Hindi Story लाखों साल पुरानी गुफा का सच जानकर नासा भी हैरान

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लाखों साल पुरानी इस गुफा का सच जानकर नासा भी रह गया हैरान, बताया अंदर मत जाना नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, जानकारी के लिए आपको बता दें कि भगवान शिव को मानने वाले आज भी यह मानते हैं कि भगवान शिव शंकर अपने परिवार के साथ कैलाश पर्वत पर रहते हैं। आज भी भगवान शिव कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। लेकिन एक ऐसी मान्यता है। जिसके अनुसार भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर की एक गुफा में रहते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में आपको बता दें कि यह गुफा जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। यहां के स्थानीय लोग इस गुफा को भगवान शिव का घर कहते हैं। इस गुफा को शिवखोड़ी के नाम से भी पहचाना जाता है। दरअसल यह एक प्रकार की सुरंग है। जिसके बारे में कहा गया है कि इसका दूसरा छोर सीधा अमरनाथ की गुफा में जाकर खुलता है। जम्मू से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर उधमपुर नाम की जगह पर भगवान शिव की यह गुफा मौजूद है। शिवखोड़ी नाम की इस गुफा के अंदर जाने की हिम्मत किसी में नहीं होती लेकिन इसके दर्शन करने के लिए रोजाना बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी इंसान इस गुफा के अंदर जाता है वह वापस लौट कर नहीं आता। किसी भी श्रद्धालु से इस गुफा के बारे में पूछा जाता है तो वह इसके बारे में जरूर जानता होगा लेकिन अमरनाथ धाम पर आने वाले श्रद्धालु इस गुफा के दर्शन जरूर करते हैं। इसके पीछे एक मान्यता यह भी है कि इस गुफा का अमरनाथ गुफा से संबंध रखना कहा जाता है कि इस गुफा का दूसरा छोर अमरनाथ गुफा में जाकर खुलता है। अब इस बात की सच्चाई तो हालांकि किसी को पता नहीं है क्योंकि इस गुफा के अंदर कोई भी नहीं आता। यहां के स्थानीय लोगों का तो यह भी कहना है कि पुराने समय में श्रद्धालु इसी गुफा से अमरनाथ के दर्शन किया करते थे। एक और बात इस गुफा से जुड़ी हुई है। दरअसल जिस प्रकार से बाबा अमरनाथ की गुफा का शिवलिंग बिल्कुल प्राकृतिक है। उसी प्रकार से इस गुफा का शिवलिंग भी प्राकृतिक है। इसका निर्माण किस इंसान ने नहीं किया है। यह शिवलिंग चट्टान के आकार की वजह से बना है। यहां पर आने वाले श्रद्धालु इसे भगवान शिव का आशीर्वाद मानकर उसकी पूजा करते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि भगवान शिव का निवास स्थान के नाम से प्रसिद्ध शिवखोड़ी गुफा लगभग 3 मीटर ऊंची और 200 मीटर लंबी है। यह गुफा 1 मीटर चौड़ी और 2 से 3 मीटर ऊंची भी है। इस गुफा में बहुत सारी प्राकृतिक चीजें जैसे नंदी की मूर्ति पार्वती की मूर्ति आदि भी शामिल है। इस गुफा की छत पर सांप की आकृति भी बनी हुई है। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले. इस खबर के बारे में अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

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महाबलीपुरम की कहानी - Hp Video Status

