मन का डर - रोमांचक कहानी - Stories - Story

मन क

महिला का प्रत्येक अंग उसके सौंदर्य का बोध कराता है । यह और बात है हम भले ही कुछ चीज़ों को बाहरी मन से नकार दें । अरे रूप का क्या है ? गुण विचार अच्छे होने चाहिए । यह भी बात सही है, लेकिन रूप की भी अपनी अलग जगह है । वास्तविकता यह है कि, प्रत्येक महिला य पुरूष स्वयं को अच्छा देखना चाहते हैं । हम अपने चेहरे बालों इत्यादि को सुंदर रखना चाहते हैं । पुरूषों के बाल उतरने लगें , तो फिर भी इतना प्रभाव नहीं पड़ता । सोचिए यदि महिला गंजी और सपाट हो जाए तो , क्या उसे इसका आघात नहीं होगा ? .... " क्यों नहीं ज़रूर होगा " और ये उसके जीवन पर प्रभाव अवश्य डालेगा । लेकिन यदि किसी कारणवश कुछ कमी रह जाए तो हमें समझदार होना चाहिए और हीन भावना को तत्काल त्यागना चाहिए । क्योंकि हीन भावना हमारे मस्तिष्क का विकास रोक देती है । आप सोचने लगो कि , मेरा दाँत टेढ़ा है .... नाक पर तिल है... मेरे बाल उसकी तरह घने क्यों नहीं हैं ?..... मैं सांवली हूँ दूसरे गोरे हैं । यदि उपाय संभव नहीं है तो , आप हीन भावना पालकर अपना जीवन नष्ट न करें । जो कुछ है स्वीकार करें , और चरित्र निर्माण एवं विकास करें । नेहा इतनी खूबसूरत कि , देखने वाले की आँखें कभी थके ही नहीं । कंधे पर फैले काले घने बाल , कमर तक पहुंचे रहते । पूरा काॅलेज नेहा के काले घने बालों की तारीफ करते थकता नहीं था । गोरे चेहरे पर काली गोल आँखें बालों के साथ ऐसा सौंदर्य और रूप का निर्माण करती थी , संन्यासी भी अपना तप छोड़ कर उसके सौंदर्य का गान करने लगे । नेहा पर बहुत से लड़के जान छिड़कते थे , मन ही मन पसंद करते थे । कुछ ही दिन पहले उसे विवेक ने प्रपोज किया .... विवेक ने जीवन भर साथ निभाने का वादा भी किया लेकिन नेहा ने साफ मना कर दिया । " आइन्दा से ये सब करने की कोशिश मत करना विवेक । मुझे यह सब पसंद नहीं ... और वैसे भी मैं ब्राह्मण परिवार से हूँ , आपके साथ तो रिश्ता सपने में भी नहीं हो सकता । " विवेक ने ढेर सारी बातें और वादों की पोटली नेहा के सामने खोली ...... पर कुछ भी हल नहीं निकला । विवेक के दोस्तों ने भी कहा " अरे भाइ ! वो एक घमंडी किस्म की लड़की है , तेवर देखे उसके कभी ... मुझे तो लगता जहाँ घर बसेगा सबको बेच खाएगी । " विवेक की दोस्त ज्योती बोली " एटिट्यूड देखा उसमें कितना है ?? छोड़ न ....भाड़ में जाए , ऐसी लड़की " विवेक ज्योती की बात पर बोला " सबसे पहली बात तो यह है कि, एटिट्यूड शब्द का सही जगह पर उपयोग करना सीखो । एटिट्यूड का मतलब घमंड य गुस्सैल नहीं होता । तुम लोगों ने आजकल ""एटिट्यूड"" शब्द के मायने ही बदल दिए.... उसका एटिट्यूड , माइ एटिट्यूड, वगैरह-वगैरह । एटिट्यूड का अर्थ दृष्टिकोण होता है समझे । "___ विवेक बात पलटकर सही बात तो कर रहा था, लेकिन अभी भी नेहा के ख्याल उसका पीछा नहीं छोड़ रहे थे । नेहा काॅलेज से थकी आई , फिर घर के काम में लग गई शाम को कोचिंग गई .... और खाना खाकर रोजमर्रा की तरह अपने बैडरूम में चली गई । नेहा काॅलेज गई तो , देखा सब हंस रहे थे । उसके साथ की मानसी , अवंतिका , मोनिका सबने आश्चर्यचकित होकर पूछा क्या हुआ ये ? ? नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया, बस चुपचाप रही । नेहा ने दुःख भरे स्वर में सिर्फ इतना ही कहा " छोड़ो यार कुछ नहीं " नेहा के सिर पर एक भी बाल नहीं था , अब उसके चेहरे पर काली आँखें भद्दी लग रही थीं । नेहा को देखते ही क्लास के बच्चे हंसी रोक-रोक कर नेहा पर हंसते जा रहे थे । नेहा जब भी अकेले में होती उसके आँसू अपने-आप ही बहने लगते । नए नए डाक्टरों के पास हफ्तेभर चक्कर लगते रहते । उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, उसने बाज़ार से नकली बालों की विग ली लेकिन नकली तो नकली चीज़ होती है । आईने के सामने बैठती और बाल बनाने का मन होता तो चेहरा मुरझा कर सिकुड़ जाता । उसने देखा कि , फेसबुक और ह्वाॅटसएप पर नेहा की फोटो घूम रही है । बिल्कुल बदसूरत और गंजी , बगैर बालों के कितना खराब लग रही है । नेहा स्वयं ही सोचकर कुढ़ने लगी थी । नेहा का स्वभाव ऐसा हो गया था कि , वह छोटी-छोटी बातों में गुस्सा करती और खीझ करती । नेहा नहाते समय शीशे पर नज़र डालती तो.... मन होता कि , शीशा तोड़कर उसके काँच टुकड़े अपने बदन में दाखिल कर दे और छिन्न-भिन्न कर दे इस बदसूरत चेहरे को । नेहा ने एक बार फेसबुक पर एक ख़बर पढ़ी थी " साँवला होने से परेशान होकर एक युवती ने फाँसी के फंदे से मौत को लगाया गले " नेहा ने उस ख़बर को पढ़ने के बाद सहेलियों से चर्चा में कहा था " इन सब छोटी-छोटी चीज़ों से परेशान होकर आत्महत्या करना तो कायरों का काम है । और मरने के बाद कौन सा साँवलापन दूर हो जाएगा ? ? " उसने एक ख़बर ऐसी भी देखी थी जिसमें एक युवक ने अपने हाथ की नस काट ली थी क्योंकि उसके पूरे बाल झड़ने के कारण सिर सपाट हो गया था । इलाज के लिए पैसे नहीं थे और बगैर बालों के कोई भी शादी करने को तैयार न था । नेहा ने इस पर भी कहा था कि, " ऐसा नहीं करना चाहिए । आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता । " लेकिन आज खुद नेहा का मन काबू में नहीं था । उसने गुस्से में अपने शरीर पर नाखून चलाने शुरू कर दिए । उसने देखा कि, नाखून लगने से दोनों ओर छातियों पर लाल निशान पड़ गए हैं । नेहा के लिए आए हुए शादी के कई रिश्तों ने मना कर दिया । जीवन के लिए अब जीवनसाथ की इच्छा बढ़ने लगी थी । एक समय था , जब नेहा सोचती थी उसे शादी की इतनी जल्दी नहीं है । लेकिन अब अकेले समय काटना एक-एक पल भी बहुत भारी लग रहा था । नेहा ने इधर-उधर निकलना भी कम कर दिया था । न जाने क्यों उसे अचानक विवेक की याद आई , जिसका प्रेम प्रस्ताव उसने चेतावनी देकर ठुकरा दिया था । नेहा हमेशा सोचती रहती थी .... किसी ऊंची हैसियत और अपने ही जैसे घने काले बाल