एक ही भूल - एक रोमांचक कहानी - Story - Stories

एक ह

अभी अभी तो नीलिमा हॉस्पिटल से आई ही थी।फ्रेश होकर खाना खाने बैठी ही थी कि फ़ोन बजने लगा। हॉस्पिटल से ही था,,,, कोई एमरजेंसी होगी ,,,,,सोचते हुए उसने फोन रिसीव किया। उधर से पुष्पा(नर्स)ने कहा,"डॉ नीलिमा,एक एमरजेंसी केस आया है बहुत क्रिटिकल केस है ,,,आप ही संभाल सकती हैं इसे,,,,। प्लीज आप जल्दी आइए डॉ नील भी पैनिक हो रहे हैं,,,,,।" "ओके.. ओके ...अभी आई मैं ..तुम ओ टी तैयार करो...डॉ नील को बोलो तब तक मरीज को वो हैंडल करें.....|" जल्दी जल्दी खाना खाते हुए ही नीलिमा तैयार होने लगी। *** *** ऑपरेशन थिएटर में सारी तैयारियां हो गयी थी। नीलिमा ने जाते ही चार्ज संभाल लिया। ऑपरेशन सफल रहा। आपरेशन के बाद अचानक उसकी नज़र मरीज के चेहरे पर पड़ी तो वह चौंक गई। "अरे ये तो राघव है,,,,," फिर नर्स को ओर मुखातिब होते हुए बोली, "इनके कोई रिश्तेदार,घरवाले आये हैं?" नर्स ने नहीं में सिर हिलाया। "ऐसे कैसे बिना किसी परिचित के आपने आपरेशन होने दिया",,,,, हम हॉस्पिटल ऑथोरिटी को क्या जवाब देंगे?,,,, ,,,,इतनी लापरवाही ?,,,, अच्छा ,इनके सामान में कोई पहचान पत्र मेरा मतलब कुछ आई डी,मोबाइल वगैरह तो होगा?,,,, "यस डॉ,... मोबाइल तो है पर उसमें लॉक लगा है... पहचान पत्र में शिमला का पता दिया हुआ है,,,,, ओके,,इनका मोबाइल ले के आओ,, मोबाइल पासवर्ड मांग रहा था,, नीलिमा ने कुछ सोच कर राघव की डेट ऑफ बर्थ टाइप की ,पर लॉक नहीं खुला। फिर न जाने क्या सोच कर उसने अपनी जन्म तारीख टाइप की ,,,, 'अरे ये तो खुल गया ??? बड़ी हैरानी हुई और खुशी भी हुई उसे।पता नहीं क्यों,,,, तो क्या अब तक राघव उसे...?? नहीं... नहीं...!!! राघव ने तो कभी कुछ कहा ही नहीं था,,,, शायद वो तो शुचि को....... इससे आगे उसके दिमाग ने सोचने से ही मना कर दिया... फिर उसने राघव का पर्स टटोला,,,, पर्स की अंदर की तहों के अंदर उसे अपनी एक फ़ोटो नज़र आई जो एक बार राघव ने किसी फार्म में लगाने के लिए ली थी 'तभी शायद एक उसने रख ली होंगी,,,,' "तो क्या राघव सच में मुझसे ...." दिल ने सोचा पर मन फिर से बगावत करने लगा,,,,, सोचते सोचते नीलिमा के सिर में दर्द होने लगा था।वोअपने रूम में आ गई। राघव को कुछ घंटे बाद होश आना था। *** **** उसने कमरे की खिड़कियां खोली तो ताज़ी हवा का झोंका आया साथ अपने पुरानी यादें भी ले आया,,, पाँच साल पहले...... तब नीलिमा ने मेडिकल में दाखिला लिया था।अपनी बेस्ट फ्रेंड शुचि के साथ वो कॉलेज कैंपस में घुसी ही थी कि 8,10 सीनियर लड़के रास्ता रोक कर खड़े हो गए।किसी ने डांस की फरमाइश की तो किसी ने गाने की और किसी ने हीरो हेरोइन की नकल करने की फरमाइश कर डाली।और भी छः सात नई लड़कियां भी थी।शुचि ने गाना गाया बहुत मधुर आवाज थी उसकी।सब मंत्रमुग्ध हो सुनते रहे।फिर अन्य लड़कियों ने भी उन लोगो की आज्ञानुसार कार्य किये,,, उन्हीं सिनिअर लड़कों में एक राघव भी था,,, जो कुछ बोल तो नहीं रहा था पर उसकी नज़रें नीलिमा पर ही गड़ी थीं इतनी कि वो उन घूरती नज़रों से असहज हो रही थी,,, जब तक नीलिमा की बारी आती कि टीचर आ गए और उन्होंने लड़कों को डांट कर क्लासेज में भेज दिया।नीलिमा ने राहत की सांस ली,,,, कभी कैंटीन में, तो कभी लाइब्रेरी में तो कभी कैंपस में राघव से मुलाकात हो ही जाती,,, अक्सर वो शुचि के साथ ही रहती थी,,, धीरे धीरे उनमें बातें होने लगी फिर मुलाकातें बढ़ी,,,तीनों अक्सर अपना समय साथ ही गुजारते थे,, पूरे कैंपस में ये तिकड़ी मशहूर थी,,,, राघव का फाइनल ईयर था,,, नीलिमा को महसूस होने लगा था कि शायद राघव उसकी ओर आकर्षित होने लगा है,,, वह भी राघव को पसंद करती थी,,,।शुचि उससे अक्सर कहती रहती थी कि अपने मन की बात बोल दे,,, पर नीलिमा असमंजस में थी वह तय नहीं कर पा रही थी कि क्या वो प्यार है या महज आकर्षण,,,,? फिर लड़की होकर वो कैसे पहल करे,,!! राघव को आगे बढ़कर उससे इज़हारे मोहब्बत करना चाहिए,,,, एक दिन तीनों कैंटीन में बैठे थे ,,,, शुचि आज भी उसे उकसा रही थी, "नीलू, बात कर न राघव से",,, पर नीलिमा स्वयं पहल नहीं करना चाह रही थी,,, उन लोगों ने अभी खाना शुरू ही किया था कि शुचि का फोन आ गया।अंदर नेटवर्क नहीं आ रहा था तो आवाज़ साफ नहीं आ रही थी इसलिए वो फ़ोन लेकर बाहर बात करने आ गई अब नीलिमा और राघव अकेले थे,,,। तभी शुचि घबराई हुई आई और बताया कि उसके पापा को हर्ट अटैक हुआ है चंडीगढ़ केअस्पताल में एडमिट हैं अभी जाना पड़ेगा,,, इतनी जल्दी ट्रैन का टिकट मिलना मुश्किल था बस से रात में अकेले दिल्ली से सफर करना ठीक नहीं था तो राघव ने अपनी कार से जाने का ऑफर दिया,,, नीलिमा को भी ये सुझाव अच्छा लगा,,, राघव ओर शुचि फौरन रवाना हो गए।