१- परिचय नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे,ऐसा माना जाता है कि महाबलीपुरम ( जो वर्तमान में अपनी नक्काशियों के लिए जाना जाता है ) नामक राज्य में राजा सत्यसेन का शासन था। हालांकि उनका राज्य देश के अन्य राज्यों के मुकाबले उतना विशाल नहीं था लेकिन यह एक समृद्ध और सुखी राज्य था। राजा सत्यसेन दयालु व न्यायप्रिय थे। वह राज्य को प्रजा का राज्य व स्वयं को राज्य का सेवक कहलाना पसंद करते थे। उनके राज्य में मानो हरियाली व सुख की वर्षा होती हो। पुत्र सत्यव्रत व पुत्री अंबा के प्रति स्नेह व प्रजा के लिए अपने कर्तव्य के कारण ही वह अपनी अर्धांगिनी की यादों से बाहर आ पाए थे। हालांकि महारानी की अकाल मृत्यु का दुख तो मन में था ही लेकिन संतान, प्रजा का ख्याल व अपने कर्तव्य के चलते यह दुःख थोड़ा कम हो गया था। या फिर यह भी कहा जा सकता है की स्वय को महारानी की यादों से दूर रखने के लिए हर समय व्यस्त रहने का प्रयत्न करते। जहा एक ओर राज्य को सत्यसेन के रूप में दयालु व न्यायप्रिय राजा मिले वहीं दूसरी ओर महाबली के रूप में कुशल, पराक्रमी, निडर व वीर सेनापति भी मिले। महाबली के नेतृत्व में आज तक राज्य किसी भी युद्ध में पराजित नहीं हुआ था। इसीलिए सेनापति महाबली महाराज के सबसे प्रिय व विशेष सलाहकार भी थे। २- ईर्ष्या लेकिन यह भी सत्य है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जब राज्य में सत्यसेन के पिता महाराज कर्णसेन का शासन था तब महाराज के दोनों पुत्र सत्यसेन व धीरसेन में बहुत प्रेम था। दोनों ही युवराज बहुत कुशल योद्धा होने के साथ ही चतुर, पराक्रमी व राजनीति का अच्छा ज्ञान रखने वाले थे। अगर देखा जाए तो दोनों हर पहलू में एक से थे। कोई भी व्यक्ति दोनों युवराज में अंतर नहीं कर सकता था। लेकिन जब महाराज समाधि में विलीन हुए और उनकी इच्छानुसार सत्यसेन को राजा घोषित किया गया तो धीरसेन को यह बात अनुचित लगी। उसे लगा यह उसके साथ अन्याय है। वह भी किसी से कम नहीं है, फिर सत्यसेन को ही राजा क्यों??? दोनों की परीक्षा लेकर, सफल होने वाले को भी राज्य दिया जा सकता था। लेकिन पिता के निर्णय के आगे वह कुछ नहीं कर सकता था। इसलिए उसने यह बात स्वीकार ली। धीरे-धीरे सत्यसेन का राज्य समृद्ध होता गया। अब तक आस - पास के कुछ राज्य उनके अधीन हो चुके थे और वह प्रजा के प्रिय हो चुके थे। शायद इसी बात से धीरसेन को ईर्ष्या होने लगी थी। उसे स्वयं का अस्तित्व भंग होता नजर आने लगा। इसी द्वेष के चलते उसने कई बार महाराज के प्राण हरने के प्रयत्न किए लेकिन हर बार वह विफल ही रहा। शायद कुल देवता की कृपा या प्रजा का प्रेम ही रहा होगा, नहीं तो धीरसेन जैसे कुशल योद्धा का प्रहार कभी खाली नहीं जाता। अब शायद वह भी जान गया था कि वह अकेले सत्यसेन को नहीं मार सकता। अब उसे स्वप्न भी आते तो यही की किस तरह महाराज के प्राण लिए जाए। उसकी ईर्ष्या ने महाभयंकर रूप लेे लिया था। वह वीर, साहसी व कुशल योद्धा अब एक कायर, अपराधी की भांति सोचने लगा था। ३- मृत्यु एक दिन महाराज, सेनापति महाबली के साथ महल से बाहर प्रजा की सुरक्षा, पानी की व्यवस्था और किसानों की दशा का ब्यौरा लेने गए और वापस लौटकर वह सत्यव्रत और अंबा से भेंट करने गए। जैसे ही दोनों पिता को गले लगाने दौड़े, सत्यव्रत "पिता जी" कहते ही धरा पर गिर पड़ा। महाराज को समझ नहीं आया कि यह क्या हुआ? अंबा भी सहम गई। तुरंत वैद्य बुलाए गए और शीघ्र अतिशीघ्र उपचार आरंभ कर दिया गया। वैद्य ने औषधि तो दे दी लेकिन युवराज पर उसका कोई असर नहीं हुआ। " ऐसा