वाले लड़के से शादी करूंगी भले ही अरेंज मैरिज क्यों न हो । घरवालों ने लड़का ढूंढा तो अच्छा ही ढूंढेंगे न .... । उसने अपनी कुछ सहेलियों के पति को देखा था जो अमीर तो थे ..... लेकिन उनकी खोपड़ी से बाल नदारद थे । इसलिए नेहा बार बार बालों के बारे में सोचती रहती थी । लेकिन अब तो नेहा को वह भी नसीब में नहीं लग रहा था । उसने कहीं से विवेक का नंबर मंगवाकर उसे फोन किया । पहले तो विवेक ने बहाने बनाए लेकिन फिर आ ही गया । नेहा ने विवेक को उसका ठुकराया प्रपोजल याद दिलाया ..... और माफी मांगी । " विवेक माफ कर दो यार , लेकिन मैं सरस्वती माता की कसम खाकर कहती हूँ ... मैं तुमसे तुरंत शादी करने को तैयार हूँ । विवेक प्लीज़ यार..... तुम बहुत अच्छे लड़के हो । मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती । " नेहा ने देखा कि, धीरे-धीरे विवेक के चेहरे पर मुस्कुराहट फैल रही है .... और यकायक विवेक हाहहह--खीखीखी-हीहहह ..... नेहा का मज़ाक उड़ाते हुए हंसने लगा । नेहा के चेहरे पर आँसू उतर आए , नेहा तेज़ी से पैर पटकर आगे बढ़ी । चलते-चलते घर पहुंच कर गुस्से में सिर से नकली बाल फेंके और आईने के सामने रोने लगी । "लड़के बहुत मतलबी और दुष्ट होते हैं , मक्कार होते हैं " यह सब कहते हुए उसने दुपट्टा निकाला और पंखे पर लटक गई । नेहा इस तरह से लटक गई कि , बचने के लिए छटपटाने लगी । नेहा के हाथ पैर चलने लगे , मुँह से मम्मी - पापा की आवाज़ निकलने लगी । नेहा उठी और देखा कि , आसपास किताबें बिखरी हैं । स्वयं बिस्तर पर अस्तव्यस्त होकर लेटी है.... और घर के सभी सदस्य नेहा को ऊपर से घूर रहे हैं । मम्मी खड़ी है , हाथ में चाय का कप लेकर ..... पापा भी पास में खड़े हैं । सभी ये सोचकर आए कि , ये चिल्ला क्यों रही है ? रोहन बोला " क्या हुआ रे मोटी ??? कौनसा वाला सपना देखा आज ??? हाहहहहाहहह " ये छोकरी रोज सपने में चिल्लाती है "__ मम्मी बोली "क्या हुआ ? बेटा नेहा ..... सब ठीक है ?"__ पापा बोले " मोटी की शादी हो जाएगी तो , वहाँ अपने ससुराल वालों को डराना..... हाहहहहह "___ नेहा का भाइ रोहन बोला । तीनों इधर-उधर चले गए , मम्मी चाय का कप टेबल पर रख चुकी थी । नेहा उठी और उसने आईने के सामने बैठकर अपने मुलायम बाल बांधे ..... फिर चाय पीते हुए सोचने लगी । दिन भर काॅलेज की थकान ..... फिर कोचिंग ..... फिर खाना खाया...... फिर अवंतिका से फोन पर चैटिंग की ..... फिर लेटते हुए एक बजे तक नोवेल पढ़ी और फिर कब नींद आ गई पता ही नहीं चला । लेकिन रात का सपना सचमुच कितना डरावना था । हे ! भगवान् ऐसा कभी न हो । नहाते समय नेहा के बाल गिरते तो , उसे बहुत चिंता होती थी । नेहा को सपने के कारण मन का डर और भी गहरा होता गया । फिर भी सोचती " छोड़ो सपना ही तो था । " उसने काॅलेज अवंतिका से लंबे सपने वाली बात बताई तो , पहले उसकी सहेलियाँ हंसने लगीं । फिर अवंतिका ने गंभीर होकर कहा " देख, , नेहा .... ! सपने ज़्यादा लंबे नहीं आते , लगभग पच्चीस - तीस सेकंड के आते हैं । और हमें लगता है कि, जैसे हम रात भर सपने देख रहे थे । कभी कोई पैर खींच रहा है ..... कभी धड़ड़ड़ड़ाम्म गिर गए....कभी दांत उखड़ गए, कभी कोई पीछे भाग रहा है ..... कभी झूले से घिर गए । मानसी बीच में ही बोली__ " और कभी-कभी नेहा की तरह गंजे हो गए .... हाहहहहह " फिर अवंतिका ने अपनी बात शुरू की " देख नेहा... कोई कितनी देर तक सोता है, इस संबंध में किसी प्रकार का सुनिश्चित और सख्ती से पालन किया जाने वाला नियम तो नहीं है । फिर भी औसतन एक वयस्क व्यक्ति ७ से ९ घंटे सोता है। वहीं नवजात शिशु २० घंटे, ४ वर्ष का बालक १२ घंटे, १० वर्ष का बालक १० घंटे । बुजुर्ग व्यक्ति को ६ से ७ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन बुजुर्गों को नींद कम आती है , इसीलिए वो जल्दी उठ जाते हैं.... सुबह-सुबह । रही बात सपनों की ,, वह थकान य ज़्यादा सोचने के कारण भी आते हैं । क्योंकि अगर तुम बार-बार एक ही जैसी बातें सोचते हो तो , सपने भी वैसे ही आते हैं । ब्वाॅइज को नाइट फाॅल होना इत्यादि उस तरह के सोचने के लक्षण हैं । और यह कोई बीमारी य कोई खास समस्या नहीं है । लेकिन बहुत ज़्यादा एक ही जैसी चीज़ सोचना अवसाद को जन्म दे सकती है । इसलिए बी कूल हैप्पी । सोने से पहले एक गिलास ठंडा पानी ज़रूर पीना चाहिए । मोनिका बीच में ही बोली___ " तेरी शादी की बात चल री बल हैंय ? ? कख रैंदु ली तेरू जवैंइ ??? " यार तू गढ़वाली में मत बोला कर । मुझे ज़्यादा समझ नहीं आती ____ नेहा बोली । सभी सहेलियाँ हंसने लगीं । फिर नेहा ने अपनी बात पूरी की पापा ने बताया कि , मुंबई में मेकअप आर्टिस्ट की कंपनी चलाता है "विल्सन मेकअप कंपनी" महीने के तीस हज़ार रूपए कमाता है । पापा के जानने वाले हैं न.... विनय शर्मा अंकल उन्होंने करवाया ये रिश्ता । अवंतिका :- क्या नाम है लड़के का ? नेहा :- हाहह छोड़ यार नाम-वाम मोनिका :- अरे ! ... शरमा रही है जैसे ... मानसी :- बोल न यार .... नेहा ने मोबाइल फोन निकाला और फोटो दिखाई । विवेक नाम है । अवंतिका बात काटते हुए बोली " लगता है , विवेक नाम के लड़के तुझ पर कुछ ज़्यादा ही लट्टू हो गए हैं । हैंडसम यार .... " मानसी :- बहुत सही यार .... मिली भी अभी तक ? नेहा :- न..... फोन पर हुई बात सिर्फ, पापा सगाई-वगाई के चक्कर में न पड़कर सीधा शादी की बात कर रहे हैं । मोनिका :- और क्य सही है यार । नेहा :- पैसा था , वो घर बनाने में लग गया । कुछ रोहन की पढ़ाई पर । इसलिए शादी का ही सोचा पापा ने । अवंतिका :- और क्य ठीक है यार , और सभी अपनी-अपनी ढंग से चाहते हैं शादी करना । मानसी :- चलो फिर टाइम भी हो गया, त्रिपाठी सर की क्लास है । चारों एमए की क्लास की तरफ चले गए । क्लास में थोड़ी देर की बातचीत के बाद त्रिपाठी सर आए और भूगोल पढ़ाना शुरू किया । महीने बीतते गए नेहा का होने वाला