नीलिमा को जरूरी असाइनमेंट करने थे तो वो नहीं गई उसने शुचि को कहा कि वो उसके असाइनमेंट भी पूरे कर देगी। "तू बस अंकल का ध्यान रखना,,,,।" *** *** दस दिन हो गए थे शुचि और राघव को गए हुए। दोनों में से किसी के भी फोन नही लग रहे थे। नीलिमा को बहुत चिंता हो रही थी।और किसी का नम्बर उसके पास था नहीं,,,,। पता करे तो कैसे इसी दुविधा में नीलिमा थी कि किसी अननोन नम्बर से कॉल आई,,,। उसने उठाया तो राघव का फ़ोन था। राघव ने बताया कि शुचि के पापा का देहांत हो गया,,,। राघव ने बताया कि उसका फोन कहीं खो गया था,,,वो किसी औऱ के नम्बर से कॉल कर रहा है,,,। नीलिमा ने कहा,मैं भी आती हूँ कल वहां,,," राघव ने कहा,"तुम रहने दो मैं दो चार दिन में आ जाऊँगा,,, फिर उसके बाद तुम आ जाना तब तक तुम उसके असाइनमेंट सबमिट कर दो और टीचर्स को उसके पापा के बारे में खबर कर दो,,,,।" एक हफ्ता हो गया पर राघव नहीं आया। उस नम्बर पर फ़ोन किया तो वो शुचि के किसी रिश्तेदार का नम्बर था जो चंडीगढ़ से जा चुके थे। शुचि का नम्बर बंद आ रहा था,,,। नीलिमा ने चंडीगढ़ जाने का विचार बनाया।उसने कॉलेज के ऑफिस से शुचि के घर का पता निकलवा लिया। *** *** चंडीगढ़ में नीलिमा शुचि के घर पहुँची तो देखा वहां ताला लगा हुआ है,,,। पड़ोसियों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वे अपने पैतृक गांव गए हैं,,, जिसके बारे में उन लोगों को नहीं पता था कि कहाँ है,,,,। उन लोगों को यहां आए हुए कुछ वर्ष ही हुए थे,,,। शिमला के आसपास कहीं उनका गांव है ऐसा उन लोगों ने बताया ,,,। "अब क्या करूं किसी का फोन भी नहीं लग रहा,,,।" शुचि की माँ का नम्बर पड़ोसी से लिया वो भी बंद आ रहा था,,। रात भी होने को आई थी वो बस पकड़ कर वापस दिल्ली आ गई। दिन,महीने साल गुजरते गए शुचि और राघव का कोई पता नहीं था। राघव का तो फाइनल ईयर था अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ कर दोनों कैसे और कहाँ गायब हो गए,,,? राघव के घर वालों ने पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई पर कोई नतीजा नहीं निकला,,,। आज पाँच साल बाद राघव मिला है अस्पताल में ...इस हालत में..। क्या हुआ होगा,...??इतने साल राघव कहाँ था...?? शुचि कहाँ है....?? कितने सवाल उसके दिमाग मे चल रहे थे पर जवाब सिर्फ राघव के पास थे,,,। वो उसके ठीक होने का इंतजार कर रही थी,,,। राघव अब ठीक होने लगा था उसके घरवाले भी आ गए,,। नीलिमा को उससे बात करने का मौका ही नहीं मिला,,,। हताश,उदास नीलिमा अपने केबिन में बैठी थी।तभी सुरेश(चपरासी)आया। उसने मेज की दराज से एक पत्र निकाल कर उसे दिया और बोला,"मैडम, तीन चार दिन पहले ये लेटर आया था पर मैं छुट्टी पर चला गया था तो किसी को बोल नहीं पाया कि ये खत आपको दे दे। सॉरी मैडम।" "कोई बात नहीं,"खत खोलते हुए नीलिमा ने कहा,,,। खत पर भेजने वाले का नाम नहीं लिखा था,,,। लिफाफे पर.."नीलिमा के लिए"' ..लिखा था,,,, उत्सुकतावश उसने ख़त खोला,,,। 'शुचि का खत है ये तो,,,।' उसकी बांछें खिल गईं पर मन ही मन वो बड़बड़ाने लगी,,, "खत कौन लिखता है आज के जमाने में!!पागल है ये लड़की भी।इतने सालों से कुछ अता पता नहीं है और अब ये मैडम खत भेज रही हैं,,,। मिलने दो फिर खबर लेती हूँ इसकी,,,।" वैसे मन ही मन खुश भी हो रही थी से नीलिमा अपनी खास सखी का खत पाकर। जल्दी जल्दी ख़त खोल कर पढ़ने लगी "प्यारी सखी नीलू,तुम ये खत पढ़ कर आश्चर्य चकित होगी कि इतने सालों बाद मैं तुझे खत क्यों लिख रही हूँ ,,,,? आज के ज़माने में खत कौन लिखता है,,,?है ना,,,?? पर क्या करूँ तुझसे बात करने की हिम्मत नहीं थी इसलिये अपनी भावनाओं को खत के माध्यम से कहने की हिम्मत जुटा पाई हूँ,,। इन पाँच वर्षों में मेरे साथ बहुत कुछ घट गया,,,। पापा के बारे में तो तुझे पता ही है,,।अब माँ भी नहीं रही इस दुनियां में।हाँ... नीलू..ये कड़वा सच है... मेरे जीवन में ग्रहण लग गया है जिसकी ज़िम्मेदार मैं खुद हूँ... !! तू कुछ समझ नहीं पा रही होगी न कि मैं ये क्या बकवास कर रही हूँ..? चल तुझे बताती हूँ सारी बात तफसील से,,,,, "पापा के देहांत के बाद मैं बहुत दुखी थी उस घड़ी में राघव ने मुझे व मेरी माँ को संभाला।पापा के जाने के बाद से ही माँ की तबियत भी खराब रहने लगी थी,,,। मैने राघव को कहा भी था कि वो दिल्ली वापस चला जाये पर वो नहीं माना,,,। उसने कहा कि मेरी माँ की तबियत में कुछ सुधार आ जाये फिर वो चला जायेगा,,,,। फिर पता नहीं किन कमजोर पलों में हम से एक गलती हो गई,,,। हम बहुत शर्मिंदा थे पर जो होना था वो हो चुका था ,,,पर यकीन मान नीलू, उस मनहूस घड़ी के बाद हमने कभी वो गलती नहीं दोहराई,,, और क्यों करते फिर से वही गलती,,,?