विष युवराज को दिया गया है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे होता है। इसका कोई तोड़ हमारे पास नहीं है।" वैद्य आपस में कह रहे थे। परन्तु हम प्रयत्न तो कर ही सकते है, कदाचित कोई हल निकल ही जाए। हा ! आप सही कह रहे है, ऐसा कहते हुए प्रयत्न फिर से आरंभ कर दिए जाते है। परंतु युवराज का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन बिगड़ता ही जा रहा था। कोई औषधि, कोई उपचार काम नहीं कर रहा था। किसी भी वेद्य के पास इसका हल नहीं था। महाराज अपने सभी कार्य, राजपाठ छोड़कर युवराज के कक्ष के बाहर चक्कर लगाते रहते और आकाश की ओर देखते हुए हाथ जोड़कर प्रभु से सत्यव्रत के कुशल मंगल की कामना करते। जो राजमहल सत्यव्रत ओर अंबा की मुस्कुराहट से भौर से संध्या तक महकता और खिलखिलाता रहता था अब कई दिनों से महल में एक हंसी का स्वर भी ना सुनाई दिया था। मानो पूरे महल में दुःख ने घर कर लिया था। अमावस की वह रात अत्यंत भयानक व रूदनभरी रही जब नन्हे राजकुमार की मृत्यु हुई। इस घटना से एक बार फिर राजमहल में अंधकार छा गया। ४- अपराधी कौन? कई महीनों तक महल ने पूर्णिमा का चांद ना देखा। महाराज ने अपनी आंखो के सामने पहले अपनी पत्नी और फिर पुत्र को मरते देखा। उनकी आंखे नम थी लेकिन आंखो से एक भी आंसू ना बहने दिया। वह ऐसा दुष्कर्म करने वाले को अपने हांथो से सजा देना चाहते थे। लेकिन समस्या यह थी कि यह काम किसका हो सकता है, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था। उनकी तो जैसे सोचने कि शक्ति ही क्षीण हो गई थी। महाराज को सेनापति महाबली पर पूर्ण विश्वास था इसीलिए उन्होंने सेनापति को बुलवाकर अपराधी का पता लगाने का आदेश दिया। महाराज की आज्ञा पाकर सेनापति बहुत ही गुप्त तरीके से खोज करने लगे। किन्तु अपराधी इतना चतुर था कि कोई भी निशान नहीं छोड़ा था। लेकिन महाबली ने हार नहीं मानी और अपराधी का पता लगाने में जुटे रहे की एक दिन उन्हें ज्ञात हुआ कि जिस दिन महाराज महल से बाहर गए थे उसी दिन महाराज के भाई बहुत समय तक राजकुमार के साथ ही थे। वह इस विषय में कोई भूल नहीं करना चाहते थे। उन्हें पूर्ण रूप से तो पता नहीं चल पाया था लेकिन उन्होंने एक युक्ति बना ली थी। महाबली महाराज के पास गए और महाराज से कहा - हे महाराज ! आप कल प्रातः महल से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति को सभागार में उपस्थित होने का आदेश दे। कल आपको युवराज का हत्यारा मिल जाएगा। यह सुन महाराज ने आशा पूर्ण दृष्टि से देखते हुए पूछा - क्या तुम्हे अपराधी का पता चल गया है? कौन है वो? किसने मेरे पुत्र की हत्या की है? बताओ महाबली...... महाराज! आप कृपया धैर्य रखें और शांत हो जाए। कल प्रातः आपको अपने सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होंगे। अब आप विश्राम कीजिए। महाराज की आज्ञा पाकर सेनापति कक्ष से बाहर आए और विचार करने लगे " यदि महाराज के भाई ही युवराज के हत्यारे हुए तो महाराज कैसे यह सब सह पाएंगे।" ५- बहिष्कार अंधेरा छटा और पंछियों का कलरव चारो ओर फैलने लगा। अब समय आ गया था अपराधी को सजा देने का। सेनापति अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में कांच का एक प्याला लिए हुए कहने लगे - " युवराज का हत्यारा कौन है? महाराज जान गए है।" जिसने भी युवराज की हत्या कि है वह स्वयं