पति विवेक , वीडियो काॅल और फोन से लगातार नेहा से बातचीत करता रहता । विवेक बेहद समझदार और गंभीर स्वभाव का था । उसे भी नेहा की बातें और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने के लिए कहना अच्छा लगता था । दोनों के बीच खुलकर कब रोमांस भरी बातें होने लगी थीं , पता ही नहीं चला । दोनों एक-दूसरे के मिलन को होने के लिए बेहद उत्साहित थे । धूमधाम से नेहा की शादी हुई , नेहा बहुत सुंदर लग रही थी । पार्लर वाली ने उसे इस तरह सजाया कि , बराती देखते रह गए । विवेक के दोस्त भी बार-बार कहते " बहुत भाग्यशाली हो भाइ.... इतनी खूबसूरत बीवी मिली है " विवेक थोड़ा मोटे चेहरे का था , लेकिन नेहा ने कोई खास ध्यान नहीं दिया । नेहा सोचती थी, जहाँ दिल मिल गए वहाँ चेहरे कोई मायने नहीं रखते । विवेक की दाढ़ी का लुक बहुत बढिय़ा लग रहा था । किनारे से मुलायम सिर के बाल झलक रहे थे, जो सेहरे से बाहर आए थे । नेहा की विदाई के समय मम्मी-पापा ने नेहा को गले लगा कर विदा किया । रोहन हमेशा अपनी बहन को मोटी कह कर चिढ़ाता था , उसे घर सुनसान लग रहा था । नेहा ससुराल पहुंची तो , सभी ने मुस्कुराते हुए स्वागत किया । सभी रस्म रिवाज खुशी-खुशी पूरे हुए । और वह रात आई जिसका बेसब्री से दोनों नवदंपति इंतज़ार कर रहे थे । बहुत देर तक दोनों के बीच बातें हुई , कब दोनों एक दूसरे के चेहरे को देखते हुए मदहोश हो गए पता ही नहीं चला । सुबह नेहा ने अपने बिखरे कपड़े पहने , विवेक बाथरूम नहाने जा चुका था । नेहा ने पानी पिया और बाथरूम को ठक-ठक करने लगी । फिर बाहर आने के इंतज़ार में थोड़ा दूर खड़ी हो गई । सभी शादी के काम से थके हारे नीचे कमरों में सो रहे थे । नेहा दरवाज़े के पास खड़ी रही , बाथरूम से एक गंजा आदमी बाहर आया । नेहा की नज़र पड़ी तो , वापस कमरे की तरफ चली आई । उसे लगा कोई शादी का मेहमान है , इसलिए इस तरह उसके सामने जाना ठीक नहीं । वापस बेड पर बैठ कर रात के पल सोचकर मुस्कुराते हुए उसने फोन उठाया और लेटकर फेसबुक चलाने लगी । उसकी नज़र यकायक कमरे के ड्रेसिंग के सामने पड़ी । एक गंजा आदमी आदमी हाथ में विग लिए खड़ा है । नेहा ने .... खंखार कर गला साफ करते हुए कहा " कौन ..... ???? " वो पलटा .... " विवेक तुम ??? "____ नेहा ने कहा " अरे ! उठ गई ?? "___ विवेक बोला " मुझे छोड़ो.. ये हाथ में ???? "___ नेहा ने भृकुटी तानते हुए विवेक से पूछा । विवेक के हाथ में उसकी अपनी विग थी , और उसे ठीक कर रहा था । बगैर बालों के उसका मोटा सा चेहरा, नेहा को बड़ा अजीब लग रहा था । क्योंकि उसने कभी भी विवेक को ऐसे पहले कभी नहीं देखा था । न कभी विवेक ने उसे बताने की जरूरत समझी । फेसबुक प्रोफाइल से लेकर प्रत्येक फोटो उसकी लंबे बालों में थी । जो कितना भी ज़ूम करने पर लगते नहीं थे नकली होंगे । विवेक एक पचास साल से ऊपर का युवक लग रहा था । नेहा ने मुँह फेर लिया और सिसकने लगी । विवेक को कुछ भी समझ नहीं आया कि, नेहा को कैसे समझाए । उसने अमिताभ बच्चन तक का उदाहरण दिया कि , उनकी विग है ..... लेकिन लगती असली है । तो क्या उनकी पत्नी ने मुँह फेर लिया ???? नेहा सुनों... मुझे बचपन से ही प्रोब्लम थी , इसलिए कभी बाल आए नहीं । थोड़ा बहुत आए , वो रहे नहीं ।___ ढांढस बंधाते हुए विवेक बोला । नेहा :- तुमने मुझे धोखा दिया है विवेक । पहले तो बता सकते थे न ? और तुम अमिताभ बच्चन का उदाहरण देकर ........ साबित क्या करना चाहते हो ? तुम अमिताभ बच्चन नहीं हो..... न ही मैं..... नेहा बोलते-बोलते फूट - फूट कर रोने लगी । अभी एक भी दिन नहीं हुआ था और नेहा को इस बात का आघात लगा कि , विवेक ने बहुत कुछ छुपाए रखा । नेहा ने पूरे दिन भर बातचीत नहीं की । चुपचाप छन-छन टन-टन करके रसोई में खाना बनाती रही । जिस कढाई पर करछी चलाने से आवाज़ 2 आती है, उसकी 10 आ रही थी । बर्तन धुलते समय आवाज़ में बर्तन लड़ते हुए नज़र आ रहे थे । कपड़े धुलने जाती तो , कुछ वाशिंग मशीन में धुलती और कुछ फर्श पर छप्पाक.... छप्पाक । विवेक की जींस धुलते समय उसे विवेक का चेहरा याद आता ...... फिर जींस को पछाड़ कर धोती और फच्च --- फच्च--- फच्च्च करके ताकत के साथ धोती । नेहा का भोलाभाला स्वभाव उग्र और तीखा होने लगा । विवेक घर पर बगैर विग के रहता था , उसे लगातार अपने पति से चिढ़न होने लगी । विवेक के दोस्त आते तो मज़ाक में कहते " हाँ भइ गंजे, भाभी से तो मिलवा दे " इतना सुनते ही नेहा के तन बदन में आग की लपटें दौड़ने लगती । कई रातें गुज़र गईं लेकिन दोनों अलग-अलग सोते । विवेक को मीठे मिलन का तीखा दर्द होता लेकिन पत्नी है .... फिर भी जबर्दस्ती नहीं करता । अब मम्मी-पापा के लिए सुबह की चाय भी , विवेक उठकर बनाता था । नेहा दिन भर पड़े - पड़े फेसबुक चलाती और पुरानी सहेलियों से बात करती । अवंतिका , मोनिका, मानसी सभी के पति कितने हैंडसम और फिट थे । यह सब सोचती रहती । एक दिन नेहा को अपना वही सपना याद आया । और साथ ही साथ काॅलेज वाले विवेक के प्रपोजल की याद भी । नेहा ने अपने पति को फेसबुक पर ब्लाॅक कर दिया । उसने विवेक को फेसबुक सर्च किया और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी । दो दिन दिन बाद विवेक ने एक्सेप्ट की । दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई । विवेक ने हालचाल पूछने का सिलसिला शुरू किया । नेहा ने भी अपनी पूरी बात विवेक को दुःखी इमोजी के साथ बताते हुए पूरी की । विवेक ने सिर्फ इतना कहा " क्या कर सकते हैं यार अब " जैसा भी है , तुम्हारा पति है ..... तुम्हें सबकुछ भूल कर एक्सेप्ट कर लेना चाहिए । " " यार इसने इतनी बड़ी बात छुपाई .... मैं न जाने क्या-क्या ख़्वाब लेकर बैठी थी । " दोनों के बीच खूब बातें हुई , एक दिन बात होते-होते ऐसी बातें होने लगीं कि , नेहा को उसकी बातें अच्छी लगने लगीं । लेकिन नेहा को इस बात का आभास नहीं था कि, अपने