Amazing Places ये हैं क्षेत्रफल की दृष्टि से दुनिया के 10 सबसे बड़े देश

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दुनिया के 10 क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े देश ये हैं नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, दुनिया बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें मालूम नहीं है कि चेत्रफल की दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा देश कौन सा है आज हम आप लोगों को छेत्रफल की दृष्टि से दुनिया के 10 सबसे बड़े देशों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए दोस्तों जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े देशों के बारे। 10. अल्जीरिया दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से अल्जीरिया दुनिया का दसवां सबसे बड़ा देश है। इस देश का कुल क्षेत्रफल 23.81 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 9. कजाकिस्तान दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से कजाकिस्तान दुनिया का 9वां सबसे बड़ा देश है। इस देश का कुल क्षेत्रफल लगभग 27.24 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 8. अर्जेंटीना दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से अर्जेंटीना दुनिया का आठवां सबसे बड़ा देश माना जाता है। अर्जेंटीना का कुल क्षेत्रफल 27.80 लाख वर्ग किलोमीटर है। 7. भारत दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश माना जाता है। भारत का कुल क्षेत्रफल लगभग 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 6. ऑस्ट्रेलिया दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से आस्ट्रेलिया दुनिया का छठवां सबसे बड़ा देश माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया का कुल क्षेत्रफल 77.41 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 5. ब्राजील दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से ब्राजील दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा देश माना जाता है। ब्राजील का कुल क्षेत्रफल पर 85.14 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 4. चीन क्षेत्रफल की दृष्टि से चीन दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश माना जाता है। चीन का कुल क्षेत्रफल 95.96 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 3. अमेरिका दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से अमेरिका दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। अमेरिका का कुल क्षेत्रफल 98.26 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 2. कनाडा दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इस देश का कुल क्षेत्रफल 99.84 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। 1. रूस दोस्तों क्षेत्रफल की दृष्टि से रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश माना जाता है। रूस का कुल क्षेत्रफल लगभग एक करोड़ 71 लाख वर्ग किलोमीटर के आसपास है। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

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अनोखा जुड़वा बच्चों का गांव - Hp Video Status