तू और राघव एक दूसरे को प्यार करते हो,,,। राघव तो तुझे दिलो जान से चाहता है,,,। इसी आत्मग्लानि में वो तेरे सामने नहीं आया,,, औऱ मैं भी तुझसे कैसे नज़रें मिलाती,,,!!! अभी और सुन,,,,अभी तो और भी इम्तिहान आने बाकी थे मेरी ज़िन्दगी में,,,,,कुछ वक्त बाद मुझे पता कि मैं प्रेग्नेंट हूँ,,, मेरे पैरों के नीचे से मानो ज़मीं ही खिसक गई,,,। उसी दिन राघव दिल्ली के लिए रवाना होने वाला था,,,। मैंने राघव को ये खबर सुनाई तो वो उल्टे पाँव चला आया,,। हम इस बारे में बात कर ही रहे थे कि माँ ने सब सुन लिया,,,। और वो वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी।जब उन्हें होश आया तो वो मेरी और राघव की शादी का दबाब डालने लगीं,,, । हमने उन्हें बहला फुसला कर मना लिया कि हम कोर्ट मैरिज कर लेंगे,,।फिर एक दो दिन बाद हम दोनों उनके सामने जयमाला डाले खड़े हो गए और शादी के नकली पेपर दिखा दिए,,,,। माँ के सामने हम पति पत्नी की तरह रहने का दिखावा करने लगे,,।पर शायद माँ को हम पर शक होने लगा था कि हम उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं,,,। पापा के जाने का सदमा तो उनको लगा ही था ,,, मैंने एक सुंदर, प्यारी सी गुड़िया को जन्म दिया,,,। राघव उसे बहुत प्यार करता था। वो सिर्फ उस नन्ही परी का पापा था बस ...कुछ औऱ नहीं,,,। एक दिन माँ को हमारी नकली शादी की बात पता चल गई ।इस बात से उनको ऐसा सदमा लगा कि परी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही वो भी इस दुनियां से अलविदा कह गईं,,,। मैं कितनी बुरी...कितनी मनहूस...और अभागन हूँ ...जो मैंने अपनी माँ की जान ले ली ....तुझे भी धोखा दिया,,,,? पर यकीन मान नीलू,राघव आज भी तेरा है ,,,वो तुझसे बेइंतहा प्यार करता है,,,। पापा के दोस्त के बेटे ने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।राघव ने खुशी खुशी मेरी शादी विकास से करवा दी।,,,और स्वयं चंडीगढ़ के अस्पताल में फाइनल ईयर की पढ़ाई करने लगा,,,,। मैं यहाँ शिमला में अपने पति विकास के साथ बहुत खुश हूँ,,,, हाँ, परी के बारे में मेरे पति को कुछ नहीं पता ,,,और ये बात मै उन्हें बता भी नहीं सकती,,,। तू तो जानती है ना टिपिकल भारतीय मर्दों को,,,। राघव ने अभी तो परी को शिमला में अनाथाश्रम में रख छोड़ा है,,,।जिससे कि मैं उससे मिल सकूँ,,,। वो उससे नियमित रूप से मिलने आता रहता है,,,। मैं बहुत मजबूर हूँ ,,, अपनी बच्ची को अपना नहीं कह सकती,,,। छिप छिप के कभी कभार उससे मिल लेती हूँ,,,। तुझसे एक विनती है नीलू,,, हालाँकि मैं अब इस काबिल नहीं कि तुझसे कुछ मांगू ,,,,पर फिर भी तुझसे मांग रही हूं,,,, क्या तू मेरी परी की माँ बनेगी,,,,?क्या तू मुझे मेरे गुनाह के लिए माफ़ कर पायेगी,,,,? क्या तू राघव को अपना लेगी,,,? वो सिर्फ और सिर्फ तेरा है,,,। पता है इस गलती के लिए वो खुद को कभी माफ नहीं कर पाया ,,, और इसी गम में उसे हाई बी पी और दिल की बीमारी ने घेर लिया है,,,। ना ठीक से खाता पीता है ना वक़्त पर दवाई लेता है,,,,। पिछले एक महीने से उसका कोई अता पता नहीं है,,, । मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है,,,।प्लीज नीलू,उसके बारे में पता कर,, और हो सके तो मुझे भी बता देना,,, अगर तू मुझे माफ़ कर सके तो,,,,।" तेरी बहुत.… बहुत ...बुरी धोखेबाज़ ,,,, सखी,,,,(पता नहीं ये लिखने का मुझे हक है भी या नहीं),,,, ,,,शुचि,,, नीलिमा न जाने कब तक वो खत हाथ में लिए बैठी रही,, आँसुओ से खत गीला हो गया था,,।उसे होश ही नहीं था कि वह पिछले चार घण्टे से वहीं बैठी थी,,,।चपरासी केबिन में आया,,,। अंधेरा हो रहा था ,,, चपरासी ने लाइट जलाई तो डॉ नीलिमा को आंसुओं में डूबे देखा,,, उसने आवाज़ें लगाई पर नीलिमा ने नहीं सुनी ,,,,जब उसने कंधा पकड़ कर झकझोर कर हिलाया तब नीलिमा अपने होशोहवास में आई,,, उसने राघव के बारे में पूछा,,,।नीलिमा राघव के वार्ड की ओर भागी,,,। आज उसे कुछ कदम की दूरी भी मीलों के फासले के समान प्रतीत हो रही थी,,,। हाँफते हुए वह राघव के बेड के पास खड़ी हो गई,,,,। राघव अब काफी हद तक ठीक हो चुका था,,,। उसके घरवाले भी नहीं दिखाई दे रहे थे,,,, इस समय दवाई के असर की वजह से वह गहरी नींद सो रहा था,,,।अपनी उखड़ी हुई साँसे दुरुस्त करती हुई नीलिमा राघव के बेड के समीप पड़े स्टूल पर बैठ गई,,,। उसने राघव का हाथ अपने हाथ में ले लिया,,,, और धीमे स्वर में कहा,'आई लव यू राघव',,, अचानक राघव ने आँखे खोल दी,,,।नीलिमा एकदम से सकपका गई,,। राघव उसे अपने इतने करीब देख,और स्वयं के लिए नीलिमा की आँखों मे प्यार देख भावविभोर हो गया,,,,। उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे,,,। उसने कुछ कहने के लिए मुंह खोला, पर नीलिमा ने उसके होठों पर ऊँगली रख कर चुप करा दिया,,,, चुपके चुपके आज दो दिल मिल रहे थे,,,,,, एक सप्ताह बाद...... आज पूरे अस्पताल को दुल्हन सा सजाया गया था,,,। बाहर बोर्ड लगा था,,,, **नीलिमा वेड्स राघव** शुचि अपने पति के साथ खड़ी अपनी परी को प्यार से निहार रही थी जो इस समय डॉ नील की गोद में बैठी अपने पापा और नई माँ के ऊपर पुष्प बरसा रही थी।। मैं आशा करता हूँ की आपको ये ” Hp Video Status Ki Story” कहानी अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्।