अच्छे चरित्र के पति को भुलाकर , वह एक काल्पनिक और कहानियों जैसी दुनिया में जी रही है । उसने अपने पति से मुँह पहले ही मोड़ लिया था । नेहा ने एक दिन मिलने का प्लान बनाया और अपने काॅलेज वाले प्रेमी विवेक से मिलने चली गई । दोनों ने काफी देर तक बातचीत की और फिर होटल के कमरे में रहे । दोनों के बीच संबंध बन गए । कुछ दिन तक फोन पर बातचीत करते-करते एक दिन अचानक नेहा को मैसेज आया " नेहा मेरी फेसबुक आईडी मेरी होने वाली वाइफ के पास भी है.... सो-प्लीज़ कोई भी मैसेज मत करना " नेहा को यह बात बहुत बुरी लगी और फिर उसी तरह अपने ख्यालों में पिसने लगी । सास ससुर के साथ भी बात-बात पर झगड़ा करती । विवेक के माता-पिता को नेहा के स्वभाव की वजह पता लग गई थी । विवेक की मां ने एक दिन रोते हुए कहा " बेटी तू मेरे बच्चे की ज़िदगी बर्बाद कर रही है ...... अब तू खुद सोच कहाँ से लाएँ उसके सिर पर बाल ?? ... भला ये कोई तुक बनता है ??? इस तरह पति के साथ व्यवहार करने का ??? " विवेक के पिता ने पहले ही समझाने से मना कर दिया था कि " मैं बहू को कुछ नहीं समझाऊंगा , ये समाज का जुमला है ( बहू बेटी एक समान ... बहू बेटी में कोई भेद नहीं । ) लेकिन विवेक की " माँ " ..... बहुत फर्क है ..... बेटी को हम बचपन से नहलाते - धुलाते हैं, उसके कपड़े बदलते हैं । क्योंकि वो हमसे उपजी है । लेकिन कुछ भी कहो बहू पराई घर की बेटी है , उसे हमने बचपन से देखा नहीं । इसलिए हमें स्वभाव का पता नहीं । इस तरह समझाने की जिम्मेदारी बहू के माता-पिता की है , इसलिए मैं कुछ नी बोल सकता । विवेक दिल का साफ और स्वभाव का गंभीर पर समझदार व्यक्ति था । उसने नेहा के इतने ताने सुनें , फिर भी कभी हाथ तक नहीं उठाया । आस पड़ोस के लोग लगातार नेहा और विवेक की तुलना करते और विवेक को कम आंकते । नेहा तो बहुत सुंदर है , बाल देखो कितने खूबसूरत हैं । बस इसी वजह से नेहा का पारा चढने लगा । कुछ समय बाद नेहा प्रेगनेंट हुई तो , विवेक को हैरानी हुई । फिर भी उसने बच्चे को एक्सेप्ट किया , बगैर नेहा को कुछ कहे । उसने यह बात माता-पिता को नहीं बताई कि , बच्चा किसी और का है । घर में बच्चे का आना और नेहा के सास-ससुर का खुश होना । विवेक के लिए थोड़ा बहुत सुकून मिलने जैसा था । लेकिन नेहा अब भी विवेक से हट कर रहा करती । नेहा तमाम इच्छाएँ बाहर पूरी कर लेती थी , उसके हैंडसम से हैंडसम लड़कों से फेसबुक पर दोस्ती थी । विवेक के माता-पिता अपने नन्हे पोते के साथ व्यस्त हो गए थे । नेहा सबके पीठ पीछे सज धज कर जाती है , उसके बहुत से जवान लड़कों से संबन्ध हैं । मौहल्ले के लड़कों ने उसका नाम माल भाभी रखा है । ग्यारहवीं और दसवीं के बच्चे तक उसका मौहल्ले में निकलने का इंतज़ार करते रहते हैं । विवेक कई बार छुप कर रोता है , और फिर अपने काम में बिज़ी हो जाता है । उसने मुंबई का काम किसी और को सौंप दिया था । स्वयं दिल्ली में अपने बच्चे अर्णव और मम्मी-पापा के साथ रहता है । विवेक की माँ को नेहा की सब खबरें पता हैं । विवेक सोचता है माँ को नेहा के बारे में कुछ पता नहीं , और माँ सोचती है विवेक को पता नहीं । और न कभी अपने बेटे को पता लगने दूंगी । एक दिन विवेक के पापा ने रात को सोने से पहले टीवी बंद करते हुए । अपनी पत्नी से कहा । "बहू का चाल चलितर ठीक नहीं लगता मुझे । " माँ ने तुरंत कहा ____तुम्हें कभी कुछ ठीक लगा है, जो अब लगेगा ?? आँख की दवाई तुमने..... न आज डाली और न कल डाली .... ये लो ____ बेड के सिरहाने से शीशी पकड़ाते हुए विवेक की माँ बोली । फिर एक दूसरे की आँख में नज़र की दवाई डालकर दोनों लेट गए । दवाई के साथ पता ही नहीं चल रहा था, दोनों बुजुर्ग रो रहे हैं य दवाई बह रही है । पिता फफकते हुए बोला_____ साला ये लहसून जैसी दवाई इतनी तीखी है कि, आँसू छूटने लगते हैं । बहू के बारे में आस पड़ोस की औरतों से सुनती है तो , किसी से कुछ नहीं कहती और सीधा गुस्से में आकर विवेक के पिताजी से कहती है " हे ईश्वर हैंय...... बाप रे ! तुमने चौबीस घंटे कान खा लिए , ये टीवी पर न्यूज़ चला- चलाकर । एक घड़ी चुप नी बैठा जाता तुमसे ??? तब कहते हो , आँखे खराब हो गईं । " विवेक के पिता जी भी चिल्लाकर कहते :- " मैं तबसे एक कप चाय के लिए चिल्ला रहा हूँ ..... तुझे सुनाई नहीं देता । और न्यूज़ लगाता हूँ , तो तेरे कान के पर्दे फटते हैं । बनाई तूने चाय ???? " वास्तव में बिचारे दोनों बुजुर्ग एक दूसरे की जान थे । कभी जिंदगी में लड़े नहीं , लेकिन अब आए दिन झगड़ते । क्योंकि उनका बस एक दूसरे पर ही चलता । विवेक को को भी कुछ नहीं कह सकते थे । बहू को कहेंगे तो , आसपास में जाने क्या झूठ बोल दे कि " दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है । " अब आए दिन दोनों बुजुर्ग बहुत ज़ोर ज़ोर की आवाज़ के साथ लड़ते थे । लेकिन दोनों के मन में डर था कि, हमारे कहने से बहू गलत कदम न उठा ले । क्योंकि समझाने की इतनी कोशिश के बाद भी नेहा ज्यों की त्यों थी । पारिवारिक अपराध न पनपे इसलिए किसी एक पक्ष को चुप रहना ही पड़ता है .....ऐसा विवेक सोचता था । साथ ही बुजुर्ग भी अपने मन के डर की वजह से यही सोचते थे, समझदारी इसी में है कि , चुप रहा जाए । कोर्ट-कचहरी तो एक ऐसे साधन और छुटकारे हैं जो सिर्फ नाम के हैं । असली सुधार तो तब है , जब कोई स्वयं को समझाए अपनी गलती को मन में मानकर सही रास्ते पर चले , और सुखद जीवन जिए । अब कोई घर में पूजा नहीं करता , कोई पत्नी य पति की बात नहीं मानता तो क्या कानून के पास उसका वास्तविक समाधान है ???? समाधान तो हमारे पास ही है , लेकिन स्वीकार करेगा कौन ??? उस पर चलेगा कौन ?? यही सोचते हुए , इसी उधेड़बुन में बुजुर्ग फंसे रहते थे । मैं आशा करता हूँ की आपको ये ” Hp Video Status Ki Story” कहानी अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।