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, किसी शायर ने क्या खूब कहा है, ‘‘तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत, हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं...’’ लेकिन केरल में एक गांव ऐसा है जो इस बात को झूठ साबित कर रहा है क्योंकि यहां चार सौ से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके जुड़वां चेहरे इस गांव में ही मौजूद हैं। केरल के कोच्चि शहर से करीब 150 किलोमीटर के फासले पर स्थित कोडिन्ही गांव के कारण पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सकते में हैं कि ऐसा क्या है इस गांव की आबो हवा में कि यहां पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों का औसत सारी दुनिया के औसत से सात गुना ज्यादा है।  मल्लापुरम जिले में तिरूरंगाडी कस्बे से सटे इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों की तादाद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तकरीबन दो हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के हर घर में जुड़वां बच्चे हैं। यहां नवजात जुड़वां बच्चों से लेकर बुजुर्ग जुड़वां तक मौजूद हैं। वैज्ञानिक इस राज समझने में लगे हैं कि इस गांव में दुनिया में जुड़वां बच्चों के औसत से आखिर सात गुना ज्यादा जुड़वां बच्चे आखिर कैसे पैदा होते हैं। आम तौर पर दुनिया भर में 1,000 में मात्र छह ही जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं, जबकि यहां हर 1,000 बच्चों में 42 जुड़वां पैदा होते हैं।  गांव में प्रवेश करते ही नीले रंग के एक साइनबोर्ड पर लिखा है कि भगवान के अपने जुड़वां गांव, कोडिन्ही में आपका स्वागत है। दुनियाभर में इस शहर को जुड़वां गांव के नाम से ही जाना जाता है।  इस गांव की 85 फीसदी आबादी मुस्लिम है, लेकिन ऐसा नहीं कि हिन्दू परिवारों में जुड़वां पैदा नहीं होते। स्थानीय लोग बताते हैं कि जुड़वां बच्चों का सिलसिला यहां करीब 60 से 70 साल पहले शुरू हुआ। गांव के सरपंच का कहना है कि किसी दूसरे गांव की लड़की यहां ब्याह कर आती है तो उनके भी जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। गांव में रहने वाली पथूटी और कुन्ही पथूटी सबसे ज्यादा उम्र की जुड़वां बहनें हैं। इनकी उम्र करीब 70 साल है और वे इसे किसी करिश्मे से कम नहीं मानतीं।  इस गुत्थी को समझने के लिए कुछ समय पहले भारत, जर्मनी और ब्रिटेन का एक संयुक्त अध्ययन दल यहां आया था और उन्होंने यहां के लोगों के डीएनए का अध्ययन करने के लिए कुछ नमूने एकत्र किए। इसी तरह बहुत से दल यहां आते हैं और यहां के लोगों के चेहरे मोहरे, यहां की आबो हवा, खान पान और अन्य तमाम तरह के अध्ययन करते हैं, लेकिन जुड़वां बच्चे पैदा होने की कोई वजह आज तक मालूम नहीं हो पाई। गांव में ही रहने वाली 17 बरस की सुमायत और अफसायत देखने में एकदम एक जैसी हैं। मां दोनो को कभी एक जैसे कपड़े नहीं पहनने देती और हमेशा उन्हें कपड़ों से पहचानने की कोशिश करती है। खेल के मैदान पर भी अकसर जुड़वां बच्चों के कारण झगड़ा हो जाता होगा।  केरल के कोडिन्ही जैसे दुनिया में दो और गांव हैं, नाइजीरिया का इग्बो ओरा और ब्राजील का कैंडिडो गोडोई। यहां भी वैज्ञानिकों ने जुड़वां बच्चों की प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। नाइजीरिया में पाया गया कि वहां मिलने वाली एक सब्जी के छिलके में रसायन की अधिक मात्रा के कारण ऐसा हुआ। वहीं ब्राजील वाले मामले में रिसर्चरों को कहना है कि उस समुदाय में सब आपस में ही शादी करते हैं और वहां शायद इसलिए ऐसा होता है। लेकिन कोडिन्ही का मामला अब भी रिसर्चरों के लिए चुनौती बना हुआ है।  उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