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Hindi Info भारत के 5 सबसे अनूठे गांव ये है

ये है भारत के 5 सबसे अनूठे गांव, नंबर 1 में तो है अपना संविधान. नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, आज हम आपको भारत के 5 सबसे अनोखे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपने आप में अलग ही देश-विदेश में पहचान रखते हैं, तो चलिए आज की चर्चा शुरू करते हैं। 5. पिपलांत्री यह भारत का सबसे विकसित गांव के तौर पर जाना जाता है। इस गांव के विकास को डेनमार्क देश की किताबों में भी पढ़ाया जाता है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर लोग इस गांव के बारे में नहीं जानते हैं। यह गांव राजस्थान के उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर है और इस गांव की जनसंख्या करीब 1500 लोगों की है। इस गांव में पानी, पेड़ और बेटी बचाने के लिए देशभर में सबसे शानदार उदाहरण पेश किया है। इस गांव में इजरायल तकनीक पर आधारित कई प्रकार हाईटेक खेती की जाती है। लड़कियों के जन्म पर इस गांव में 111 पेड़ लगाने होते हैं और इनकी शादी का सारा खर्च पूरा गांव मिलकर उठाता है। 4. मावल्यान्नॉंग इस गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव की उपाधि मिली हुई है। यह गांव स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से कई सालों पहले स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है। यह गांव भगवान का बगीचे के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह गांव भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर पर मेघालय राज्य में स्थित है। आपको अपनी जिंदगी में एक बार इस गांव में जरूर जाकर आना चाहिए। 3. कोडिन्ही केरल में स्थित यह गांव जुड़वाँ बच्चों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। आपको यहां पर हर घर में एक जुड़वाँ बच्चा जरूर मिल जाएगा। यहां जुड़वाँ बच्चा पैदा होने की क्या वजह है, अभी तक कोई भी असली कारण नहीं खोज पाया है। आपको यहां पर नवजात शिशु लेकर 60 साल के बुड्ढे तक का डबल रोल मिल जाएगा। यह गांव वाले इन जुड़वाँ बच्चों की वजह से कितने कंफ्यूज होते होंगे यह तो अब बस ऊपरवाला ही जाने। 2. करचोंड आज भी भारत में अंतरजातीय विवाह या फिर शादी से पहले लड़की से मिलने की वजह कितनी ही समस्या और लड़ाई दंगे हो जाते हैं। भारतीय न्यायालय ने हाल ही में लोगों को लव इन रिलेशनशिप में रहने के अधिकार प्रदान किए हैं लेकिन यह गांव इस मामले में हजारों साल पहले से ही आगे हैं। गुजरात के सेलवास से 30 किलोमीटर दूर स्थित 3 हजार आदिवासी लोगों के इस गांव में आप बेरोकटोक किसी भी लड़की के साथ लव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। अक्सर लोगों की गांव के प्रति गलत धारणाएं ही रहती है लेकिन यह गांव शहर से भी आगे है। 1. मलाणा हिमाचल प्रदेश के मनाली शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव अपने आप में कई खूबियों से भरा हुआ है। अगर आपको इस गांव की पहली खूबी बताई जाए तो इस गांव में कनाशी भाषा बोली जाती है जो केवल विश्व में केवल इसी गांव के लोग जानते हैं और यह इसे ना ही किसी बाहरी लोगों को सिखाते हैं। दूसरी बात इस गांव में मलाणा क्रीम मिलती है जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भांग के तौर पर जानी जाती है। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं और यह दुनिया का सबसे पुरानी लोकशाही गांव है। इस गांव में खुद का संविधान और संसद है जिसमें ये निचले सदन को कनिष्थाँग और उच्च सदन को जयेशथाँग कहते है। गांव में साल भर भीड़ रहती है लेकिन यहां के लोग अपने ही मस्ती में रहते हैं। खैर, यह थे भारत के कुछ अनूठे गांव, अगर आपके गांव या आसपास गांव में भी कुछ अनूठी बात है उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Story क्या आपने देखी है रानी की बावड़ी