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महाबलीपुरम की कहानी - Hp Video Status

१- परिचय नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे,ऐसा माना जाता है कि महाबलीपुरम ( जो वर्तमान में अपनी नक्काशियों के लिए जाना जाता है ) नामक राज्य में राजा सत्यसेन का शासन था। हालांकि उनका राज्य देश के अन्य राज्यों के मुकाबले उतना विशाल नहीं था लेकिन यह एक समृद्ध और सुखी राज्य था। राजा सत्यसेन दयालु व न्यायप्रिय थे। वह राज्य को प्रजा का राज्य व स्वयं को राज्य का सेवक कहलाना पसंद करते थे। उनके राज्य में मानो हरियाली व सुख की वर्षा होती हो। पुत्र सत्यव्रत व पुत्री अंबा के प्रति स्नेह व प्रजा के लिए अपने कर्तव्य के कारण ही वह अपनी अर्धांगिनी की यादों से बाहर आ पाए थे। हालांकि महारानी की अकाल मृत्यु का दुख तो मन में था ही लेकिन संतान, प्रजा का ख्याल व अपने कर्तव्य के चलते यह दुःख थोड़ा कम हो गया था। या फिर यह भी कहा जा सकता है की स्वय को महारानी की यादों से दूर रखने के लिए हर समय व्यस्त रहने का प्रयत्न करते। जहा एक ओर राज्य को सत्यसेन के रूप में दयालु व न्यायप्रिय राजा मिले वहीं दूसरी ओर महाबली के रूप में कुशल, पराक्रमी, निडर व वीर सेनापति भी मिले। महाबली के नेतृत्व में आज तक राज्य किसी भी युद्ध में पराजित नहीं हुआ था। इसीलिए सेनापति महाबली महाराज के सबसे प्रिय व विशेष सलाहकार भी थे। २- ईर्ष्या लेकिन यह भी सत्य है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जब राज्य में सत्यसेन के पिता महाराज कर्णसेन का शासन था तब महाराज के दोनों पुत्र सत्यसेन व धीरसेन में बहुत प्रेम था। दोनों ही युवराज बहुत कुशल योद्धा होने के साथ ही चतुर, पराक्रमी व राजनीति का अच्छा ज्ञान रखने वाले थे। अगर देखा जाए तो दोनों हर पहलू में एक से थे। कोई भी व्यक्ति दोनों युवराज में अंतर नहीं कर सकता था। लेकिन जब महाराज समाधि में विलीन हुए और उनकी इच्छानुसार सत्यसेन को राजा घोषित किया गया तो धीरसेन को यह बात अनुचित लगी। उसे लगा यह उसके साथ अन्याय है। वह भी किसी से कम नहीं है, फिर सत्यसेन को ही राजा क्यों??? दोनों की परीक्षा लेकर, सफल होने वाले को भी राज्य दिया जा सकता था। लेकिन पिता के निर्णय के आगे वह कुछ नहीं कर सकता था। इसलिए उसने यह बात स्वीकार ली। धीरे-धीरे सत्यसेन का राज्य समृद्ध होता गया। अब तक आस - पास के कुछ राज्य उनके अधीन हो चुके थे और वह प्रजा के प्रिय हो चुके थे। शायद इसी बात से धीरसेन को ईर्ष्या होने लगी थी। उसे स्वयं का अस्तित्व भंग होता नजर आने लगा। इसी द्वेष के चलते उसने कई बार महाराज के प्राण हरने के प्रयत्न किए लेकिन हर बार वह विफल ही रहा। शायद कुल देवता की कृपा या प्रजा का प्रेम ही रहा होगा, नहीं तो धीरसेन जैसे कुशल योद्धा का प्रहार कभी खाली नहीं जाता। अब शायद वह भी जान गया था कि वह अकेले सत्यसेन को नहीं मार सकता। अब उसे स्वप्न भी आते तो यही की किस तरह महाराज के प्राण लिए जाए। उसकी ईर्ष्या ने महाभयंकर रूप लेे लिया था। वह वीर, साहसी व कुशल योद्धा अब एक कायर, अपराधी की भांति सोचने लगा था। ३- मृत्यु एक दिन महाराज, सेनापति महाबली के साथ महल से बाहर प्रजा की सुरक्षा, पानी की व्यवस्था और किसानों की दशा का ब्यौरा लेने गए और वापस लौटकर वह सत्यव्रत और अंबा से भेंट करने गए। जैसे ही दोनों पिता को गले लगाने दौड़े, सत्यव्रत "पिता जी" कहते ही धरा पर गिर पड़ा। महाराज को समझ नहीं आया कि यह क्या हुआ? अंबा भी सहम गई। तुरंत वैद्य बुलाए गए और शीघ्र अतिशीघ्र उपचार आरंभ कर दिया गया। वैद्य ने औषधि तो दे दी लेकिन युवराज पर उसका कोई असर नहीं हुआ। " ऐसा विष युवराज को दिया गया है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे होता है। इसका कोई तोड़ हमारे पास नहीं है।" वैद्य आपस में कह रहे थे। परन्तु हम प्रयत्न तो कर ही सकते है, कदाचित कोई हल निकल ही जाए। हा ! आप सही कह रहे है, ऐसा कहते हुए प्रयत्न फिर से आरंभ कर दिए जाते है। परंतु युवराज का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन बिगड़ता ही जा रहा था। कोई औषधि, कोई उपचार काम नहीं कर रहा था। किसी भी वेद्य के पास इसका हल नहीं था। महाराज अपने सभी कार्य, राजपाठ छोड़कर युवराज के कक्ष के बाहर चक्कर लगाते रहते और आकाश की ओर देखते हुए हाथ जोड़कर प्रभु से सत्यव्रत के कुशल मंगल की कामना करते। जो राजमहल सत्यव्रत ओर अंबा की मुस्कुराहट से भौर से संध्या तक महकता और खिलखिलाता रहता था अब कई दिनों से महल में एक हंसी का स्वर भी ना सुनाई दिया था। मानो पूरे महल में दुःख ने घर कर लिया था। अमावस की वह रात अत्यंत भयानक व रूदनभरी रही जब नन्हे राजकुमार की मृत्यु हुई। इस घटना से एक बार फिर राजमहल में अंधकार छा गया। ४- अपराधी कौन? कई महीनों तक महल ने पूर्णिमा का चांद ना देखा। महाराज ने अपनी आंखो के सामने पहले अपनी पत्नी और फिर पुत्र को मरते देखा। उनकी आंखे नम थी लेकिन आंखो से एक भी आंसू ना बहने दिया। वह ऐसा दुष्कर्म करने वाले को अपने हांथो से सजा देना चाहते थे। लेकिन समस्या यह थी कि यह काम किसका हो सकता है, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था। उनकी तो जैसे सोचने कि शक्ति ही क्षीण हो गई थी। महाराज को सेनापति महाबली पर पूर्ण विश्वास था इसीलिए उन्होंने सेनापति को बुलवाकर अपराधी का पता लगाने का आदेश दिया। महाराज की आज्ञा पाकर सेनापति बहुत ही गुप्त तरीके से खोज करने लगे। किन्तु अपराधी इतना चतुर था कि कोई भी निशान नहीं छोड़ा था। लेकिन महाबली ने हार नहीं मानी और अपराधी का पता लगाने में जुटे रहे की एक दिन उन्हें ज्ञात हुआ कि जिस दिन महाराज महल से बाहर गए थे उसी दिन महाराज के भाई बहुत समय तक राजकुमार के साथ ही थे। वह इस विषय में कोई भूल नहीं करना चाहते थे। उन्हें पूर्ण रूप से तो पता नहीं चल