उड़ता समुन्द्री जहाज फ्लाइंग डचमैन का रहस्य - Hp Video Status

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे,फ्लाइंग डचमैन एक ऐसा जहाज जिसकी परछाई पानी में नहीं हवा में उलटी दिखाई देती है! अफ्रीका के तटीय समुन्द्र में जहाज पर नाविक ईश्वर से मौसम खराब ना होने की प्रार्थना करते हैं इसलिए नहीं कि ये नाविक तूफानों से डरते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि मौसम खराब होने पर उन्हें "फ्लाइंग डचमैन" दिखाई देता है और इस जहाज का दिखना एक अभिशापित भविष्यवाणी है जो किसी की मौत के साथ पूरी होती है। १७ वीं सदी की मिथक लोककथाओं के मुताबिक़ फ्लाइंग डचमैन एक ऐसा भूतिया जहाज है जो कभी बंदरगाह तक नहीं पहुँच पाया। इन मिथक कथाओं के अनुसार इस भूतिया जहाज को तेज रोशनी फैंकने वाले जहाज के तौर पर देखा जाता है और जब ये रोशनी किसी को दिखाई देती है तो वो जल्द ही मौत की नींद में सो जाता है। उद्गम-: समय समय पर कई लेखकों ने अपनी किताबों में इस भूतिया जहाज का जिक्र किया है। सबसे पुराना मौजूदा संस्करण १७९० में जॉन मैकडोनाल्ड द्वारा लिखित किताब है,जिसमे वो लिखता है कि –: नाविकों ने बताया कि तूफानी मौसम में उन्होंने फ्लाइंग डचमैन को साक्षात देखा था। ये कहानी इस तरह है कि लबादा ओढे डचमैन को खराब मौसम में अपनी नाव को बंदरगाह तक ले जाने के लिए कोई पायलट नहीं मिला और उसकी नाव खो गई और तबसे खराब मौसम में उसकी झलक नज़र आती है। अगला संपादित संस्मण १७९५ में जॉर्ज बर्रिन्गटन द्वारा लिखित "न्यू साउथ वैल्स की एक यात्रा" में मिलता है-: मैंने कभी ऐसे अंधविश्वास पर यकीन नहीं किया पर प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ ,कुछ साल पहले एक डच मैन अपनी नाव समेत समुन्द्र में कहीं खो गया और उस नाव में से कोई जिन्दा वापिस नहीं बचा और जल्द ही उसके गम में उसकी पत्नी भी मर गई और जहाँ ये हादसा हुआ वहां से गुजरती नावों के नाविकों का कहना है कि उन्होंने खराब मौसम में किसी को समुन्द्र में देखा,ये सच था या सिर्फ नाविकों की कल्पना ,ये नहीं पता लेकिन ये खबर जंगल में आग की तरह फ़ैल गई और अब जो भी नाविक वहाँ से गुजरते वे कहते कि रात में या कोहरे में उन्होंने किसी को देखा है,जिसकी एक झलक दिखते ही वो अगले पल गायब हो जाता है। साक्षत्कार -: राजा जॉर्ज ५वे ने अपने भाई और कुछ और लोगों के साथ इस जहाज को देखने का दावा किया है - ११ जुलाई १८८० को सुबह ४ बजे फ्लाइंग डचमैन को मैंने,मेरे भाई ने और कप्तान ने तेज लाल रोशनी में देखा और जब उस भूतिया जहाज को ढूँढा गया तो समुन्द्र में उसका नामो निशान भी नहीं था, लेकिन फिर से वहीँ पर इस भूतिया जहाज को १०:४५ पर १३ लोगों ने एक साथ देखा। भ्रम (मिराज़)-: एक जहाज पर कुछ नाविकों ने कोहरे में कुछ दुरी पर आसमान में एक समुंन्द्री जहाज की उल्टी परछाई देखी ,जिसे देख कर वो डर गए और उनमे से एक बोला के ये भूतिया जहाज एक अपशगुन है और अब उनमे से कोई भी बंदरगाह तक नहीं पहुँच पायेगा लेकिन उनका कप्तान जो इन बातों में यकीन नहीं करता था उसने बताया के ये कोहरे के कारण बना एक ऑप्टिकल प्रभाव यानि भ्रम है और जब वे लोग तट पर सही सलामत पहुँचे तब उन्हें कप्तान की बातों पर यकीन हुआ और उन्होंने ऐसी बातों पर यकीन ना करने का फैसला किया। सच चाहें कुछ भी हो लेकिन फ्लाइंग डचमैन की इस छवि को टीवी और फिल्मो में काफी प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया गया है - : • सोल ईटर नामक प्रोग्राम में फ्लाइंग डचमैन एक भूतिया जहाज की आत्मा है। • स्पाइडर मैन के कार्टून में फ्लाइंग डचमैन को एक खलनायक की तरह पेश किया गया। जिसे मार कर स्पाइडरमैन गाँव वालो को उसके जुल्मो से आज़ाद करवाता है • सुपर नेचुरल प्रोगाम में फ्लाइंग डचमैन को एक भूतिया किरदार की तरह पेश किया गया। टीवी के साथ साथ फिल्मों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल हुआ है -: १९५१ में बनी पैंडोरा एंड द फ्लाइंग डचमैन नामक फिल्म इसी समुद्री लोककथा से प्रेरित है इसमें नायक फ्लाइंग डचमैन है,जो ग़लतफहमी में अपनी पत्नी को बेवफा समझ कर उसका क़त्ल कर देता है और उसे काला पानी की सज़ा मिलती है लेकिन उसके अच्छे बर्ताव को देखते हुए उसे सात साल में एक बार छ महीने के लिए अपना सच्चा प्यार ढूंढने के लिए रिहा किया जाता है। ऐज ऑफ़ एम्पायरस कम्प्यूटर गेम में फ्लाइंग डचमैन एक चीट कोड है,ये एक जहाज है जो जमीन और पानी दोनों में चलता है। (ये लेख प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखा गया है और सत्यता का दावा नहीं करता) उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Hindi Info हिन्दू धर्म में मरने के बाद लाश को जलाते क्यों है