क्या आपने देखी है रानी की बावड़ी? नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, गुजरात में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटक स्थल हैं, जिसे देखने का मोह लोग छोड़ नहीं पाते। इन्हीं पर्यटक स्थलों में एक बेहद दिलचस्प जगह है, रानी की बावड़ी, जिसे रानी की वाव का नाम भी दिया गया है। इतिहास में पानी के कुंड को बावली कहा जाता था, इसीलिए इसका नाम रानी की बावड़ी रखा गया। सरस्वती नदी के मुहाने पर बसे पाटन में यह खूबसूरत कला का नमूना कई सदियों से खड़ा हुआ है। गुजरात के पाटन को इतिहास में अन्हिलपुर के नाम से जाना जाता था जो गुजरात की राजधानी हुआ करती थी। यही मौजूद है वास्तुकला और ऐतिहासिक सुंदरता का खूबसूरत नमूना। आइये जानते हैं इस बावड़ी के बारे में दिलचस्प बातें। क्यों कहा जाता है इसे रानी की बावड़ी? यह बावड़ी बेहद अलग और अद्वितीय है जैसा कि आप सभी जानते हैं भारत में कई ऐतिहासिक स्थल पुराने राजाओं द्वारा बनवाए गए हैं। असल में रानी की बावड़ी सोलंकी राज के राजा भीमदेव की पहली पत्नी रानी उदयामति ने सन 1063 में बनवाई थी। यह बावड़ी बेहद अलग और अद्वितीय है। क्योंकि इसका निर्माण रानी ने करवाया था, इसीलिए इसे रानी की बावड़ी का नाम दिया गया है। आम तौर पर बावड़ियां एक ही तरह से बनाई जाती है, लेकिन इस कुंड को मंदिर का रूप दिया गया, जिसमें सात अलग-अलग मंज़िलें बनी हुई है। इसके चारों ओर खूबसूरत नक्काशी और पौराणिक और धार्मिक चित्रों को उकेरा गया है। इन शैलियों में सोलंकी वंश की कला को दर्शाया गया है, जो दिखने में बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। लंबी लंबी सीढ़ियां और बीच में पानी का कुंड बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। चमत्कारी पानी की बावड़ी सुरंग के साथ बावड़ी आपको जानकर हैरानी होगी कि हर ऐतिहासिक स्मारक का एक रहस्य भी होता है। ऐसा ही रानी की वाव के साथ भी है। इसकी अंतिम सीढ़ी पर बना हुआ है एक ख़ास दरवाज़ा, जहां से 30 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है, जो यहां से सीधी सिद्धपुर गांव में जाकर खुलती है। यह गांव पाटन के पास ही बसा हुआ है। इस पानी को पीने से मौसमी बुखार और कई बीमारियां ठीक हो जाया करती थी उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Info अकबर की मृत्यु के बाद अकबर के शव के साथ ऐसा किया

अकबर की मृत्यु के बाद अकबर के शव के साथ ऐसा किया गया जिसे आप नही जानते, जानकर होगी हैरानी नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, दोस्तों राजा अकबर को भारतीय इतिहास का एक महान राजा माना जाता है राजा अकबर ने अपने शासनकाल में काफी ज्यादा सामाजिक कार्य किया था जिसके कारण राजा अकबर को एक अच्छा शासक माना जाता है राजा अकबर के शासन काल में प्रजा काफी ज्यादा सुखी हुआ करती थी। अकबर ने अपने शासनकाल में सभी धर्मों का सम्मान किया था इसके अलावा अकबर के शासनकाल में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता था। अकबर ने अपने शासनकाल में कई बड़े-बड़े कार्य करवाए थे। अकबर के शासनकाल में भारत ने काफी ज्यादा तरक्की की थी लेकिन दोस्तों क्या आप लोगों को मालूम है कि जब राजा अकबर इतना बड़ा महान व्यक्ति था तो उसकी जब मृत्यु हुई तब उसके सब को राजकीय सम्मान के साथ क्यों नहीं जलाया गया। आज हम आप लोगों को बताने वाले हैं कि आखिर राजा अकबर की मृत्यु के बाद उसके शव के साथ क्या किया गया था। दोस्तों जब राजा अकबर की मृत्यु हुई थी उनके शव को बिना किसी राजकीय सम्मान और बिना अंतिम संस्कार के दुर्ग के पीछे दीवार तोड़कर सिकंदरा में दफना दिया। इसका कारण यह था कि उस समय अफगान के लोग मुगल साम्राज्य पर हावी हो रहे थे जिसके कारण मुगल साम्राज्य के लोग चाहते थे कि राजा अकबर की मृत्यु के बारे में अफगान लोगों को मालूम ना हो। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Real Hindi Stories प्यार या संस्कार

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, अदिति ने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु महानगर के एक नामीगिरमी कालेज में मैनेजमैंट कोर्स में ऐडमिशन लिया तो मानो उस के सपनों को पंख लग गए. उस के जीवन की सोच से ले कर संस्कार तथा सपनो से ले कर लाइफस्टाइल सभी तेजी से बदल गए. अदिति के जीवन में कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीकठाक चलता रहा, लेकिन अचानक उस के जीवन में उस के ही कालेज के एक छात्र प्रतीक की दस्तक के कारण जो मोड़ आया वह उस पहले प्यार के बवंडर से खुद को सुरक्षित नहीं रख पाई. अदिति बहुत जल्दी प्रतीक के प्यार के मोहपाश में इस तरह जकड़ गई मानो वह पहले कभी उस से अलग और अनजान नहीं थी. जवानी की दहलीज पर पहले प्यार की अनूठी