बनाओँगे। सबने कहा ठीक हैँ।मैंने बहुत दिन अकेले सब काम किया अब मैं आराम करूँगा. अब सभी साथ मिलकर काम करते हुऐँ एक परिवार की तरह सब साथ रहने लगेँ। एक दिन वो संत तीर्थ यात्रा से लौटे तो देखा आश्रम तो शीशे जैसा चमक रहा है, वो बहुत प्रसन्न हुए.मंदिर मेँ गये और देखा की मंदिर से प्रतिमाऐँ गायब हैँ. संत ने सोचा कहीँ रामदास ने प्रतिमा बेच तो नहीँ दी ? संत ने रामदास को बुलाया और पूछा भगवान कहा गये रामदास भी अकड़कर बोला की मुझे क्या पता हनुमान भैया जंगल लकड़ी लाने गए होंगे,लखन चाचा झाड़ू पोछा कर रहे होंगे,पिताजी राम पत्तल बन रहे होंगे माता सीता रसोई मेँ काम कर रही होंगी. संत बोले ये क्या बोल रहा ? रामदास ने कहा बाबा मैँ सच बोल रहा हूँ जब से आप गये हैँ ये चारोँ काम मेँ लगे हुऐँ हैँ। वो संत भागकर रसोई मेँ गये और सिर्फ एक झलक देखी की सीता जी भोजन बना रही हैँ राम जी पत्तल बना रहे है और फिर वो गायब हो गये और मंदिर मेँ विराजमान हो गये। संत रामदास के पास गये और बोले आज तुमने मुझे मेरे ठाकुर का दर्शन कराया तू धन्य हैँ। और संत ने रो रो कर रामदास के पैर पकड़ लिये…! रामदास जैसे भोले,निश्छल भक्तो की भक्ति से विवश होकर भगवान को भी साधारण मनुष्य की तरह जीवन व्यतीत करने आना पड़ता है. जय श्री राम उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.