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे हिन्दू धर्म में मरने के बाद लाश को क्यों जलाते हैं बहुत ही अच्छा सवाल हैं और इसके धार्मिक और साइंटिफिक दोनों तरह के कारण हैं। हिन्दू धर्म में मान्यता है की हमारा शरीर 5 तत्वों से मिल कर बना हैं। आग, पानी, हवा, धरती और आकाश इन पांचो तत्वों के मेल से हराम शरीर बनता हैं। जब किसी व्यक्ति की मौत होती हैं तो उसके शरीर से आत्मा निकल जाती हैं क्योकि हिन्दू धर्म में आत्मा को अजर अमर माना गया हैं। और बचता हैं केवल हमारा शरीर जिसे वापस उन्ही पांचो तत्वों में मिलाना होता हैं इसलिए जब किसी व्यक्ति की मौत होती हैं तो उनको सबसे पहले गंगा जल से स्नान कराया जाता हैं फिर उनको अग्नि दी जाती हैं (जलाया जाता हैं) और फिर उनकी राख को गंगा में विसर्जित कर दिया जाता हैं। अब बात करते हैं साइंटिफिक कारण की। पुराने ज़माने में जब मेडिकल ने इतनी तरक्की नहीं की थी तब कई तरह की भयानक बिमारिय इन्सान को लग जाती थी जो की हवा में फ़ैल कर दुसरो को भी बीमार कर देती थी। इसी तरह की बीमारी से यदि कोई व्यक्ति मर जाता था तो उसके आस पास वाले लोगो का भी बीमार होने का खतरा बढ़ जाता था। इसी कारण से हिंदी धर्म में मर हुए व्यक्ति को जलने की प्रथा हैं। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Info ये है 3 सबसे विचित्र मछलियां जिनके बारे में जानकर हो जाएंगे हैरान

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे समुद्र की अनंत गहराइयों में आपको मछलियों की लाखों प्रजातियां देखने को मिल जाएगी। जिनके बारे में इंसान कम जान पाया है। क्योंकि उनकी शारीरिक बनावट हमारे आस पास पाए जाने वाली मछलियों से काफी अलग है। आज हम आपको तीन ऐसे मछलियों के बारे में बताएंगे जो थोड़ा-बहुत नहीं बल्कि काफी विचित्र है और उनकी रहन-सहन के बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। 1- रेड लैप्ड बैट फिश रेड लैप्ड बैट नामक ये मछली सिर्फ गैलापागोस द्वीप समूह में पाई जाती है। इस मछली की शारीरिक बनावट काफी विचित्र है। क्योंकि इस मछली की होंठ बिल्कुल इंसानों की तरह है। लेकिन होंठ एकदम लाल रंग के होते हैं। जिसे देख कर ऐसा लगता है कि यह मछली अपने होंठ पर लिपस्टिक लगा रखी है। 2- लंग फिश   आपने मछलियों के बारे में यह तो सुना ही होगा कि मछलियां पानी के बगैर जिंदा नहीं रह सकती हैं। लेकिन आपको बता दें अफ्रीका में पाई जाने वाली लंग फिश नामक यह मछली सूखा पड़ने पर खुद को जमीन में दफन कर लेती है। आपको बता दें सूखे के मौसम के दौरान जब यह जमीन के अंदर होती है तो अपने शरीर के मेटाबोलिज्म को 60 गुना तक कम कर लेती है। हाल ही में हुए एक शोध में यह पता चला है कि यह मछली पांच साल तक बिना कुछ खाए पीए जिंदा रह सकती है। 3- पाकु फिश इस मछली को बैल कटर नाम से भी जाना जाता है। इस मछली के दांत इंसानों जैसे होते हैं। यह जब मुंह फाड़ती है तो वह इंसानी मुंह नजर आता है। यह अपने दांतों से किसी को भी काटने से चूकती नहीं है। आपको बता दें खासकर यह मछलियां समुद्रा के काफी अंदर रहना पसंद करती है। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Amazing Info दुनिया के 5 दुर्लभ सांप