कशिश में अदिति अपने जीवन के बीते दिनों तथा परिवार की चाहतों को पूरी तरह से विस्मृत कर चुकी थी. प्रतीक के प्यार में सुधबुध खो बैठी अदिति अपने सब से खूबसूरत ख्वाब के जिस रास्ते पर चल पड़ी वहां से पीछे मुड़ने का कोईर् रास्ता न तो उसे सूझा और न ही वह उस के लिए तैयार थी. गरमी की छुट्टी में जब अदिति अपने घर वापस आई तो उस के बदले हावभाव देख कर उस की अनुभवी मां को बेटी के बहके पांवों की चाल समझते देर नहीं लगी. जल्दी ही छिपे प्यार की कहानी किसी आईने की तरह बिलकुल साफ हो गई और मां को पहली बार अपनी गुडि़या सरीखी मासूम बेटी अचानक ही बहुत बड़ी लगने लगी. अदिति ने अपनी मां से प्रतीक से शादी के लिए शुरू में तो काफी विनती की, लेकिन मां के इनकार को देखते हुए वह जिद पर अड़ गई. अदिति के पिता तो उसी वक्त गुजर गए थे जब अदिति ठीक से चलना भी नहीं सीख पाई थी. मां और बेटी के अलावा उस छोटे से संसार में प्रतीक के प्रवेश की तैयारी के लिए एक बड़ा द्वंद्व और दुविधा का जो माहौल तैयार हो गया था वह सब के लिए दुखदायी था, जिस की मद्घिम लौ में मां को अपनी बेटी के चिरपोषित सपनों की दुनिया जल जाने का मंजर साफ नजर आ रहा था. ‘‘मां, तुम समझती क्यों नहीं हो? मैं प्रतीक से सच्चा प्यार करती हूं. वह ऐसावैसा लड़का नहीं है. वह अच्छे घर से है और निहायत शरीफ है. क्या बुरा है, यदि मैं उस से शादी करना चाहती हूं,’’ अदिति ने बड़े साफ लहजे में अपनी मां को अपने विचारों से अवगत कराया. मां अपनी बेटी के इस कठोर निर्णय से काफी आहत हुईं लेकिन खुद को संयमित करते हुए अदिति को अपने सांस्कारिक मूल्यों तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों का एहसास कराने की काफी कोशिश करती हुई बोलीं, ‘‘बेटी, मैं सबकुछ समझती हूं, लेकिन अपने भी कुछ संस्कार होते हैं. तुम्हारे पापा ने तुम्हारे लिए क्या सपने संजो रखे थे लेकिन तुम उन सपनों का इतनी जल्दी गला घोंट दोगी, इस बारे में तो मैं ने सपने में भी नहीं सोचा था. अपनी जिद छोड़ो और अभी अपने भविष्य को संवारो. प्यार मुहब्बत और शादी के लिए अभी बहुत वक्त पड़ा है.’’ ‘‘मां, आप समझती नहीं हैं, प्यार संस्कार नहीं देखता, यह तो जीवन में देखे गए सपनों का प्रश्न होता है. मैं ने प्रतीक के साथ जीवन के न जाने कितने खूबसूरत सपने देखे हैं, लेकिन मैं यह भूल गई थी कि मेरे इंद्रधनुषी सपनों के पंख इतनी बेरहमी से कुतर दिए जाएंगे. आखिर, तुम्हें मेरे सपनों के टूटने से क्या?’’ ‘‘बेटी, सच पूछो तो प्रतीक के साथ तुम्हारा प्यार केवल तुम्हारे जीवन के लिए नहीं है. जीवन के रंगीन सपनों के दिलकश पंख पर बेतहाशा उड़ने की जिद में अपनों को लगे जख्म और दर्द के बारे में क्या तुम ने कभी सोचा है? प्यार का नाम केवल अपने सपनों को साकार होते देखनाभर नहीं है. वह सपना सपना ही क्या जो अपनों के दर्द की दास्तान की सीढ़ी पर चढ़ कर साकार किया गया हो. ‘‘आज तुम्हें मेरी बातें बचकानी लगती होंगी, लेकिन मेरी मानो जब कल तुम भी मेरी जगह पर आओगी और तुम्हारे अपने ही इस तरह की नासमझी की बातों को मनवाने के लिए तुम से जिद करेंगे तो तुम्हें पता चलेगा कि दिल में कितनी पीड़ा होती है. मन में अपनों द्वारा दिए गए क्लेश का शूल कितना चुभता है.’’ अदिति अपनी मां के मुंह से इस कड़वी सचाई को सुन कर थोड़ी देर के लिए सन्न रह गई. उसे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे किसी ने उस की दुखती रग पर अनजाने ही हाथ रख दिया हो. उस के जेहन में अनायास ही बचपन से ले कर अब तक अपनी मां द्वारा उस के लालनपालन के साथसाथ पढ़ाई के खर्चे के लिए संघर्ष करने की कहानी का हर दृश्य किसी सिनेमा की रील की भांति दौड़ता चला गया. अनायास ही उस की आंखें भर आईं. मन पर भ्रम और दुविधा की लंबे अरसे से पड़ी धूल की परत साफ हो चुकी थी और सबकुछ किसी शीशे की तरह साफसाफ प्रतीत होने लगा था. लेकिन बीते हुए कल के उस दर्र्द के आंसू को अपनी मां से छिपाते हुए वह भाग कर अपने कमरे में चली गई. अपनी मां की दिल को छू लेने वाली बातों ने अदिति को मानो एक गहरी नींद से जगा दिया हो. छुट्टियों के बाद अदिति अपने कालेज वापस आ गई और जीवन फिर परिवर्तन के एक नए दौर से गुजरने लगा. कालेज वापस लौटने के बाद अदिति गुमसुम रहने लगी. प्रतीक से भी वह कम ही बातें करती थी, बल्कि उस ने उसे शादी के बारे में अपनी मां की मरजी से भी अवगत करा दिया और इस तरह मंजिल तक पहुंचने से पहले ही दोनों की राहें अलग अलग हो गईं. कालेज के अंतिम वर्ष में कैंपस सिलैक्शन में प्रतीक को किसी मल्टीनैशनल कंपनी में ट्रेनी मैनेजर के रूप में यूरोप का असाइनमैंट मिला और अदिति ने किसी दूसरी मल्टीनैशनल कंपनी में क्वालिटी कंट्रोल