पाया था लेकिन उन्होंने एक युक्ति बना ली थी। महाबली महाराज के पास गए और महाराज से कहा - हे महाराज ! आप कल प्रातः महल से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति को सभागार में उपस्थित होने का आदेश दे। कल आपको युवराज का हत्यारा मिल जाएगा। यह सुन महाराज ने आशा पूर्ण दृष्टि से देखते हुए पूछा - क्या तुम्हे अपराधी का पता चल गया है? कौन है वो? किसने मेरे पुत्र की हत्या की है? बताओ महाबली...... महाराज! आप कृपया धैर्य रखें और शांत हो जाए। कल प्रातः आपको अपने सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होंगे। अब आप विश्राम कीजिए। महाराज की आज्ञा पाकर सेनापति कक्ष से बाहर आए और विचार करने लगे " यदि महाराज के भाई ही युवराज के हत्यारे हुए तो महाराज कैसे यह सब सह पाएंगे।" ५- बहिष्कार अंधेरा छटा और पंछियों का कलरव चारो ओर फैलने लगा। अब समय आ गया था अपराधी को सजा देने का। सेनापति अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में कांच का एक प्याला लिए हुए कहने लगे - " युवराज का हत्यारा कौन है? महाराज जान गए है।" जिसने भी युवराज की हत्या कि है वह स्वयं सबके सामने आ जाए अन्यथा महाराज की आज्ञानुसार उसे भी यह विष पिला दिया जाएगा यदि तब भी उसी क्षण उसकी मृत्यु ना हुई तो इसी तलवार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा। महाराज की नजर सभा में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति पर थी। अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों ना हो, मौत का भय तो चेहरे पर झलक ही आता है। महाराज तुरंत सिंहासन से उठे और सेनापति के हाथ से तलवार लेकर क्रोध में आगे बढ़ते हुए बोले - " नीच, पापी तूने ऐसा क्यों किया? इस सिंहासन को पाने के लालच में? " अब महाराज की तलवार और धीरसेन का सिर... लेकिन वह था तो महाराज का भाई ही। महाराज अपने है भाई के प्राण कैसे लेे सकते थे। धीरसेन ने पहली बार अपने भाई की आंखो में अपने लिए घृणा महसूस की। महाराज ने उसकी तरफ से नज़रे हटाते हुए कहा - " दूर हो जाओ मेरी नज़रों से,  मै महाराज सत्यसेन.. अभी तुम्हारा महाबलीपुरम राज्य से बहिष्कार करता हू।" धीरसेन बिना कुछ कहे तुरंत सिर झुकाए राज्य की सीमा से बाहर चला गया।                                 ६- परीक्षा महाराज ने अंबा को युद्धनीति सिखाने का उत्तरदायित्व सेनापति महाबली को सौप दिया। वह स्वयं भी अंबा को तलवारबाज़ी सिखाया करते व अंबा के साथ इसका अभ्यास भी किया करते। प्रजा के प्रति अपना कर्तव्य, एक राजा होने के साथ ही एक पिता होने का कर्तव्य भी वह बहुत अच्छे से निभा रहे थे। वह कितने भी व्यस्त क्यों ना हो लेकिन अंबा के लिए समय निकाल ही लेते थे। कब इतना समय बीत गया पता ही नहीं चला। खिलौनों से खेलने वाली अंबा अब तलवारबाज़ी, तीरंदाजी, घुड़सवारी करने लगी थी और राज्य के कई कार्यों में पिता जी की सहायता भी करती थी। अब समय आ गया था अंबा कि परीक्षा का...... पड़ोसी राज्य के साथ युद्ध छिड़ चुका था। इस बार स्वयं अंबा ने पिता के स्थान पर युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी। पिता ने मुस्कुराते हुए, अंबा के सिर पर हाथ रखा व पुत्री को मंजूरी दे दी। कई दिनों तक युद्ध चलता रहा। अंबा स्वयं सेनापति महाबली के साथ युद्ध का नेतृत्व कर रही थी। उसकी युद्ध नीति बहुत ही कुशल व थोड़ी अलग थी। सेनापति हैरान थे लेकिन खुश भी थे। काफी लंबे युद्ध के बाद महाबलीपुरम राज्य विजयी हुआ.... राज्य के अभी लोग अंबा व सेनापति की प्रसंशा व जय जयकार कर रहे थे। पहली बार एक महिला युद्ध क्षेत्र में युद्ध कर रही थी। अंबा के महल वापस लौटने पर महाराज अपनी पुत्री को गले लगा लेते है और खुशी से भावविभोर होकर कहते है - " पुत्री! मुझे तुम पर गर्व है। आज तुम परीक्षा में सफल रही।" * महल में शांतिपूर्ण मुस्कान फैल जाती है।* ७- राज्याभिषेक समय व्यतीत होने के साथ-साथ अंबा नई कलाए सीखती रही व पिता का मान बढ़ाती रही।अब राजा वृद्ध हो चले थे और अब उन्हें आभास हो गया था कि अब वह सभी कार्यों के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने एक सभा बिठाई और अंबा को राजगद्दी देने की बात रखी। सभी इस बात से सहमत हुए क्योंकि सभी अंबा के शौर्य से परिचित थे और सिर्फ एक युवक ही राजगद्दी पर बैठ सकता है, यह राज्य इस नियम से सहमत नहीं था। एक शुभ मुहूर्त निकलवाया गया और बहुत ही हर्षोल्लास के साथ अंबा का राज्याभिषेक किया गया। प्रजा अंबा को शासक के रूप में पाकर बहुत ही खुश थी। सभी अंबा को बधाई देते व बधाई गीत गाते जैसे आज ही होली और आज ही दीवाली हो। महाराज ने महाबली से कहा - " महाबली! जैसे आज तक आप मेरे और इस राज्य के रक्षक रहे है वैसे ही अब आपको पुत्री अंबा की रक्षा करनी है।" जी महाराज! जैसी आपकी आज्ञा..... उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

दो दोस्तों की कहानी – Small Story in Hindi About 2 Friends - Hp Video Status