सबके सामने आ जाए अन्यथा महाराज की आज्ञानुसार उसे भी यह विष पिला दिया जाएगा यदि तब भी उसी क्षण उसकी मृत्यु ना हुई तो इसी तलवार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा। महाराज की नजर सभा में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति पर थी। अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों ना हो, मौत का भय तो चेहरे पर झलक ही आता है। महाराज तुरंत सिंहासन से उठे और सेनापति के हाथ से तलवार लेकर क्रोध में आगे बढ़ते हुए बोले - " नीच, पापी तूने ऐसा क्यों किया? इस सिंहासन को पाने के लालच में? " अब महाराज की तलवार और धीरसेन का सिर... लेकिन वह था तो महाराज का भाई ही। महाराज अपने है भाई के प्राण कैसे लेे सकते थे। धीरसेन ने पहली बार अपने भाई की आंखो में अपने लिए घृणा महसूस की। महाराज ने उसकी तरफ से नज़रे हटाते हुए कहा - " दूर हो जाओ मेरी नज़रों से,  मै महाराज सत्यसेन.. अभी तुम्हारा महाबलीपुरम राज्य से बहिष्कार करता हू।" धीरसेन बिना कुछ कहे तुरंत सिर झुकाए राज्य की सीमा से बाहर चला गया।                                 ६- परीक्षा महाराज ने अंबा को युद्धनीति सिखाने का उत्तरदायित्व सेनापति महाबली को सौप दिया। वह स्वयं भी अंबा को तलवारबाज़ी सिखाया करते व अंबा के साथ इसका अभ्यास भी किया करते। प्रजा के प्रति अपना कर्तव्य, एक राजा होने के साथ ही एक पिता होने का कर्तव्य भी वह बहुत अच्छे से निभा रहे थे। वह कितने भी व्यस्त क्यों ना हो लेकिन अंबा के लिए समय निकाल ही लेते थे। कब इतना समय बीत गया पता ही नहीं चला। खिलौनों से खेलने वाली अंबा अब तलवारबाज़ी, तीरंदाजी, घुड़सवारी करने लगी थी और राज्य के कई कार्यों में पिता जी की सहायता भी करती थी। अब समय आ गया था अंबा कि परीक्षा का...... पड़ोसी राज्य के साथ युद्ध छिड़ चुका था। इस बार स्वयं अंबा ने पिता के स्थान पर युद्ध में जाने की आज्ञा मांगी। पिता ने मुस्कुराते हुए, अंबा के सिर पर हाथ रखा व पुत्री को मंजूरी दे दी। कई दिनों तक युद्ध चलता रहा। अंबा स्वयं सेनापति महाबली के साथ युद्ध का नेतृत्व कर रही थी। उसकी युद्ध नीति बहुत ही कुशल व थोड़ी अलग थी। सेनापति हैरान थे लेकिन खुश भी थे। काफी लंबे युद्ध के बाद महाबलीपुरम राज्य विजयी हुआ.... राज्य के अभी लोग अंबा व सेनापति की प्रसंशा व जय जयकार कर रहे थे। पहली बार एक महिला युद्ध क्षेत्र में युद्ध कर रही थी। अंबा के महल वापस लौटने पर महाराज अपनी पुत्री को गले लगा लेते है और खुशी से भावविभोर होकर कहते है - " पुत्री! मुझे तुम पर गर्व है। आज तुम परीक्षा में सफल रही।" * महल में शांतिपूर्ण मुस्कान फैल जाती है।* ७- राज्याभिषेक समय व्यतीत होने के साथ-साथ अंबा नई कलाए सीखती रही व पिता का मान बढ़ाती रही।अब राजा वृद्ध हो चले थे और अब उन्हें आभास हो गया था कि अब वह सभी कार्यों के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने एक सभा बिठाई और अंबा को राजगद्दी देने की बात रखी। सभी इस बात से सहमत हुए क्योंकि सभी अंबा के शौर्य से परिचित थे और सिर्फ एक युवक ही राजगद्दी पर बैठ सकता है, यह राज्य इस नियम से सहमत नहीं था। एक शुभ मुहूर्त निकलवाया गया और बहुत ही हर्षोल्लास के साथ अंबा का राज्याभिषेक किया गया। प्रजा अंबा को शासक के रूप में पाकर बहुत ही खुश थी। सभी अंबा को बधाई देते व बधाई गीत गाते जैसे आज ही होली और आज ही दीवाली हो। महाराज ने महाबली से कहा - " महाबली! जैसे आज तक आप मेरे और इस राज्य के रक्षक रहे है वैसे ही अब आपको पुत्री अंबा की रक्षा करनी है।" जी महाराज! जैसी आपकी आज्ञा..... उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