ऐग्जीक्यूटिव के रूप में अपनी प्लेसमैंट की जगह बेंगलुरु को ही चुन लिया. अदिति अपनी मां के साथ इस मैट्रोपोलिटन सिटी में रह कर जीवन गुजारने लगी. सबकुछ ठीकठाक चल रहा था. इसी बीच कंपनी ने अदिति को 1 वर्ष के फौरेन असाइनमैंट पर आस्ट्रेलिया भेजने का निर्णय लिया. अदिति अपनी मां के साथ जब आस्टे्रलिया के सिडनी शहर आई तो संयोग से वहीं पर एक दिन किसी शौपिंग मौल में उस की प्रतीक से मुलाकात हो गई. अदिति के लिए यह एक सुखद लमहा था, जिस की नरम कशिश में वर्षों पूर्व के संबंधों की यादें बड़ी तेजी से ताजी हो गईं. लेकिन भविष्य में इस संबंध के मुकम्मल न होने के भय ने उस के पैर वापस खींच लिए. प्रतीक अपने क्वार्टर में अकेला रहता था और अकसर हर रोज शाम के वक्त वह अदिति के घर पर आ जाया करता था. मां को भी अपने घर में अपने देश के एक परिचित के रूप में प्रतीक का आना जाना अच्छा लगता था, क्योंकि परदेश में उस के अलावा सुख दुख बांटने वाला और कोई भी तो नहीं था. अचानक एक दिन औफिस से घर लौटते वक्त अदिति की औफिस कार की किसी प्राइवेट कार के साथ टक्कर हो गई और अदिति को सिर में काफी चोट आई. महीनेभर तक अदिति हौस्पिटल में ऐडमिट रही और इस दौरान उस का और उस की मां का ध्यान रखने वाला प्रतीक के अलावा और कोई नहीं था. प्रतीक ने मुसीबत की इस घड़ी में अदिति और उस की मां का भरपूर ध्यान रखा और इसी बीच अदिति और प्रतीक फिर से कब एकदूसरे के इतने करीब आ गए कि उन्हें इस का पता ही नहीं चला. अदिति का यूरोप असाइनमैंट खत्म होने वाला था और उसे अब अपने देश वापस आना था. अदिति और उस की मां को छोड़ने के लिए प्रतीक भी बेंगलुरु आया था. प्रतीक के सेवाभाव से अदिति की मां अभिभूत हो गई थीं. प्रतीक सिडनी वापस जाने की पूर्व संध्या पर अपने मम्मीडैडी के साथ अदिति से मुलाकात करने आया था. अदिति का व्यवहार तथा शालीनता देख कर प्रतीक के पेरैंट्स काफी खुश हुए. प्रतीक की अगले दिन फ्लाइट थी. एयरपोर्ट पर बोर्डिंग के समय जब अदिति का फोन आया तो उस के दिलोदिमाग में एक अजीब हलचल मच गई. पुराने प्यार की सुखद और नरम बयार में प्रतीक के मन का कोनाकोना सिहर उठा. प्रतीक ने अपनी फ्लाइट कैंसिल करवा ली. उस ने अपनी कंपनी को बेंगलुरु में ही उसे शिफ्ट करने के लिए रिक्वैस्ट भेज दी जो कुछ दिनों में अपू्रव भी हो गई. अदिति की मां प्रतीक के इस फैसले से काफी प्रभावित हुईं. अदिति हमेशा के लिए अब प्रतीक की हो गई थी और वह मां के साथ ही बेंगलुरु में रहने लगी थी. प्रतीक अपनी खुली आंखों से अपने सपने को अपनी बांहों में पा कर खुशी से फूले नहीं समा रहा था. अदिति के पांव भी जमीं पर नहीं पड़ रहे थे. उसे आज जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि धरती की तरह सपनों की दुनिया भी गोल होती है और सितारे भले ही टूटते हों, लेकिन यदि विश्वास मजबूत हो तो सपने कभी नहीं टूटते. उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Real Stories भोले भक्त की भक्ति

एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था। एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम में आया और बोला कि बाबा आप सब का ध्यान रखते है, मेरा इस दुनिया मेँ कोई नही है तो क्या मैँ यहाँ आपके आश्रम में रह सकता हूँ ? बालक की बात सुनकर संत बोले बेटा तेरा नाम क्या है ? उस बालक ने कहा मेरा कोई नाम नहीँ हैँ। तब संत ने उस बालक का नाम रामदास रखा और बोले की अब तुम यहीँ आश्रम मेँ रहना। रामदास वही रहने लगा और आश्रम के सारे काम भी करने लगा। उन संत की आयु 80 वर्ष की हो चुकी थी। एक दिन वो अपने शिष्यो से बोले की मुझे तीर्थ यात्रा पर जाना हैँ तुम मेँ से कौन कौन मेरे मेरे साथ चलेगा और कौन कौन आश्रम मेँ रुकेगा ? संत की बात सुनकर सारे शिष्य बोले की हम आपके साथ चलेंगे.! क्योँकि उनको पता था की यहाँ आश्रम मेँ रुकेंगे तो सारा काम करना पड़ेगा इसलिये सभी बोले की हम तो आपके साथ तीर्थ यात्रा पर चलेंगे। अब संत सोच मेँ पड़ गये की किसे साथ ले जाये और किसे नहीँ क्योँकि आश्रम पर किसी का रुकना भी जरुरी था। बालक रामदास संत के पास आया और बोला बाबा अगर आपको ठीक लगे तो मैँ यहीँ आश्रम पर रुक जाता हूँ। संत ने कहा ठीक हैँ पर तुझे काम करना पड़ेगा आश्रम की साफ सफाई मे भले ही कमी रह जाये पर ठाकुर जी की सेवा मे कोई कमी मत रखना। रामदास ने संत से कहा की बाबा मुझे तो ठाकुर जी की सेवा करनी नहीँ आती आप बता दिजिये के ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है ? फिर मैँ कर दूंगा। संत रामदास को अपने साथ मंदिर ले गये वहाँ उस मंदिर मे राम दरबार की झाँकी थी। श्रीराम जी, सीता जी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी थे. संत ने बालक रामदास को ठाकुर जी की सेवा कैसे करनी है सब सिखा दिया। रामदास ने गुरु जी से कहा की बाबा मेरा इनसे रिश्ता क्या होगा ये भी बता दो क्योँकि अगर रिश्ता पता चल जाये तो सेवा करने मेँ आनंद आयेगा। उन संत ने बालक रामदास कहा की तू कहता था ना की मेरा कोई नहीँ हैँ तो आज से ये राम जी और सीता जी तेरे माता-पिता हैँ। रामदास ने साथ मेँ खड़े लक्ष्मण जी को देखकर कहा अच्छा बाबा और ये जो पास मेँ खड़े है वो कौन है ? संत ने कहा ये तेरे चाचा जी है और हनुमान जी के लिये कहा की ये तेरे बड़े भैय्या है। रामदास सब समझ गया और फिर उनकी सेवा करने लगा। संत शिष्योँ के साथ यात्रा पर चले गये। आज सेवा का पहला दिन था, रामदास ने सुबह उठकर स्नान किया ,आश्रम की साफ़ सफाई की,और भिक्षा माँगकर लाया और फिर भोजन तैयार किया फिर भगवान को भोग लगाने के लिये मंदिर आया। रामदास ने श्री राम सीता लक्ष्मण और हनुमान जी आगे एक-एक थाली रख दी और बोला अब पहले आप खाओ फिर मैँ भी खाऊँगा। रामदास को लगा की सच मेँ भगवान बैठकर खायेंगे. पर बहुत देर हो गई रोटी तो वैसी की वैसी थी। तब बालक रामदास ने सोचा नया नया रिश्ता बना हैँ तो शरमा रहेँ होँगे। रामदास ने पर्दा लगा दिया बाद मेँ खोलकर देखा तब भी खाना वैसे का वैसा पडा था। अब तो रामदास रोने लगा की मुझसे सेवा मे कोई गलती हो गई इसलिये खाना नहीँ खा रहेँ हैँ ! और ये नहीँ खायेंगे तो मैँ भी नहीँ खाऊँगा और मैँ भूख से मर जाऊँगा..! इसलिये मैँ तो अब पहाड़ से कूदकर ही मर जाऊँगा। रामदास मरने के लिये निकल जाता है तब भगवान राम जी हनुमान जी को कहते हैँ हनुमान जाओ उस बालक को लेकर आओ और बालक से कहो की हम खाना खाने के लिये तैयार हैँ। हनुमान जी जाते हैँ और रामदास कूदने ही वाला होता हैँ की हनुमान जी पीछे से पकड़ लेते हैँ और बोलते हैँ क्याँ कर रहे हो? रामदास कहता हैँ आप कौन ? हनुमान जी कहते है मैँ तेरा भैय्या हूँ इतनी जल्दी भूल गये ? रामदास कहता है अब आये हो इतनी देर से वहा बोल रहा था की खाना खा लो तब आये नहीँ अब क्योँ आ गये ? तब हनुमान जी बोले पिता श्री का आदेश हैँ अब हम सब साथ बैठकर खाना खायेँगे। फिर राम जी, सीता जी, लक्ष्मण जी , हनुमान जी साक्षात बैठकर भोजन करते हैँ। इसी तरह रामदास रोज उनकी सेवा करता और भोजन करता। सेवा करते 15 दिन हो गये एक दिन रामदास ने सोचा घर मैँ ५ लोग हैं,सारा काम में ही अकेला करता हुँ ,बाकी लोग तो दिन भर घर में आराम करते है.मेरे माँ, बाप ,चाचा ,भाई तो कोई काम नहीँ करते सारे दिन खाते रहते हैँ. मैँ ऐसा नहीँ चलने दूँगा। रामदास मंदिर जाता हैँ ओर कहता हैँ पिता जी कुछ बात करनी हैँ आपसे।राम जी कहते हैँ बोल बेटा क्या बात हैँ ? रामदास कहता हैँ की घर में मैं सबसे छोटा हुँ ,और मैं ही सब काम करता हुँ।अब से मैँ अकेले काम नहीँ करुंगा आप सबको भी काम करना पड़ेगा,आप तो बस सारा दिन खाते रहते हो और मैँ काम करता रहता हूँ अब से ऐसा नहीँ होगा। राम जी कहते हैँ तो फिर बताओ बेटा हमेँ क्या काम करना है?रामदास ने कहा माता जी (सीताजी) अब से रसोई आपके हवाले. और चाचा जी (लक्ष्मणजी) आप घर की साफ़ सफाई करियेगा. भैय्या जी (हनुमान जी)शरीर से मज़बूत हैं ,जाकर जंगल से लकड़ियाँ लाइयेंगे. पिता जी (रामजी) आप बाज़ार से राशन लाइए और घर पर बैठकर पत्तल बनाओँगे। सबने कहा ठीक हैँ।मैंने बहुत दिन अकेले सब काम किया अब मैं आराम करूँगा. अब सभी साथ मिलकर काम करते हुऐँ एक परिवार की तरह सब साथ रहने लगेँ। एक दिन वो संत तीर्थ यात्रा से लौटे तो देखा आश्रम तो शीशे जैसा चमक रहा है, वो बहुत प्रसन्न हुए.मंदिर मेँ गये और देखा की मंदिर से प्रतिमाऐँ गायब हैँ. संत ने सोचा कहीँ रामदास ने प्रतिमा बेच तो नहीँ दी ? संत ने रामदास को बुलाया और पूछा भगवान कहा गये रामदास भी अकड़कर बोला की मुझे क्या पता हनुमान भैया जंगल लकड़ी लाने गए होंगे,लखन चाचा झाड़ू पोछा कर रहे होंगे,पिताजी राम पत्तल बन रहे होंगे माता सीता रसोई मेँ काम कर रही होंगी. संत बोले ये क्या बोल रहा ? रामदास ने कहा बाबा मैँ सच बोल रहा हूँ जब से आप गये हैँ ये चारोँ काम मेँ लगे हुऐँ हैँ। वो संत भागकर रसोई मेँ गये और सिर्फ एक झलक देखी की सीता जी भोजन बना रही हैँ राम जी पत्तल बना रहे है और फिर वो गायब हो गये और मंदिर मेँ विराजमान हो गये। संत रामदास के पास गये और बोले आज तुमने मुझे मेरे ठाकुर का दर्शन कराया तू धन्य हैँ। और संत ने रो रो कर रामदास के पैर पकड़ लिये…! रामदास जैसे भोले,निश्छल भक्तो की भक्ति से विवश होकर भगवान को भी साधारण मनुष्य की तरह जीवन व्यतीत करने आना पड़ता है. जय श्री राम उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.