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे कहानियां हम सभी को एक अलग दुनिया में ले जाती है। और कहानी जितनी छोटी होती है उतनी ही मजेदार और प्रेरणादायक भी । इसलिए  हम आपके लिए ऐसी ही एक शोर्ट हिंदी स्टोरी लाये है जो आप बस 1 मिनट में पढ़ सकते है। ये कहानी छोटी भी है और प्रेर्नादायक्त भी। एक बार दो दोस्त रेगिस्तान पार कर रहे थे। रास्ते में उनका किसी बात पर झगड़ा हो गया और एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को गुस्से में आकर थप्पड़ मार दिया। दूसरे दोस्त को इस बात से दिल पर बहुत ठेस पहुंची, और उसने रेत पर एक लकड़ी से लिखा -“आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने छोटा सा झगड़ा होने पर थप्पड़ मार दिया “रेगिस्तान में वे एक दुसरे को छोड़कर नहीं जा सकते थे, इसलिए उन्होंने सफर जारी रखा और सोचा मंज़िल पर पहुँचकर इस झगडे को सुलझाया जायेगा। वे आपस में बिना बात किये, साथ साथ चलते रहे, आगे उन्हें एक बड़ी झील मिली। उन्होंने इस झील में नहाकर तरोताज़ा होने का फैसला किया। झील के दुसरे किनारे पर एक बहुत खतरनाक दलदल था, वह दोस्त जिसे चांटा मारा गया था, तैरते – तैरते झील के दूसरे किनारे पर इस दलदल में जा फंसा, और डूबने लगा। उसके दोस्त ने जब यह देखा, तो वह भी तुरंत उस तरफ तैर कर आया और अपने दोस्त को बड़ी मशक्क़त के बाद बाहर निकल लिया. जिस दोस्त को दलदल से बचाया गया था उसने झील के किनारे एक बड़े पत्थर पर लिखा “आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई” दूसरे दोस्त ने यह देखकर पूछा “जब मैंने तुम्हे थप्पड़ मारा था तो तुमने उसे रेत पर लिखा ! लेकिन जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा क्यों, दूसरे दोस्त ने जवाब दिया “जब हमें कोई दुःख पहुंचाता है तो हमें इसे रेत पर लिखना चाहिए, जहाँ वक़्त और माफ़ी की हवाएँ उसे मिटा दें” लेकिन जब कोई हमारे साथ अच्छा बर्ताव करे, तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए, जहाँ उसे कोई मिटा ना सके। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Beautiful Story of Life in Hindi – आपकी ज़िन्दगी बदल देगी ये कहानी

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे अक्सर हम अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, और उन्हें देखकर हमें ऐसा लगता है कि उनके पास सबकुछ है और हमारे पास कुछ भी नहीं। यही देखकर हम दुखी हो जाते हैं। लेकिन इस Beautiful Story of Life in Hindi को पढ़कर आप शायद ऐसा नहीं सोचेगें। इस कहानी को पढ़ने के बाद जिंदगी को देखने का आपका नजरिया यकीनन बदल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं Nice Story about Life in Hindi   एक कौआ था, वो अपनी जिंदगी से बहुत ही संतुष्ट और खुश था, हमेशा अपनी ही मस्ती में रहता था । वो हमेशा अपने पंखों को फैला ऊंचे आसमान में उड़ता था जिसपर की उसे बहुत गर्व था । एक दिन कौए को बहुत तेज प्यास लगी और वो एक तालाब के पास रुका, वहां उसकी नजर हंस पर पड़ी। हंस को देख कौआ मन ही मन ये सोचने लगा कि ये हंस कितना खूबसूरत है। इसका सफेद रंग, इसके शरीर की बनावट कितनी सुंदर है, यकीनन ये अपनी सुंदरता से बहुत खुश होगा । मैं तो कितना काला हूं। कौए ने मन ही मन ये सोचा कि ये अपनी सुंदरता से बहुत खुश होगा और यही सोचते- सोचते हंस के पास गया।   कौए ने हंस से कहा “तुम कितने सुंदर हो, यकीनन तुम्हे अपनी सुंदरता पर बहुत गर्व महसूस होता होगा और दूसरे पक्षियों को तुमसे जलन होती होगी?” कौए की ये बात सुन हंस ने कहा “मित्र मैं भी पहले यही सोचता था, लेकिन जब मैंने तोते को देखा, तब मुझे लगा कि मैं गलत था। क्योंकि तोता बहुत सुंदर होता है और उसके पास दो प्यारे- प्यारे रंग होते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि तोता ही सबसे सुंदर पक्षी है, मैं तो उसके सामने कुछ भी नहीं”.   हंस की ये बात सुन कर कौआ तोते के पास पहुंचा। तोते की ख़ूबसूरती देखकर कौआ स्तब्ध रह गया और तोते को जा कर कहा “तुम कितने सुंदर हो, हंस बिल्कुल सही कह रहा था, तुम तो हंस से भी ज्यादा खूबसूरत हो, यकीनन तुम्हे अपनी ख़ूबसूरती पर नाज़ होगा और तुम हमेशा खुश रहते होंगे”. कौए की बात सुनकर तोते ने कहा “नहीं ……. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मुझे भी पहले ऐसा ही लगता था, जबतक मैंने मोर को नहीं देखा था। मोर के पास बहुत सारे रंग हैं और वो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है, इसलिए मोर ही दुनिया का सबसे सुंदर और खुशहाल पक्षी है।” फिर क्या था तोते की बात सुन कौआ चिड़ियाघर पहुंच गया मोर के पास।   चिड़ियाघर पहुंच कर कौए ने देखा कि मोर पिंजरे में बंद है और हजारों लोग उसे देखने के लिए आ रहे हैं। कुछ पल के लिए तो कौआ मोर की सुंदरता देखकर हैरान ही रह गया और कुछ देर बाद मोर के पास गया और उससे कहा “मित्र मोर, तुम तो वाकई में बहुत ही ज्यादा सुंदर हो। तुम्हारी सुंदरता अद्भूत है। तुम्हें देखने के लिए तो हजारों लोग भी आते हैं। इसलिए सच में तुम ही दुनिया के सबसे सुंदर और खूबसूरत पक्षी हो।”   Inspirational Story about Life in Hindi   कौए की ये बात सुनकर मोर बोला “मैं भी यही सोचा करता था कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और खुश पक्षी हूं। लेकिन देखो मेरी सुंदरता की वजह से मुझे यहां पिंजरे में कैद कर लिया गया है। मित्र मैं खुश नहीं हूं। मैं तो अब बस यही सोचता हूं कि काश मैं कौआ होता तो आजाद आसामान में उड़ रहा होता।”   मोर की कथनी सुन कौए को सब कुछ समझ आ गया। अब उसे दोबारा से अपने पर गर्व महसूस होने लगा और अब वो पहले से भी ज़्यादा खुश रहने लगा।   दोस्तों, बिलकुल यही कहानी आजकल हम सब की है। हम दुसरो की दौलत, बड़ा घरबार, गाड़ियां देखकर सोचते है कि ये लोग कितने खुश होंगे लेकिन ऐसा सबके साथ नहीं होता। हमारे पास जो कुछ भी है हमें उससे संतुष्ट रहना चाहिए वरना हम कभी खुश नहीं रह पाएंगे। अक्सर हम उन्हीं चीजों के पीछे भागते हैं, जो हमारे पास नहीं है और ऐसे ही हमारा बहुमूल्य समय निकलता जाता है। हमेशा याद रखिये कि हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती!   उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Real Story एक महान योद्धा जिसका महाराणा प्रताप ने अपमान किया था