दो दोस्तों की कहानी – Small Story in Hindi About 2 Friends - Hp Video Status

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे कहानियां हम सभी को एक अलग दुनिया में ले जाती है। और कहानी जितनी छोटी होती है उतनी ही मजेदार और प्रेरणादायक भी । इसलिए  हम आपके लिए ऐसी ही एक शोर्ट हिंदी स्टोरी लाये है जो आप बस 1 मिनट में पढ़ सकते है। ये कहानी छोटी भी है और प्रेर्नादायक्त भी। एक बार दो दोस्त रेगिस्तान पार कर रहे थे। रास्ते में उनका किसी बात पर झगड़ा हो गया और एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को गुस्से में आकर थप्पड़ मार दिया। दूसरे दोस्त को इस बात से दिल पर बहुत ठेस पहुंची, और उसने रेत पर एक लकड़ी से लिखा -“आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने छोटा सा झगड़ा होने पर थप्पड़ मार दिया “रेगिस्तान में वे एक दुसरे को छोड़कर नहीं जा सकते थे, इसलिए उन्होंने सफर जारी रखा और सोचा मंज़िल पर पहुँचकर इस झगडे को सुलझाया जायेगा। वे आपस में बिना बात किये, साथ साथ चलते रहे, आगे उन्हें एक बड़ी झील मिली। उन्होंने इस झील में नहाकर तरोताज़ा होने का फैसला किया। झील के दुसरे किनारे पर एक बहुत खतरनाक दलदल था, वह दोस्त जिसे चांटा मारा गया था, तैरते – तैरते झील के दूसरे किनारे पर इस दलदल में जा फंसा, और डूबने लगा। उसके दोस्त ने जब यह देखा, तो वह भी तुरंत उस तरफ तैर कर आया और अपने दोस्त को बड़ी मशक्क़त के बाद बाहर निकल लिया. जिस दोस्त को दलदल से बचाया गया था उसने झील के किनारे एक बड़े पत्थर पर लिखा “आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई” दूसरे दोस्त ने यह देखकर पूछा “जब मैंने तुम्हे थप्पड़ मारा था तो तुमने उसे रेत पर लिखा ! लेकिन जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा क्यों, दूसरे दोस्त ने जवाब दिया “जब हमें कोई दुःख पहुंचाता है तो हमें इसे रेत पर लिखना चाहिए, जहाँ वक़्त और माफ़ी की हवाएँ उसे मिटा दें” लेकिन जब कोई हमारे साथ अच्छा बर्ताव करे, तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए, जहाँ उसे कोई मिटा ना सके। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Beautiful Story of Life in Hindi – आपकी ज़िन्दगी बदल देगी ये कहानी

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे अक्सर हम अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, और उन्हें देखकर हमें ऐसा लगता है कि उनके पास सबकुछ है और हमारे पास कुछ भी नहीं। यही देखकर हम दुखी हो जाते हैं। लेकिन इस Beautiful Story of Life in Hindi को पढ़कर आप शायद ऐसा नहीं सोचेगें। इस कहानी को पढ़ने के बाद जिंदगी को देखने का आपका नजरिया यकीनन बदल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं Nice Story about Life in Hindi   एक कौआ था, वो अपनी जिंदगी से बहुत ही संतुष्ट और खुश था, हमेशा अपनी ही मस्ती में रहता था । वो हमेशा अपने पंखों को फैला ऊंचे आसमान में उड़ता था जिसपर की उसे बहुत गर्व था । एक दिन कौए को बहुत तेज प्यास लगी और वो एक तालाब के पास रुका, वहां उसकी नजर हंस पर पड़ी। हंस को देख कौआ मन ही मन ये सोचने लगा कि ये हंस कितना खूबसूरत है। इसका सफेद रंग, इसके शरीर की बनावट कितनी सुंदर है, यकीनन ये अपनी सुंदरता से बहुत खुश होगा । मैं तो कितना काला हूं। कौए ने मन ही मन ये सोचा कि ये अपनी सुंदरता से बहुत खुश होगा और यही सोचते- सोचते हंस के पास गया।   