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे आज हम आपको 5 ऐसे सांपो के बारे में बताने वाले हैं जो अन्य सांपों से अलग है और बहुत दुर्लभ होती है कम ही देखने को मिलते हैं, तो चलिए शुरू करते हैं। 5-स्पाइडर-टेल्ड हॉर्नड वाईपर Third party image इस सांप की शिकार करने का तरीका बहुत अनोखा है यह शिकार को अपनी पूछ से भ्रमित करते हैं क्योंकि इनकी पूंछ देखने में किसी मकड़ी की तरह दिखाई देती है जिसके बाद जैसे ही कोई चीज “स्पाइडर-टेल्ड हॉर्नड वाईपर” सांप की पूंछ को मकड़ी समझकर उसका शिकार करने की कोशिश करता है तो वह सांप का शिकार बन जाता है इस सांप को 1968 में एक वैज्ञानिक अभियान के दौरान ईरान में खोजा गया था और इस पकड़े गए पहले सांप को शिकागो के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा गया था। 4- रैनबो बोआ  Third party image शरीर पर काली धारियों वाला यह सांप सूरज की रोशनी में आने के बाद बहुत कलरफुल हो जाता है इनकी लाल त्वचा पर सूरज की किरणें पड़ती है और यह साफ रंग-बिरंगे दिखाई देने लगते हैं जिस वजह से इस सांप को ”रैनबो बोआ” कहां जाता है साउथ अमेरिका का जंगल इन सांपों का घर है इन सांपों को पेड़ों पर चढ़ना बहुत अच्छा लगता है और यह सांप 6.5 फीट लंबे भी हो सकते हैं जो छोटे स्तनपाई जीव को अपना शिकार बनाते हैं। 3- स्पाइनी बुश वाईपर Third party image क्या आपको ड्रैगन पसंद है क्योंकि “स्पाइनी बुश वाईपर” सांप और ड्रैगन का मिलाजुला रूप है इसीलिए इस सांप की पीठ भी देखने में किसी ड्रैगन की तरह दिखाई देती है यह साफ सेंट्रल अफ्रीका के फॉरेस्ट में पाए जाते हैं जो सूखी पत्तियों और टहनियों के बीच धूप सेकते देखे जा सकते हैं इस प्रजाति के सांपों का रंग अलग-अलग हो सकता है इस प्रजाति के नर सांप 28.7 इंच तक बढ़ सकता हैं यह सांप छोटे स्तनपाई जीव और छिपकलियों का शिकार करते हैं। 2- बारबाडोस थ्रेड स्नेक  Third party image यह दुनिया का सबसे छोटा सांप है जो बारबाडोस के कैरेबियन जंगलों में पाया जाता है और इस प्रजाति के सबसे बड़े सांप का साइज केवल 4.9 इंच था इसके अलावा यह सांप 0.9 मीटर मोटे होते हैं इस सांप को “स्टेफेन ब्लेयर हेडगेस” ने खोजा था उन्होंने बीवी केरला के नाम पर इस सांप का साइंटिफिक नाम “Leptotyphlops carlae" रखा था स्टेफेन के मुताबिक यह सांप बिल्कुल नूडल जैसे होते हैं और अपने छोटे साइज की वजह से यह केवल दिमक और चींटी के लारवा को अपना शिकार बनाते हैं।  1- पैराडाइज फ्लाइंग स्नेक Third party image इस सांप की उड़ने की काबिलियत की वजह से इसे फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाने से पहले “पैराडाइज फ्लाइंग स्नेक” सांप अपने शरीर को z आकृति मैं मोड़ देते हैं और छलांग लगाते ही अपने शरीर को फैला लेते हैं जिससे यह कुछ दूरी को हवा में उड़कर पार कर लेते हैं इसके अलावा यह उड़ते हुए अपनी पूंछ की सहायता से दिशा भी बदल सकते हैं यह सांप साउथईस्ट एशिया में पाए जाते हैं जिनमें जहर होता है पर इनका जहर इंसान के लिए खतरनाक नहीं होता है। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

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