इतिहास का एक महान योद्धा जिसका महाराणा प्रताप ने अपमान किया था नाम जरूर जाने नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, इतिहास में कई बड़े-बड़े और शक्तिशाली योद्धा में जन्म लिया था, इनकी वीरता के गुणगान आज भी गाए जाते हैं लेकिन आज हम आप लोगों को इतिहास के एक ऐसे शक्तिशाली योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका अपमान महाराणा प्रताप ने किया था। महाराणा प्रताप इतिहास की एक शक्तिशाली और बहादुर योद्धा माने जाते हैं जो अपने जीवन काल में हमेशा अपनों के खिलाफ युद्ध किये थे। दोस्तों महाराणा प्रताप ने इतनी शक्तिशाली योद्धा का अपमान किया था वह कोई और नहीं बल्कि मान सिंह है जिसे इतिहास का एक महान योद्धा के रूप में जाना जाता है। मानसिंह ने अपने जीवन काल में अकबर जैसे राजा के साथ मिलकर का युद्ध लड़े थे। दोस्तों बता दे मानसिंह ने असम, केरल जैसे राज्य को देखकर सम्राट अकबर को दे दिया था, इसलिए सम्राट अकबर ने मानसिंह की बहादुरी को देख कर उसे प्रधान सेनापति नियुक्त कर दिया था। दोस्तों बात उस समय की है जब राजा अकबर चित्तौड़ को अपने राज्य में मिलाने के लिए चित्तौड़ पर बार बार आक्रमण कर रहा था, लेकिन हमेशा उसे महाराणा प्रताप के हाथों से हार का सामना करना पड़ रहा था, जिसके कारण राजा अकबर ने मानसिंह को महाराणा प्रताप से बात करने के लिए चित्तौड़ भेजा। उसके बाद जब मान सिंह चित्तौड़ पहुंचा तब वहां पर महाराणा प्रताप के मंत्रियों ने मानसिंह का अच्छे से स्वागत किया लेकिन महाराणा प्रताप स्वागत करने के लिए नहीं आए। उसके बाद जब खाना खाने का समय आया तब भी महाराणा प्रताप पेट दर्द का बहाना बनाकर मानसिंह के साथ खाना खाने से इंकार कर दिया। उसके बाद मानसिंह को बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उन्होंने महाराणा प्रताप के पास जाकर उनसे साथ में खाना न खाने का कारण पूछा। उसके बाद महाराणा प्रताप ने मानसिंह से कहा कि जो व्यक्ति मातृभूमि की इज्जत दुश्मनों के साथ मिलकर लूटता है हम उस व्यक्ति से बात करना भी पसंद नहीं करते हैं। उसके बाद मानसिंह वहां से चला जाता है। मान सिंह के जाने के बाद महाराणा प्रताप ने सभी बर्तनों का शुद्धिकरण करवाया था। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Info भारत के 5 सबसे अनूठे गांव ये है

ये है भारत के 5 सबसे अनूठे गांव, नंबर 1 में तो है अपना संविधान. नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, आज हम आपको भारत के 5 सबसे अनोखे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपने आप में अलग ही देश-विदेश में पहचान रखते हैं, तो चलिए आज की चर्चा शुरू करते हैं। 5. पिपलांत्री यह भारत का सबसे विकसित गांव के तौर पर जाना जाता है। इस गांव के विकास को डेनमार्क देश की किताबों में भी पढ़ाया जाता है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर लोग इस गांव के बारे में नहीं जानते हैं। यह गांव राजस्थान के उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर है और इस गांव की जनसंख्या करीब 1500 लोगों की है। इस गांव में पानी, पेड़ और बेटी बचाने के लिए देशभर में सबसे शानदार उदाहरण पेश किया है। इस गांव में इजरायल तकनीक पर आधारित कई प्रकार हाईटेक खेती की जाती है। लड़कियों के जन्म पर इस गांव में 111 पेड़ लगाने होते हैं और इनकी शादी का सारा खर्च पूरा गांव मिलकर उठाता है। 4. मावल्यान्नॉंग इस गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव की उपाधि मिली हुई है। यह गांव स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से कई सालों पहले स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है। यह गांव भगवान का बगीचे के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह गांव भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर पर मेघालय राज्य में स्थित है। आपको अपनी जिंदगी में एक बार इस गांव में जरूर जाकर आना चाहिए। 3. कोडिन्ही केरल में स्थित यह गांव जुड़वाँ बच्चों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। आपको यहां पर हर घर में एक जुड़वाँ बच्चा जरूर मिल जाएगा। यहां जुड़वाँ बच्चा पैदा होने की क्या वजह है, अभी तक कोई भी असली कारण नहीं खोज पाया है। आपको यहां पर नवजात शिशु लेकर 60 साल के बुड्ढे तक का डबल रोल मिल जाएगा। यह गांव वाले इन जुड़वाँ बच्चों की वजह से कितने कंफ्यूज होते होंगे यह तो अब बस ऊपरवाला ही जाने। 2. करचोंड आज भी भारत में अंतरजातीय विवाह या फिर शादी से पहले लड़की से मिलने की वजह कितनी ही समस्या और लड़ाई दंगे हो जाते हैं। भारतीय न्यायालय ने हाल ही में लोगों को लव इन रिलेशनशिप में रहने के अधिकार प्रदान किए हैं लेकिन यह गांव इस मामले में हजारों साल पहले से ही आगे हैं। गुजरात के सेलवास से 30 किलोमीटर दूर स्थित 3 हजार आदिवासी लोगों के इस गांव में आप बेरोकटोक किसी भी लड़की के साथ लव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। अक्सर लोगों की गांव के प्रति गलत धारणाएं ही रहती है लेकिन यह गांव शहर से भी आगे है। 1. मलाणा हिमाचल प्रदेश के मनाली शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव अपने आप में कई खूबियों से भरा हुआ है। अगर आपको इस गांव की पहली खूबी बताई जाए तो इस गांव में कनाशी भाषा बोली जाती है जो केवल विश्व में केवल इसी गांव के लोग जानते हैं और यह इसे ना ही किसी बाहरी लोगों को सिखाते हैं। दूसरी बात इस गांव में मलाणा क्रीम मिलती है जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भांग के तौर पर जानी जाती है। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं और यह दुनिया का सबसे पुरानी लोकशाही गांव है। इस गांव में खुद का संविधान और संसद है जिसमें ये निचले सदन को कनिष्थाँग और उच्च सदन को जयेशथाँग कहते है। गांव में साल भर भीड़ रहती है लेकिन यहां के लोग अपने ही मस्ती में रहते हैं। खैर, यह थे भारत के कुछ अनूठे गांव, अगर आपके गांव या आसपास गांव में भी कुछ अनूठी बात है उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

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