कौए ने हंस से कहा “तुम कितने सुंदर हो, यकीनन तुम्हे अपनी सुंदरता पर बहुत गर्व महसूस होता होगा और दूसरे पक्षियों को तुमसे जलन होती होगी?” कौए की ये बात सुन हंस ने कहा “मित्र मैं भी पहले यही सोचता था, लेकिन जब मैंने तोते को देखा, तब मुझे लगा कि मैं गलत था। क्योंकि तोता बहुत सुंदर होता है और उसके पास दो प्यारे- प्यारे रंग होते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि तोता ही सबसे सुंदर पक्षी है, मैं तो उसके सामने कुछ भी नहीं”.   हंस की ये बात सुन कर कौआ तोते के पास पहुंचा। तोते की ख़ूबसूरती देखकर कौआ स्तब्ध रह गया और तोते को जा कर कहा “तुम कितने सुंदर हो, हंस बिल्कुल सही कह रहा था, तुम तो हंस से भी ज्यादा खूबसूरत हो, यकीनन तुम्हे अपनी ख़ूबसूरती पर नाज़ होगा और तुम हमेशा खुश रहते होंगे”. कौए की बात सुनकर तोते ने कहा “नहीं ……. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मुझे भी पहले ऐसा ही लगता था, जबतक मैंने मोर को नहीं देखा था। मोर के पास बहुत सारे रंग हैं और वो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है, इसलिए मोर ही दुनिया का सबसे सुंदर और खुशहाल पक्षी है।” फिर क्या था तोते की बात सुन कौआ चिड़ियाघर पहुंच गया मोर के पास।   चिड़ियाघर पहुंच कर कौए ने देखा कि मोर पिंजरे में बंद है और हजारों लोग उसे देखने के लिए आ रहे हैं। कुछ पल के लिए तो कौआ मोर की सुंदरता देखकर हैरान ही रह गया और कुछ देर बाद मोर के पास गया और उससे कहा “मित्र मोर, तुम तो वाकई में बहुत ही ज्यादा सुंदर हो। तुम्हारी सुंदरता अद्भूत है। तुम्हें देखने के लिए तो हजारों लोग भी आते हैं। इसलिए सच में तुम ही दुनिया के सबसे सुंदर और खूबसूरत पक्षी हो।”   Inspirational Story about Life in Hindi   कौए की ये बात सुनकर मोर बोला “मैं भी यही सोचा करता था कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और खुश पक्षी हूं। लेकिन देखो मेरी सुंदरता की वजह से मुझे यहां पिंजरे में कैद कर लिया गया है। मित्र मैं खुश नहीं हूं। मैं तो अब बस यही सोचता हूं कि काश मैं कौआ होता तो आजाद आसामान में उड़ रहा होता।”   मोर की कथनी सुन कौए को सब कुछ समझ आ गया। अब उसे दोबारा से अपने पर गर्व महसूस होने लगा और अब वो पहले से भी ज़्यादा खुश रहने लगा।   दोस्तों, बिलकुल यही कहानी आजकल हम सब की है। हम दुसरो की दौलत, बड़ा घरबार, गाड़ियां देखकर सोचते है कि ये लोग कितने खुश होंगे लेकिन ऐसा सबके साथ नहीं होता। हमारे पास जो कुछ भी है हमें उससे संतुष्ट रहना चाहिए वरना हम कभी खुश नहीं रह पाएंगे। अक्सर हम उन्हीं चीजों के पीछे भागते हैं, जो हमारे पास नहीं है और ऐसे ही हमारा बहुमूल्य समय निकलता जाता है। हमेशा याद रखिये कि हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती!   उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.  

Real Story एक महान योद्धा जिसका महाराणा प्रताप ने अपमान किया था

इतिहास का एक महान योद्धा जिसका महाराणा प्रताप ने अपमान किया था नाम जरूर जाने नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, इतिहास में कई बड़े-बड़े और शक्तिशाली योद्धा में जन्म लिया था, इनकी वीरता के गुणगान आज भी गाए जाते हैं लेकिन आज हम आप लोगों को इतिहास के एक ऐसे शक्तिशाली योद्धा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका अपमान महाराणा प्रताप ने किया था। महाराणा प्रताप इतिहास की एक शक्तिशाली और बहादुर योद्धा माने जाते हैं जो अपने जीवन काल में हमेशा अपनों के खिलाफ युद्ध किये थे। दोस्तों महाराणा प्रताप ने इतनी शक्तिशाली योद्धा का अपमान किया था वह कोई और नहीं बल्कि मान सिंह है जिसे इतिहास का एक महान योद्धा के रूप में जाना जाता है। मानसिंह ने अपने जीवन काल में अकबर जैसे राजा के साथ मिलकर का युद्ध लड़े थे। दोस्तों बता दे मानसिंह ने असम, केरल जैसे राज्य को देखकर सम्राट अकबर को दे दिया था, इसलिए सम्राट अकबर ने मानसिंह की बहादुरी को देख कर उसे प्रधान सेनापति नियुक्त कर दिया था। दोस्तों बात उस समय की है जब राजा अकबर चित्तौड़ को अपने राज्य में मिलाने के लिए चित्तौड़ पर बार बार आक्रमण कर रहा था, लेकिन हमेशा उसे महाराणा प्रताप के हाथों से हार का सामना करना पड़ रहा था, जिसके कारण राजा अकबर ने मानसिंह को महाराणा प्रताप से बात करने के लिए चित्तौड़ भेजा। उसके बाद जब मान सिंह चित्तौड़ पहुंचा तब वहां पर महाराणा प्रताप के मंत्रियों ने मानसिंह का अच्छे से स्वागत किया लेकिन महाराणा प्रताप स्वागत करने के लिए नहीं आए। उसके बाद जब खाना खाने का समय आया तब भी महाराणा प्रताप पेट दर्द का बहाना बनाकर मानसिंह के साथ खाना खाने से इंकार कर दिया। उसके बाद मानसिंह को बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उन्होंने महाराणा प्रताप के पास जाकर उनसे साथ में खाना न खाने का कारण पूछा। उसके बाद महाराणा प्रताप ने मानसिंह से कहा कि जो व्यक्ति मातृभूमि की इज्जत दुश्मनों के साथ मिलकर लूटता है हम उस व्यक्ति से बात करना भी पसंद नहीं करते हैं। उसके बाद मानसिंह वहां से चला जाता है। मान सिंह के जाने के बाद महाराणा प्रताप ने सभी बर्तनों का शुद्धिकरण करवाया था। उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

Hindi Info भारत के 5 सबसे अनूठे गांव ये है

ये है भारत के 5 सबसे अनूठे गांव, नंबर 1 में तो है अपना संविधान. नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे वेबसाइट पे, आज हम आपको भारत के 5 सबसे अनोखे गांव के बारे में बताने वाले हैं जो अपने आप में अलग ही देश-विदेश में पहचान रखते हैं, तो चलिए आज की चर्चा शुरू करते हैं। 5. पिपलांत्री यह भारत का सबसे विकसित गांव के तौर पर जाना जाता है। इस गांव के विकास को डेनमार्क देश की किताबों में भी पढ़ाया जाता है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर लोग इस गांव के बारे में नहीं जानते हैं। यह गांव राजस्थान के उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर है और इस गांव की जनसंख्या करीब 1500 लोगों की है। इस गांव में पानी, पेड़ और बेटी बचाने के लिए देशभर में सबसे शानदार उदाहरण पेश किया है। इस गांव में इजरायल तकनीक पर आधारित कई प्रकार हाईटेक खेती की जाती है। लड़कियों के जन्म पर इस गांव में 111 पेड़ लगाने होते हैं और इनकी शादी का सारा खर्च पूरा गांव मिलकर उठाता है। 4. मावल्यान्नॉंग इस गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव की उपाधि मिली हुई है। यह गांव स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से कई सालों पहले स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है। यह गांव भगवान का बगीचे के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह गांव भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर पर मेघालय राज्य में स्थित है। आपको अपनी जिंदगी में एक बार इस गांव में जरूर जाकर आना चाहिए। 3. कोडिन्ही केरल में स्थित यह गांव जुड़वाँ बच्चों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। आपको यहां पर हर घर में एक जुड़वाँ बच्चा जरूर मिल जाएगा। यहां जुड़वाँ बच्चा पैदा होने की क्या वजह है, अभी तक कोई भी असली कारण नहीं खोज पाया है। आपको यहां पर नवजात शिशु लेकर 60 साल के बुड्ढे तक का डबल रोल मिल जाएगा। यह गांव वाले इन जुड़वाँ बच्चों की वजह से कितने कंफ्यूज होते होंगे यह तो अब बस ऊपरवाला ही जाने। 2. करचोंड आज भी भारत में अंतरजातीय विवाह या फिर शादी से पहले लड़की से मिलने की वजह कितनी ही समस्या और लड़ाई दंगे हो जाते हैं। भारतीय न्यायालय ने हाल ही में लोगों को लव इन रिलेशनशिप में रहने के अधिकार प्रदान किए हैं लेकिन यह गांव इस मामले में हजारों साल पहले से ही आगे हैं। गुजरात के सेलवास से 30 किलोमीटर दूर स्थित 3 हजार आदिवासी लोगों के इस गांव में आप बेरोकटोक किसी भी लड़की के साथ लव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। अक्सर लोगों की गांव के प्रति गलत धारणाएं ही रहती है लेकिन यह गांव शहर से भी आगे है। 1. मलाणा हिमाचल प्रदेश के मनाली शहर से 70 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव अपने आप में कई खूबियों से भरा हुआ है। अगर आपको इस गांव की पहली खूबी बताई जाए तो इस गांव में कनाशी भाषा बोली जाती है जो केवल विश्व में केवल इसी गांव के लोग जानते हैं और यह इसे ना ही किसी बाहरी लोगों को सिखाते हैं। दूसरी बात इस गांव में मलाणा क्रीम मिलती है जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ भांग के तौर पर जानी जाती है। इस गांव के लोग खुद को सिकंदर का वंशज मानते हैं और यह दुनिया का सबसे पुरानी लोकशाही गांव है। इस गांव में खुद का संविधान और संसद है जिसमें ये निचले सदन को कनिष्थाँग और उच्च सदन को जयेशथाँग कहते है। गांव में साल भर भीड़ रहती है लेकिन यहां के लोग अपने ही मस्ती में रहते हैं। खैर, यह थे भारत के कुछ अनूठे गांव, अगर आपके गांव या आसपास गांव में भी कुछ अनूठी बात है उम्मीद है दोस्तो आपको Hp Video Status की यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें. और आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए हमारे Facebook Page को like करना ना भुले.

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